Rolex घड़ी के मालिक Hans Wilsdorf की सफलता की कहानी

Rolex घड़ी के मालिक Hans Wilsdorf की सफलता की कहानी

Rolex घड़ी के मालिक Hans Wilsdorf की सफलता की कहानी

Rolex एक ऐसा ब्रांड है। जो अपने शानदार फीचर और अच्छे लुक के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है। Rolex का डिजाइन ऐसे किया जाता है। जो एक ही नजर में किसी भी इंसान को प्रभावित कर सकता है। Rolex की घड़ियां इतनी ज्यादा प्रसिद्ध है। कि हर इंसान की पहली पसंद Rolex की घड़ी होती है। इन्हीं सब कारणों से Rolex की घड़ी शुरुआती दौर से ही लोगों के सानों शौकत का पहचान बन चुकी है। लोग अपने स्टेटस को ज्यादा अच्छा और ऊंचा दिखाने के लिए हमेशा Rolex पहनना पसंद करते हैं। (Rolex घड़ी के मालिक Hans Wilsdorf की सफलता की कहानी)

और जैसे-जैसे लोगों Rolex के बारे में ज्यादा जानते जा रहे हैं। इसे पहनने और खरीदने की उत्सुकता उनके अंदर और ज्यादा बढ़ती जा रही है। जैसा कि आप सभी जानते हैं। कि Rolex की घड़ियां सबसे महंगी घड़ियों में से आती है। और Rolex के घड़ी के महंगे होने के कुछ कारण भी हैं। ऐसे ही नहीं Rolex की घड़ी सबसे महंगी और सबसे ज्यादा लोकप्रियता हासिल कर पाई है। Rolex की घड़ी के महंगी होने के पीछे बहुत सारे कारण है। जिसके बारे में मैं विस्तार से आप सभी को बताने जा रहा हूं।

Rolex की घड़ियां के महंगे होने के पीछे कई सारे कारण हैं। जैसे कि Rolex की घड़ियां गंभीर से गंभीर परिस्थितियों में भी सटीक समय देने के लिए कारगर साबित होती है। जैसे कि हिमालय की बड़ी से बड़ी चोटियों पर भी काफी ज्यादा दबाव होने के बावजूद Rolex घड़ियां हमेशा सही समय बताता है। साथ ही साथ यदि Rolex की घड़ियां को समुंद्र के नीचे गहराई में भी ले जाया जाए तो भी इस के समय में कोई फर्क नहीं आता है। इस कई कारणों से Rolex की घड़ियों को सबसे ज्यादा सटीक और प्रभावशाली माना जाता है। (Rolex घड़ी के मालिक Hans Wilsdorf की सफलता की कहानी)

घड़ियों के अंदर की यह खूबी Rolex को और ज्यादा प्रभावशाली बनाने के लिए कारगर साबित होती है। इसके साथ कई तरह प्रयोग भी किए जा चुके हैं। Rolex की घड़ी को 100 फीट की गहराई में पनडुब्बी के माध्यम से भेजा गया था। 100 फीट की गहराई में जाने के बाद भी Rolex की घड़ी टाइम दिखाने के समय में थोड़ा सा भी अंतर नहीं हुआ। इसी कारण से Rolex को लोग ज्यादा पसंद करते हैं। आप लोगों को यह जानकर बड़ी हैरानी होगी कि Rolex की घड़ी बनाने में किसी भी तरह के मशीन का उपयोग नहीं किया जाता है।

Rolex की सभी घड़ियां हाथ से बनाई जाती है। इसीलिए इसे हैंडमेड घड़ी भी कहा जाता है। Rolex की घड़ियां हाथ से ही जोड़ा जाता है। इसी कारण से Rolex इतनी बड़ी घड़ी की कंपनी होने के बावजूद भी सिर्फ 2000 घड़ी का ही निर्माण प्रतिदिन कर पाती है। क्योंकि Rolex घड़ी बनाने में Rolex कंपनी किसी भी तरह के मशीन का उपयोग नहीं करती है। इस कारण से इसके प्रोडक्शन में ज्यादा बढ़ोतरी  नहीं हो पाती है। हाथ से असेंबल करने के कारण Rolex घड़ियां ज्यादा नहीं बन पाती है। (Rolex घड़ी के मालिक Hans Wilsdorf की सफलता की कहानी)

