Piles बवासीर रोग के कारण लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

Piles बवासीर रोग के कारण लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

Piles बवासीर रोग के कारण लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

बवासीर किसी भी इंसान के शरीर के अंदर मलाशय के आसपास की नसों की सूजन के कारण उत्पन्न होना शुरू हो जाता है। हालांकि बवासीर के दो प्रकार होते हैं। खूनी बवासीर और बादी बवासीर खूनी बवासीर में मस्से सुर्ख होने लगते हैं। साथ ही साथ इन से मस्सों से रक्त आना शुरू हो जाता है। कई बार रक्त आने की समस्या इतनी ज्यादा तीव्र गति से बढ़ने लगती है। कि इससे प्रभाव से पीड़ित व्यक्ति को कई प्रकार की गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। दूसरे तरह की बवासीर की समस्या में सूजन दर्द पीड़ा अधिक मात्रा में उत्पन्न होता है। इससे रक्त की मात्रा बाहर नहीं निकलती लेकिन इसकी तकलीफ इतनी ज्यादा होती है। कि इस से पीड़ित व्यक्ति इसे बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। साधारण भाषा में कहा जाए तो बवासीर की तकलीफ़ बहुत ही ज्यादा कष्टदायक होती है। इससे होने वाले तकलीफ का सामना करना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। बवासीर के रोग में व्यक्ति को लम्बे समय तक कुर्सी पर बैठना और बिना किसी शेडूल के कुछ भी खा लेना इसका मुख्य कारण माना जाता है। (Piles बवासीर रोग के कारण लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार)

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आज हम आप सभी को इस लेख के माध्यम से कुछ ऐसे घरेलू और आयुर्वेदिक औषधि के बारे में विस्तार से बताने वाले हैं। जिसके निरंतर उपयोग से आप अपने शरीर के अंदर होने वाले बाबासीर अर्थात पाइल्स की समस्या को जड़ से समाप्त करने में सफल साबित हो सकते हैं। जानकारी शुरुआत करने से पहले मैं आप सभी से बताना चाहता हूं। कि यदि आप पाइल्स अर्थात बवासीर की समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए अधिक इसी प्रकार के रासायनिक दवाइयों का उपयोग करते हैं। तो यह आपके जीवन में कई प्रकार के अन्य दुष्प्रभावों को उत्पन्न करने के लिए उपयुक्त माना जाता है। ऐसे में इस रोग से पीड़ित अर्थात बवासीर से पीड़ित प्रत्येक व्यक्ति को आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खों के उपयोग से अपने शरीर के अंदर होने वाले बवासीर की समस्या को आयुर्वेदिक और घरेलु नुस्को से समाप्त करना चाहिए (Piles बवासीर रोग के कारण लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार)

1. सबसे पहले तरह के उपचार में आपको एक पके केले को बीच से चीर कर उसके दो टुकड़े कर लेना है। कटे हुए केले के बीच में हल्के मात्रा में कत्था को छिड़क के इसे अच्छी तरह से मिला ले। कत्था पान के दुकान पर आपको आसानी से प्राप्त हो जाएगा कत्था का उपयोग पान को बनाने के लिए किया जाता है। जब पके हुए केले के दोनों तरफ अच्छी तरह से कत्था लग जाए तो इसे छत के ऊपर पूरी रात खुले आसमान के नीचे छोड़ देना है। 12 घंटे तक इसे  छत पर ऐसे ही छोड़ दें। सुबह सोकर उठने के बाद जब आप सौच से वापस आ जाए तो आपको इस केले का सेवन कर लेना है 1 से 2 हफ्ते तक लगातार इस नुस्खे का उपयोग करके आप अपने शरीर के अंदर होने वाले बवासीर अर्थात पाइल्स की समस्या से राहत प्राप्त कर सकते हैं। यह नुस्खा अल्प समय में आपको बबासीर अर्थात पाइल्स की समस्या से राहत दिलाने में आपकी मदद करेगा। (Piles बवासीर रोग के कारण लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार)

2. आइए अब हम अगले नुस्खे के बारे में जानते हैं। खूनी बवासीर में एक नींबू को बीज से काटकर उसमें लगभग 4 से 5 ग्राम कत्था पीस कर छोड़ देना है। नींबू के इस टुकड़े को भी रात को खुले आसमान में पूरी रात छोड़ दें। सुबह के समय नित्य क्रिया से निवृत्त होकर पाइल्स अर्थात बवासीर से पीड़ित व्यक्ति को इस नींबू के टुकड़े को अच्छी तरह से चूस कर इसका सेवन करना है। 4 से 5 दिन लगातार इस नुस्खे का उपयोग करके किसी प्रकार के खूनी बवासीर की समस्या को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। बवासीर की समस्या कई बार इतनी कष्टदायक हो जाती है। कि खूनी बवासीर से पीड़ित व्यक्ति को बैठना उठना खाना पीना सोना सभी कार्यों में कठिनाई उत्पन्न होने लगती है। ऐसे में आप नींबू के द्वारा किए गए इस नुस्खे का उपयोग करके शरीर के अंदर होने वाले किसी भी प्रकार के खूनी बवासीर की समस्या को जड़ से समाप्त करने में सफल साबित हो सकते हैं। (Piles बवासीर रोग के कारण लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार)

