Whooping cough काली खांसी के कारण लक्षण उपचार

Whooping cough काली खांसी के कारण लक्षण उपचार

Whooping cough काली खांसी के कारण लक्षण उपचार

कुकुर खांसी एक संक्रामक रोग है। इस रोग में कुकुर खांसी से पीड़ित रोगी के संपर्क में आने से दूसरे लोगों को भी यह रोग आसानी से अपनी प्रभाव से प्रभावित करना शुरू कर देता है। हालाकि कुकुर खांसी सबसे ज्यादा कम आयु के बच्चों में तीव्र गति से फैलता है। काली खांसी जीवाणु से फैलने वाला एक संक्रमित रोग है। जो शुरुआती समय में पीड़ित रोगी के नाक गले से प्रारंभ होता है। जैसा कि मैंने आप सभी को पहले ही बताया है कि यह कम आयु के बच्चे में आसानी से फैलने लगता है। 2 वर्ष से कम आयु के बच्चे में कुकुर खांसी और काली खांसी का प्रभाव सबसे ज्यादा देखने को मिल सकता है। (Whooping cough काली खांसी के कारण लक्षण उपचार)

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शुरुआती दौर में कुकुर खांसी या काली खांसी के रोग के दौरान बच्चों के अंदर खांसी करने के दौरान भो भो  की आवाज आती है। इसीलिए इसे इसी नाम से नामांकन किया गया है। काली खांसी के रोग में रोगी को बार बार खांसी आती है। खांसी के साथ साथ कभी कभी रोगी को उल्टी आने की संभावनाएं बढ़ जाती है। लगातार खांसी आने की वजह से ज्यादातर रोगी खांसी के समय उल्टी कर जाते हैं। सर्दी में या मौसम बदलने पर खांसी होनी शुरू हो जाती है। जिससे बलगम निकलता है। या फिर सूखी खांसी बन जाती है। काली खांसी छोटे बच्चों में होती है। चेहरा सुर्ख हो जाती है। और दम घुटना शुरू हो जाता है।

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हालांकि खांसी के उपचार करने के लिए कई प्रकार के रासायनिक दवाइयों का सेवन होता आ रहा है। लेकिन ऐसी दवाइयों के सेवन करने से कभी-कभी यह रोग काफी हद तक बढ़ भी जाता है। ऐसे में हमें खांसी जैसे समस्याओं का समाधान पाने के लिए आयुर्वेदिक दवाइयों का सेवन करना अति आवश्यक माना जाता है। आयुर्वेदिक दवाइयों के सेवन करने से शरीर के अंदर के साइड इफेक्ट होने की संभावना नहीं होती है। आप निश्चिंत होके आयुर्वेदिक दवाइयों का सेवन को सुधारने के लिए कर सकते हैं। (Whooping cough काली खांसी के कारण लक्षण उपचार)

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आइए हम कुकुर खांसी और काली खांसी के बारे में विस्तार से जानते हैं। किसी भी रोग के उपचार करने से पहले उस रोग के कारण के बारे में जान लेना अच्छा माना जाता है। यदि हम किसी रोग के बारे में अच्छी तरह से जान ले तो उस रोग के उपचार करने में हमें कई प्रकार से लाभ प्राप्त होता है। तो आइए हम जानते हैं सबसे पहले की कुकुर खांसी किन कारणों से कम आयु के बच्चों में फैलने लगता है। ऐसे बच्चे जो शुरुआती समय से अपने मां के स्तनपान नहीं करते हो। अर्थात अपने मां के दूध का सेवन नहीं करते है। ऐसे बच्चों के शरीर के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम हो जाती है। और ऐसे बच्चों के शरीर के अंदर कुकुर खांसी और काली खांसी के साथ साथ कई रोग होने की संभावना भी अधिक बढ़ जाती है।