इसी कारण से Rolex दुनिया भर में सबसे महंगी और प्रभावशाली मानी जाती है। आइए हम जानते हैं कि Rolex घड़ी की शुरुआत कहां से हुई थी। किसने Rolex घड़ी को बनाना शुरु किया था। और किन परिस्थितियों में Rolex घड़ी का निर्माण हुआ था। इन सभी चीजों को हम विस्तार से बताने जा रहे हैं। Rolex की घड़ी के निर्माण की कहानी 1881 को जर्मनी से शुरू हुआ था। Rolex घड़ी के निर्माणकर्ता का नाम Hans Wilsdorf था।

Hans Wilsdorf के 12 साल की आयु में ही इनके माता-पिता की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। अपने माता पिता को खो देने के बाद Hans Wilsdorf अकेले हो गए थे। अपने माता पिता को खो देने के बाद उन्होंने अपने शुरुआत की पढ़ाई लिखाई अपने घर के पास के एक सरकारी स्कूल से पूरी की 19 साल की आयु में Hans Wilsdorf पहली बार घड़ियों की दुनिया में अपना कदम रखा। इससे पहले Hans Wilsdorf को घड़ी की कोई भी जानकारी नहीं थी। Hans Wilsdorf 19 साल की आयु में पहली बार घड़ी की दुनिया में अपना काम करना शुरू किया था। (Rolex घड़ी के मालिक Hans Wilsdorf की सफलता की कहानी)

हालांकि Hans Wilsdorf के पास पैसे के किसी साधन का ना होने के कारण इन्हें अपने जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। और 19 साल की आयु में पहली बार Hans Wilsdorf तो अपने दोस्त के पिता के एक घड़ी एक्सपोर्ट करने की कंपनी में इन्हें एक नौकरी मिल गई थी। आगे चलकर 1903 ईस्वी में Hans Wilsdorf घड़ी बनाने की सभी कार्य को भी अच्छी तरह से सीख चुके थे। इसी कारण से इन्हें जर्मन की एक घड़ी बनाने की कंपनी में काम मिल गया। काफी समय तक Hans Wilsdorf से  इस कंपनी में काम करते रहे।

जब Hans Wilsdorf घड़ी बनाने की विधि को अच्छे तरीके से सिख चुके थे। इसी कारण से एक दिन इनके दिमाग में कुछ अपने लिए करने का विचार मन में आया। इसे आगे चलकर अपने जीजा के मदद से 1905 में अपनी खुद की कंपनी का निर्माण किया। कंपनी के शुरुआत करने के बाद दोनों ने मिलकर बाहर के देशों से घड़ी खरीद के अन्य जगहों पर बेचने का काम शुरू किया। लेकिन अब Hans Wilsdorf के अच्छे दिन का समय आ चुका था। क्योंकि इनके द्वारा घड़ी बेचने का काम  अच्छी तरह से चलने लगा था। (Rolex घड़ी के मालिक Hans Wilsdorf की सफलता की कहानी)

इसी कारण से उन्होंने खुद की घड़ी बनाने की सोची। और अपनी  घड़ी बनाने के काम शुरू कर दिया। और किसी कंपनी को Hans Wilsdorf  और इनके जीजा 1908 में इन दोनों ने मिलकर Rolex के नाम के साथ रजिस्टर कर दिया। इनके द्वारा खुद की घड़ी बनाने के बाद इनकी कंपनी अच्छी चलने लगी। इसी कारण से उन्होंने अपने एक कंपनी का ब्रांच लंदन में भी खोल लिया। लेकिन 1919 ईस्वी में इंग्लैंड सरकार के द्वारा ज्यादा टैक्स लिए जाने के कारण इन्हें अपनी इस कंपनी को में बंद भी करना पड़ गया।