3. आइए हम अगले नुस्खे के बारे में जानते हैं। आप सभी ने मट्ठा का नाम अब सुना होगा। मट्ठा दही को पतला करके बनाया जाता है। करीब 2 लिटर मट्ठा को लेकर उसमें 50 ग्राम पिसा हुआ जीरा और थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर इसका जूस बना लेना है। बवासीर से पीड़ित व्यक्ति को पूरे दिन पानी के जगह इस दही से बने जूस का सेवन करना काफी फायदेमंद माना जाता है। लगातार 10 से 12 दिन इस नुस्खे का उपयोग करके बवासीर से पीड़ित व्यक्ति को बवासीर के दर्द और बवासीर में होने वाले इन्फेक्शन की समस्या में कई प्रकार से लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इस नुस्खे का निरंतर उपयोग करके बवासीर रोग से होने वाली परेशानी और दर्द की समस्याओं को भी अति शीघ्र समाप्त किया जा सकता है। साथ हे साथ यह नुस्खा हमारे शरीर के अंदर होने वाले पेट से जुड़ी तमाम परेशानियों को समाप्त करने में मदद करता है। (Piles बवासीर रोग के कारण लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार)

4. आप सभी ने पिपली का नाम आवाज सुना होगा। पिपली के सेवन करने से भी बवासीर और Piles जैसी गंभीर समस्याओं को समाप्त किया जा सकता है। पाइल्स की समस्या को समाप्त करने में आप के पीपली का उपयोग शहद के साथ कर सकते हैं। शहद का उपयोग करना भी पाइल्स की समस्या में काफी लाभप्रद होता है। पिपली के उपयोग करने की विधि को जानने के लिए सबसे पहले आपको पिपली को कूटकर इसका पाउडर बना लेना है। और इसका उपयोग शहद में मिलाकर पेस्ट बनाकर करना है। एक हफ्ते तक इस नुस्खे का उपयोग करके पाइल्स और बवासीर की गंभीर समस्या में राहत प्राप्त किया जा सकता है। बबासीर और मस्से में होने वाले दर्द की समस्याओं में भी इस नुस्खा से लाभ प्राप्त किया जा सकता है (Piles बवासीर रोग के कारण लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार)

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5. आइए हम अगले नुस्खे के बारे में जानते हैं। नीम के पत्ते के उपयोग करने के साथ आप अपने शरीर के अंदर होने वाले बवासीर और पाइल्स की समस्या को जड़ से समाप्त करने में सफल साबित हो सकते हैं। सर्वप्रथम आपको ताजे नीम के पत्ते को गर्म पानी में उबालकर इसका काढ़ा तैयार कर लेना है। तैयार किए गए काढ़े को पूरे दिन में तीन से चार बार सेवन करना है। 3 से 4 दिन तक इस नुस्खे का लगातार सेवन करने से पाइल्स में होने वाले सूजन इत्यादिओं को अल्प समय में समाप्त किया जा सकता है। नीम के पत्ते के साथ-साथ आप मस्सों पर जीरे को पीसकर लगा सकते हैं। जीरा के पीसकर लगाने से होने वाले सूजन और दर्द में काफी अल्प समय में राहत प्राप्त होता है। (Piles बवासीर रोग के कारण लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार)

6. बवासीर और पाइल्स की समस्या के शुरुआती दौर में यदि इसका उपचार करना शुरू कर दिया जाए। तो यह काफी अल्प समय में ही शरीर के अंदर से खत्म हो जाता है। सर्वप्रथम आपको बवासीर के रोग के उपचार में आंवले के चूर्ण को शहद के साथ सुबह सुबह खाली पेट सेवन करना है। आंवले के चूर्ण का शहद के साथ यदि सुबह-सुबह 8 से 10 दिन तक लगातार खाली पेट सेवन किया जाए तो इसमें पाइल्स अर्थात बवासीर की समस्या को शुरुआती दौर में ही समाप्त किया जा सकता है। यह नुस्खा बहुत ही कारगर है। किसी भी तरह के बवासीर की समस्या को जड़ से समाप्त करने में आंवला और शहद बहुत ही अहम भूमिका निभाती है।

7. बवासीर की समस्या में आप नीम के तेल को सूती कपड़ों के माध्यम से अपने मस्सों पर लगाएं। बवासीर के रोग के दौरान होने वाले इन्फेक्शन नीम के तेल के उपयोग से कम हो जाते हैं। साथ ही साथ नीम के तेल के निरंतर उपयोग करके आप मस्सों में हो रहे दर्द की समस्या से भी निजात पा सकते हैं। नीम के तेल के चार से पांच बंदे आपको प्रतिदिन 8 से 10 दिन तक लगातार अपने मस्सों पर किसी सूती कपड़ा कॉटन की मदद से उपयोग में लाना है। यह नुस्खा आपको 8 से 10 दिनों में ही नसों में होने वाले दर्द की समस्या से राहत दिलाने में मदद करता है। (Piles बवासीर रोग के कारण लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार)