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साथ ही साथ यदि नवजात शिशु या कम आयु के बच्चे ज्यादा गंदगी भरी जगह पर रहते हैं। ऐसे में जीवाणु से फैलने वाला या संक्रमित रोग आसानी से कम आयु के बच्चे को अपने प्रभाव से प्रभावित करना शुरू कर देता है। आइये अब हम कुकुर खांसी और काली खांसी के रोग से बचने के बारे में विस्तार से जानते हैं। हालांकि आयुर्वेदिक विज्ञान में सभी प्रकार के रोगों का निवारण दिया गया है। और हमें अपने शरीर के अंदर उत्पन्न होने वाले किसी भी रोग में आयुर्वेद का उपयोग करना काफी हद तक अच्छा माना जाता है। आयुर्वेदिक दवाइयों के सेवन करने से शरीर के अंदर किसी प्रकार के साइड इफेक्ट होने की संभावना नहीं होती है। साथ ही साथ आयुर्वेदिक दवाइयों के सेवन करने से शरीर के अंदर अन्य रोगो का भी निवारण आसानी से किया जा सकता है। (Whooping cough काली खांसी के कारण लक्षण उपचार)

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आइये अब हम सबसे पहले नुस्खे के बारे में जानते हैं। जिसके लगातार सेवन करने से काली खांसी और कफ खांसी के जैसे रोग में आसानी से लाभ प्राप्त किया जा सकता है। साथ ही साथ निरंतर आयुर्वेदिक दवाइयों के सेवन करने से शरीर को पूर्ण रूप से स्वस्थ और रोग मुक्त बनाया जा सकता है। सबसे पहले नुस्खे के निर्माण करने के लिए अदरक और शहद की आवश्यकता होगी। एक चम्मच अदरक के रस को एक चम्मच शहद के साथ सेवन करने से काली खांसी में काफी राहत महसूस होता है। निरंतर 4 से 5 दिन तक इस औषधि का सेवन करने से काली खांसी को अल्प समय में शरीर से खत्म किया जा सकता है। साथ ही साथ इस नुस्खे का उपयोग आप 1 दिन में तीन से चार बार अवश्य करें। इस नुस्खे को रात में सोने से पहले उपयोग करना रामबाण औषधि माना जाता है।

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आइए हम दूसरे दूसरे नुस्खे के बारे में जानते हैं। दूसरे नुस्खे का निर्माण करने के लिए काली मिर्च की आवश्यकता होगी। काली मिर्च को महीन पीस का चटनी बना लेना है। और खाने से पहले प्रतिदिन थोड़ी सी मात्रा में इस चटनी का सेवन करना है। काली मिर्च की बनी हुई चटनी दमा खांसी और सूखी खांसी जैसी समस्याओं में काफी राहत महसूस दिलाता है। साथ ही साथ काली मिर्च की बनी हुई चटनी शरीर के अंदर अल्सर जैसी समस्याओं में भी राहत पहुंचाती है। हालांकि काली मिर्च का सेवन कई प्रकार की औषधियों के निर्माण में भी किया जाता है। इस प्रकार से काली मिर्च के सेवन करने के साथ-साथ आप कुकुर खांसी और काली खांसी जैसी समस्याओं में समाधान प्राप्त कर सकते हैं। (Whooping cough काली खांसी के कारण लक्षण उपचार)

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काली खांसी की समस्या से छुटकारा पाने के लिए बदाम का भी उपयोग करना काफी लाभप्रद होता है। आइए हम जानते हैं। आइये अब हम जानते है। कैसे बदाम की मदद से हम शरीर के अंदर उत्पन्न हो रहे काली खांसी और कुकुर खांसी जैसी समस्याओं को खत्म कर सकते हैं। पांच बदाम शाम को जल में फूलने के लिए छोड़ दें। और सुबह उठकर इस बादाम  को अच्छी तरह से इसके छिलके को उतार के एक से दो कली कच्ची लहसुन के साथ मिलाकर इसका पेस्ट बना ले। तैयार किए गए पेस्ट को सुबह-शाम सेवन करने से किसी प्रकार के खांसी में खासकर काली खांसी और कुकुर खांसी में रामबाण औषधि माना जाता है। कम आयु के बच्चों में लहसुन का माला बना के पहनाना भी काफी लाभप्रद साबित होता है। लहसुन का माला बना के पहनाने से बच्चो सक्रमण से बचाया जा सकता है।

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कुकुर खांसी और काली खांसी जैसी समस्याओं में लौंग का उपयोग करना भी काफी अल्प समय में काली खांसी को समाप्त करने में मदद करता है। लौंग के उपयोग करने के लिए सबसे पहले आवश्यकता अनुसार लोंग को आग पर अच्छी तरह से भूल ले। भुने हुए लोंग को शहद मिलाकर इसका पेस्ट तैयार कर ले। तैयार पेस्ट को सुबह शाम सेवन करने से काली खांसी में राहत महसूस होता है। हालांकि लौंग का सेवन करना कई अन्य रोगों में भी लाभप्रद होता है। लोंग एक आयुर्वेदिक औषधि माना जाता है। (Whooping cough काली खांसी के कारण लक्षण उपचार)

