Patanjali और बाबा रामदेव बालकृष्ण के जीवन का परिचय

Patanjali और बाबा रामदेव बालकृष्ण के जीवन का परिचय

Patanjali और बाबा रामदेव बालकृष्ण के जीवन का परिचय

अभी के समय में ऐसा कोई भी नहीं है। जिसने पतंजलि का नाम ना सुना हो। पतंजलि भारत देश में सबसे ज्यादा उपयोग किया जाने वाला साधन माना जाता है। पतंजलि के द्वारा बनाये गए हजारों ऐसे प्रोडक्ट हैं । जो भारत देश में बृहत पैमाने पर उपयोग किया जाता है । आप सभी ने बाबा रामदेव के नाम को अवश्य सुना होगा। बाबा रामदेव पतंजलि कंपनी के मालिक हैं। आइए हम जानते हैं। बाबा रामदेव ने किन परिस्थितियों में पतंजलि जैसे बड़ी कंपनी का शुरूआत किया हैं। बाबा रामदेव महाराज का जन्म 25 दिसंबर 1965 ईसवीं को हुआ था। (Patanjali और बाबा रामदेव बालकृष्ण के जीवन का परिचय)

बाबा रामदेव का जन्म हरियाणा राज्य में हुआ था। बाबा रामदेव के परिवार खेती-बारी पर निर्भर था। बाबा रामदेव के पिता का नाम रामनिवास था। और बाबा रामदेव के माता का नाम गुलाब देवी था। बाबा रामदेव बचपन से ही बहुत मेहनती थे। कठिन परिश्रम और किसी काम को पूरे लगन के साथ करने में बाबा रामदेव महाराज की रुचि अधिक होती थी। शुरुआती समय में बाबा रामदेव का नाम रामकृष्णा रामनिवास यादव था। आज हम इसी इंसान को बाबा रामदेव के नाम से जानते हैं। बचपन से ही बाबा रामदेव अपने परिवार के साथ खेती बाड़ी में अपने पिता का हाथ बटाते थे। हालांकि बाबा रामदेव के घर की आर्थिक स्थिति सही नहीं थी।

इसी कारण से बाबा रामदेव को पढ़ाई में बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। लेकिन बाबा रामदेव महाराज का शुरुआती समय से ही पढ़ाई में ज्यादा रुचि लगता था। इसी कारण से बाबा रामदेव दूसरों से पुस्तके मांग मांग कर पढ़ा करते थे। आपको यह बात जानकर बड़ा आश्चर्य होगा कि बाबा रामदेव को बचपन में ही लकवा का शिकार होना पड़ा था। लकवा अर्थात पैरालाइसिस के रोग से बाबा रामदेव ग्रसित हो चुके थे। शुरुआती दौर में बाबा रामदेव की जिंदगी में बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। (Patanjali और बाबा रामदेव बालकृष्ण के जीवन का परिचय)

एक बार तो बाबा रामदेव तालाब में डूबते-डूबते बचे। जब इनकी आयु 6 वर्ष की थी। तब यह खेलने के दौरान छत से नीचे गिर गए थे। बाबा रामदेव बचपन से ही देश प्रेमी थे। इसी कारण से वह हमेशा चाहते थे। कि अपने आसपास के गरीब लोगों की गरीबी को कैसे दूर किया जाए। हालांकि बाबा रामदेव की आयु अभी ज्यादा नहीं थी। फिर भी अपने देश के प्रति प्यार और अपने आसपास के लोगों के प्रति प्यार होने की वजह से बाबा रामदेव को अपने आसपास के लोगों की गरीबी काफी पीड़ा दिया करती थी। इसी दौरान बाबा रामदेव के गांव में एक सन्यासी आए। और उन्होंने कई सारे पुस्तक के बाबा रामदेव को दिया।

बाबा रामदेव तो पहले ही से किताबें पढ़ने के बहुत ज्यादा शौकीन थे। इसी कारण से बाबा से प्राप्त हुए पुस्तक को वह मन लगाकर पढ़ना शुरू कर दिए। पुस्तक पढ़ने के बाद बाबा रामदेव इतने प्रेरित हुए कि वह और ज्ञान की खोज में निकल पड़े। इसी कारण से एक समय ऐसा आया। जब बाबा रामदेव घर में बिना अपने माता-पिता को बताए हुए। घर से कुछ पैसे लिया और घर छोड़कर निकल गए। घर से निकलने के बाद बाबा रामदेव गुरुकुल की तलाश करने लगे। लेकिन इनके कम आयु होने के कारण यह किसी भी तरह के काम भी नहीं कर पाते थे। और  ना इनके पास पर्याप्त पैसा था। (Patanjali और बाबा रामदेव बालकृष्ण के जीवन का परिचय)