8. आप लोगों ने काले तिल का नाम अब सुना होगा। काले तिल का उपयोग मक्खन के साथ करने से बवासीर की समस्या में आने वाले रक्त विकार अर्थात बवासीर के दौरान होने वाले रक्त स्राव की समस्या में अल्प समय में राहत प्राप्त होने लगता है। काले तिल और मक्खन के निरंतर सेवन करने से आप अल्प समय में बवासीर के रोग से निजात पा सकते हैं। इस नुस्खे के निरंतर उपयोग करके बवासीर के दौरान आने वाले रक्त की समस्या को भी कम किया जा सकता है। साथ ही साथ तिल और मक्खन के नियंत्रण सेवन करने से पेट संबंधित रोगों में भी कई प्रकार से लाभ प्राप्त होता है। यदि आप प्रतिदिन काले तिल और मक्खन का उपयोग करते हैं। तो आप के पेट से संबंधित विकार जैसे कब्ज अफरा की समस्या में अति शीघ्र लाभ प्राप्त होता है। (Piles बवासीर रोग के कारण लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार)

9. बवासीर और पाइल्स की समस्या में इलायची का उपयोग करना भी काफी लाभप्रद होता है। 50 से 100 ग्राम इलायची आप अपने आवश्यकता अनुसार ले ले। और इसे तबे पर हल्के हल्के पकाते रहे। जब यह अच्छी तरह से पक जाए तो इसे ठंडा कर ले। ठंडा होने के बाद इसे पीसकर इसका पाउडर बना लें। प्रतिदिन सुबह खाली पेट छोटी चम्मच इलायची के इस पाउडर को हल्के गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से बवासीर और पाइल्स की समस्या में अति शीघ्र प्राप्त होता है। यह नुस्खा कई प्रकार के आयुर्वेदिक औषधियों में भी निर्माण किया जाता है। जिससे बबासीर और पाइल्स के रोग को जड़ से समाप्त करने में मदद मिलती है। अतः आप इस नुस्खे का उपयोग 8 से 10 दिन तक लगातार करें। आपको बवासीर जैसे गंभीर समस्या और बवासीर के दौरान होने वाले रक्त स्राव की गंभीर समस्या में लाभ प्राप्त होगा। (Piles बवासीर रोग के कारण लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार)

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10. प्रतिदिन सुबह खाली पेट मूली के सेवन करने से भी बवासीर के रोग को अति शीघ्र समाप्त किया जा सकता है। मूली के अंदर बहुत सारे ऐसे आयुर्वेदिक गुण मौजूद हैं। जो कई प्रकार के रोग को जड़ से समाप्त करने की क्षमता रखता है। यदि आप लंबे समय से बवासीर खूनी बवासीर की समस्या से परेशान होते आ रहे हैं। तो आपको प्रतिदिन खाली पेट मूली का सेवन करना काफी फायदेमंद हो सकता है। 1 महीने तक लगातार यदि आप खाली पेट मूली का सेवन करते हैं। तो आपके शरीर के अंदर होने वाले बबासीर की और पाइल्स की समस्या को जड़ से समाप्त करने में आपकी मदद करता है। (Piles बवासीर रोग के कारण लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार)

उपचार और औषधि के साथ साथ आपको खाद्य पदार्थों पर भी काफी ज्यादा ध्यान देना है। कभी भी आप बवासीर के रोग के दौरान अधिक तेल मसाले और मिर्च का सेवन ना करें। जहां तक संभव हो आप तरल पदार्थों का सेवन अधिक करें। ताकि आसानी से आपके पेट में पच जाए और जब भी आप शौच करें तो आपको ज्यादा कठिनाइयों का सामना ना करना पड़े। यदि आप अधिक मात्रा में तेल मिर्च मसाले का उपयोग करते हैं। तो यह आपके शरीर के अंदर मस्सों में जलन सूजन और इसे और अधिक बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है। (Piles बवासीर रोग के कारण लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार)

आशा करता हूं कि आज की दी गई जानकारी आप सभी को पसंद आई होगी। यदि आप सभी को बवासीर और पाइल्स के ऊपर दी गई आज की जानकारी पसंद आती है। तो आप इस जानकारी को अपने दोस्त और परिवारों के बीच अवश्य शेयर कर दें। कई बार बवासीर से पीड़ित व्यक्ति शर्मिंदगी और लोगों की भावनाओं के डर से अपनी पीड़ा दूसरे से शेयर नहीं कर पाते हैं। और लंबे समय से शरीर के अंदर बवासीर की समस्या यदि रह जाए तो एक काफी कठिनाई दायक हो जाता है। ऐसे में आपके द्वारा शेयर करने से यह जानकारी कई अन्य लोगों के लिए लाभप्रद साबित हो सकता है। साथ ही साथ यदि आप बवासीर और पाइल्स की समस्या के बारे में किसी प्रकार की कोई प्रश्न पूछना चाहते हैं। तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं। आपके द्वारा किए गए प्रश्न का हम अतिशीघ्र जवाब देने की कोशिश करेंगे। (Piles बवासीर रोग के कारण लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार)

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