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जो कई प्रकार के औषधियों के निर्माण करने में भी इसका उपयोग होता आ रहा है। पुराने समय से ही लौंग का उपयोग खांसी और काली खांसी के औषधि बनाने के निर्माण में होता आ रहा है। अतः आप निश्चिंत होकर लौंग का सेवन कर सकते हैं। बताए गए सभी औषधियों के सेवन करने से किसी प्रकार के साइड से होने की संभावना नहीं होती है। अतः आप निश्चिंत होकर इन सभी आयुर्वेदिक नुस्खे का उपयोग काली खांसी और समस्याओं को सही करने के लिए कर सकते हैं। (Whooping cough काली खांसी के कारण लक्षण उपचार)

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कुकुर खांसी और काली खांसी जैसी समस्याओं में तुलसी का सेवन करना भी काफी लाभप्रद होता है। तुलसी खांसी के समस्याओं को जड़ से समाप्त करने में रोगी की मदद करता है। साथ ही साथ तुलसी एक ऐसा आयुर्वेदिक औषधि है। जो खांसी के साथ साथ शरीर के अंदर उत्पन्न हो रहे कई प्रकार के एलर्जी संक्रमण और दिल से जुड़ी समस्याओं को जड़ से समाप्त करने में रोगी की मदद करता है। (Whooping cough काली खांसी के कारण लक्षण उपचार)

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कुकर खांसी और काली खांसी में तुलसी के प्रतिदिन सेवन करने से यह रोग अल्प समय में ही शरीर से खत्म हो जाता है। आइए हम जानते हैं। कैसे तुलसी के उपयोग करके शरीर के अंदर से काली खांसी और कुकुर खांसी जैसी समस्याओं को समाप्त किया जा सकता है। प्रतिदिन सुबह सोकर उठने के बाद सुबह सुबह खाली पेट चार से पांच तुलसी के पत्ते का सेवन करना कुकुर खांसी जैसी समस्याओं के लिए रामबाण औषधि माना जाता है। (Whooping cough काली खांसी के कारण लक्षण उपचार)

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कुकर खांसी जैसी समस्याओं में तुलसी का काढ़ा बनाकर भी सेवन करना काफी फायदेमंद होता है। आइए हम जानते हैं। कैसे तुलसी के पत्ते की मदद से काढ़ा तैयार करके कुकुर खांसी जैसी समस्याओं को समाप्त किया जा सकता है। एक गिलास पानी में चार से पांच तुलसी के पत्ते को आधे घंटे तक गर्म करना है। जब यह पानी एक गिलास से घटकर आधा गिलास हो जाए। तब इसे हमें छान के इसका सेवन प्रतिदिन सुबह-शाम रोजाना 4 से 5 दिन तक करते रहना है। 4 से 5 दिन लगातार तुलसी के पत्ते से बने इस काढ़े के सेवन करने से पुराने से पुराना खांसी और काली खांसी कुकुर खांसी कफ की समस्याओं में राहत महसूस किया जा सकता है। (Whooping cough काली खांसी के कारण लक्षण उपचार)

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यदि आप सभी को मेरे द्वारा दिया गया यह जानकारी पसंद आया हो तो आप अपने दोस्त और परिवारों के बीच अवश्य शेयर कर दे। हालांकि कुकुर खांसी एक बहुत ही गंभीर समस्या है। यदि सही समय पर कुकुर खांसी जैसी गंभीर समस्या का उपचार नहीं किया गया तो आगे चलकर कई प्रकार के रोग को जन्म देने के लिए उपयुक्त माना जाता है। साथ ही साथ यदि आपको कुकुर खांसी और काली खांसी के संदर्भ में कुछ जानकारी को पूछना है। आप किसी जानकारी को बताना चाहते हैं। तो आप हमें कमेंट करके अवस्य बताएं। यदि आप किसी खास मुद्दे पर हम से बातचीत करना चाहते हैं। तो आप हमें ईमेल करके और मैसेज करके बता सकते हैं।

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