इसी कारण से बाबा रामदेव इधर उधर भटकते रहे। काफी दिन तक भटकने के बाद बाबा रामदेव को हरियाणा के खानपुर गुरुकुल में दाखिला मिल गया। गुरुकुल में आने के बाद बाबा रामदेव के जीवन में एक नया बदलाव आया। गुरुकुल में दाखिला मिलने के बाद बाबा रामदेव ने अपने जीवन को योग से जोड़ लिया। और आज हम सभी जानते हैं। बाबा रामदेव एक कुशल और जानकार योग शिक्षक हैं। आज पूरा विश्व बाबा रामदेव को योग के कारण जानता है। घर पर बिना बताए निकलने के कारण रामदेव बाबा के माता पिता बहुत परेशान रहने लगे। बाबा रामदेव के पिता अपने पुत्र की तलाश में इधर उधर भटकते रहे।

और अचानक एक दिन वह खानपुर गुरुकुल पहुंचे। अपने पुत्र को इस हालत में देख कर बाबा रामदेव के पिता ने अपने पुत्र की फटकार लगाई। और बाबा रामदेव को वापस घर चलने के लिए कहा। लेकिन बाबा रामदेव ने अपने पिता को साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा कि वह अब इसी गुरुकुल में रहकर शिक्षा प्राप्त करेंगे। अब वह घर नहीं जाएंगे। बाबा रामदेव के शिक्षा के दौरान इनका परिचय आचार्य बालाकृष्णा से हुआ। आप सभी लोग आचार्य बालाकृष्णा के बारे में अवश्य जानते होंगे। इसी गुरुकुल में स्वामी रामदेव और आचार्य बालाकृष्णा की मित्रता हुई। (Patanjali और बाबा रामदेव बालकृष्ण के जीवन का परिचय)

आचार्य बालाकृष्णा भी अपने घर परिवार को छोड़कर गुरुकुल में दाखिला ले लिया था। हालांकि आचार्य बालकृष्ण को यदि किसी एक गुरुकुल में मन नहीं लगता था। तो अक्सर अपने गुरुकुल को बदल लिया करते थे। ऐसा ही खानपुर के गुरुकुल में भी हुआ। आचार्य बालाकृष्ण खानपुर के गुरुकुल को छोड़कर एक ऐसे योगी के पास पहुंचे। जिनके पास आयुर्वेदिक दवाइयों का भरपूर ज्ञान था। लेकिन बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के बीच हमेशा बातचीत हुआ करती थी। एक तरफ स्वामी रामदेव योग की शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। तो दूसरी तरफ उनके दोस्त आचार्य बालकृष्ण औषधि की शिक्षा ग्रहण कर रहे थे।

दोनों अपने काम में पूरे लगन के साथ लगे हुए थे। और एक दिन ऐसा आया जब आचार्य बालकृष्ण स्वामी रामदेव से बोले कि अब हमें गुरुकुल को त्यागकर योग और औषधि का ज्ञान पूरे देश में फैलाना चाहिए। दोनों इस बात से सहमत हुए और गुरुकुल को त्यागकर हरिद्वार पहुंच गए। हरिद्वार पहुंचने के बाद स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण दोनों योग और आयुर्वेदिक का ज्ञान पूरे हरिद्वार में फैलाना शुरू कर दिया। हरिद्वार आने के बाद बाबा रामदेव ने वहां के लोगों को योग के बारे में ज्ञान देना शुरू कर दिया। (Patanjali और बाबा रामदेव बालकृष्ण के जीवन का परिचय)

और धीरे-धीरे योग के कारण वहां के कई लोगों को अपने रोग से मुक्ति मिली। और यही एकमात्र कारण था। जिसके कारण बाबा रामदेव के पास लोगों का आना दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगा। इसके बाद आचार्य बालकृष्ण और स्वामी रामदेव, स्वामी कर्मवीर के सहयोग से 1995 ईस्वी में दिव्य योग मंदिर की स्थापना की। जब स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के सहयोग से बहुत सारे लोगों के दुख दूर होने लगे। तब इनका नाम और उनकी ख्याति हरिद्धार से बाहर भी निकल चुका था।

किसी भी प्रकार की परेशानी को आचार्य बालकृष्ण और स्वामी रामदेव योग औषधि के माध्यम से सही करने में सफल होते नजर आ रहे थे। और समय के साथ दिव्य योग मंदिर पतंजलि में बदल गया। आज हम सभी पतंजलि के नाम के बारे में जानते हैं। बहुत सारे लोग ऐसे हैं। जो पतंजलि के द्वारा बनाए गए साधन का उपयोग भी करते हैं। (Patanjali और बाबा रामदेव बालकृष्ण के जीवन का परिचय)

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