लेकिन स्विट्जरलैंड में कंपनी बंद करने के बाद भी उन्होंने अपने कंपनी जनेवा में चालू रखा और आज भी जनेवा में Rolex कंपनी का हेड क्वार्टर स्थित है। धीरे-धीरे Rolex मार्केट पर अपनी अच्छी पकड़ बनानी शुरू कर दी थी। इसी तरह से 1956 ईस्वी में Hans Wilsdorf ने पहली बार वाटरप्रूफ घड़ी का निर्माण किया था। वाटरप्रूफ घड़ी के बाद घड़ी की दुनिया में Rolex का नाम सबसे ऊपर आ गया। क्योंकि पहली बार ऐसा हुआ था। कि किसी घड़ी कंपनी ने वाटरप्रूफ घड़ी का निर्माण किया था। (Rolex घड़ी के मालिक Hans Wilsdorf की सफलता की कहानी)

Hans Wilsdorf हमेशा से ऐसी घड़ी का निर्माण करना चाहते थे। जो बाहरी किसी भी दबाव को आसानी से बर्दाश्त कर सके। जिससे बाहरी दबाव के कारण किसी भी तरह का कोई फर्क ना पड़े। धीरे धीरे Rolex घड़ी अपना प्रभाव दिखाने लगी थी। और जैसे-जैसे समय बीतता गया और कई तरह के अपडेट होने शुरू हो चुके थे। 1945 में पहली बार किसी घड़ी में तारीख दिखाने का काम शुरू हुआ था। हालाकि आज से पहले किसी घड़ी कंपनी ने अपने घड़ी में तारीख दिखाने का काम शुरु नहीं किया था।

इसी कारण से पहली बार जब Rolex कंपनी ने अपने घड़ी में तारीख दिखाने का काम शुरू किया तो घड़ी की दुनिया में एक आग सी लग चुकी थी। और Rolex का नाम और ज्यादा मार्केट में फैलने लगा था। जब Rolex की घड़ियां मार्केट में अच्छी तरह से फैल चुकी थी। और लोगों की पहली पसंद बन चुकी थी। तब Rolex की घड़ी को कंपनी ने Rolex की घड़ी के ऊपर कई तरह के एक्सपेरिमेंट करना शुरू कर दिया। जैसे कि समुंद्र से गहरे पानी में जाने के बाद भी घड़ी का सही समय दिखाना।

ऊंचे पहाड़ों पर जाने के बाद भी घड़ी के समय में किसी भी तरह का बदलाव ना आना। इस तरह से 1953 ईस्वी में माउंट एवरेस्ट को पहली बार फतह करने वाले Edmund Hillary ने पहली बार Rolex की घड़ी पहन कर ही माउंट एवरेस्ट के पहाड़ों पर चढ़ने का काम किया था। उनका कहना है कि माउंट एवरेस्ट की सबसे ऊंची चोटी पर जाने के बाद उसकी घड़ी सही समय दिखा रही थी। आप खुद भी सोच सकते हैं। इतनी बड़ी चोटी पर चढ़ जाने के बाद भी Rolex के समय में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं आया।

इन्हीं सब कारणों से Rolex बहुत ज्यादा प्रभावशाली बन गई। और दुनिया भर में लोगों की पहली पसंद भी इस तरह से दूसरी बार Rolex को समुंद्र की गहराई में पनडुब्बी के सहारे भेजा गया। और देखा गया 100 फिट कि गहराई में जाने के बाद भी Rolex की घड़ी में किसी भी तरह की कोई समय परिवर्तन नहीं हुआ और समय दिखाने की अवस्था में किसी भी तरह का बदलाव नहीं आया। इन सभी तरह के एक्सपेरिमेंट को देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं। कि Rolex की घड़ी समय दिखाने के लिए कितना सटीक माना जाता है। चाहे वह पहाड़ की ऊंचाई हो या समुद्र की गहराई Rolex की घड़ी के समय दिखाने में किसी भी तरह का बदलाव नहीं आता है। इन्हीं सब कारणों से भरी दुनिया में हर एक इंसान की पहली पसंद Rolex की घड़ी होती है। (Rolex घड़ी के मालिक Hans Wilsdorf की सफलता की कहानी)

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