प्रेरणादायक कहानी तांगा चलने वाला धर्मपाल गुलाटी कैसे बने MDH मसाले कम्पनी के मालिक

तांगा चलने वाला धर्मपाल गुलाटी कैसे बने MDH मसाले कम्पनी के मालिक

प्रेरणादायक कहानी तांगा चलने वाला धर्मपाल गुलाटी कैसे बने MDH मसाले कम्पनी के मालिक

आज मैं जिस शख्सियत की बात आप लोगों को बताने वाला हूं। इनके  बारे में जानकर आप लोगों को बड़ा ही आश्चर्य होगा कि एक तांगा चलाना वाला साधरण इंसान दुनिया के इतने बड़े कंपनी का मालिक भी बन सकता है। आज के समय में इनके कंपनी के नाम को पूरी दुनिया जानती है। आज मैं बात करने वाला हूं। महाशय धर्मपाल गुलाटी के बारे में। शायद आप लोग इस नाम से परिचित नहीं होंगे। लेकिन जब मैं इनके कंपनी के बारे में बताऊंगा तो सायद आप लोगों को भली-भांति ज्ञान हो जाएगा कि महाशय धर्मपाल गुलाटी और इनका अस्तित्व क्या है। (प्रेरणादायक कहानी तांगा चलने वाला धर्मपाल गुलाटी कैसे बने MDH मसाले कम्पनी के मालिक)

भारत में नहीं पूरी दुनिया में राजा महाराजाओं के समय से ही खाने-पीने में मसालेदार जायका का का इस्तेमाल किया जाता रहा है। आप सभी जानते हैं कि हमारे खान पान में अगर मसाले का उपयोग ना किया जाए तो वह खाना स्वादहीन हो जाता है। तो आज मैं इसी बात पर बात करने जा रहा हूं दुनिया का सबसे ज्यादा लोकप्रिय एम डी एच मसाले के बारे में। शायद आप लोगों को पता चल चुका होगा कि मैं आज जिस इंसान की बात करने जा रहा हूं महाशय धर्मपाल गुलाटी जी का जो MDH कंपनी के मालिक हैं। आज लगभग हमारे भारतवर्ष के हर घरों में MDH के मसालों का उपयोग किया जाता है।

कुछ मसाले हमारे जिंदगी के हमारे हिस्से बन जाते हैं। जिनके बिना यदि भोजन तैयार किया जाए तो हमें वह भोजन स्वादहीन लगता है। MDH की कहानी भी कुछ ऐसी है यदि MDH के मसाले खाने वाले लोगों को अगर खाने में MDH के मसालों को ना दिया जाए तो वह खाना नहीं खा सकते। यह  एक प्रेम है जो MDH मसाला के सेवन करने वाले अपने भोजन में पसंद करते है और भोजन में स्वाद लाने का काम MDH मसाला बखूबी जानता है। महाशय धर्मपाल गुलाटी के बारे में महाशय धर्मपाल गुलाटी की कंपनी के बारे में जाने से पहले मैं आप सभी को आज महाशय धर्मपाल गुलाटी के कुछ जानकारी आप लोगों को प्रदान करना चाहता हूं।

महाशय धर्मपाल गुलाटी का जन्म 27 मार्च 1928 में पाकिस्तान के एक सिलाई कोर्ट जगह पर हुआ था। हलाकि महाशय धर्मपाल गुलाटी का जन्म हुआ तब भारत और पाकिस्तान दोनों एक देश है। अभी के समय में यह कहा जा सकता है कि धर्मपाल गुलाटी का जन्म पाकिस्तान में हुआ था लेकिन जब धर्मपाल गुलाटी का जन्म हुआ था उस समय भारत और पाकिस्तान नहीं सिर्फ भारत ही थी। इसलिए अगर एक नजर देखा जाए तो हम यह भी कह सकते हैं कि महाशय धर्मपाल गुलाटी का जन्म भारत में हुआ था। (प्रेरणादायक कहानी तांगा चलने वाला धर्मपाल गुलाटी कैसे बने MDH मसाले कम्पनी के मालिक)

महाशय धर्मपाल गुलाटी के पिता का नाम चुन्नीलाल और माता का नाम चरण देवी था। कहां जाता है कि इनके माता-पिता बहुत ही धार्मिक स्वभाव के थे। इनके पुरे परिवार को पूजा पाठ करना अति पसंद था। महाशय धर्मपाल गुलाटी के परिवार आर्य समाज के अनुयाई थे। यह आर्य समाज के प्रति पूरी श्रद्धा से पूरा परिवार समर्पित रहते थे। शुरुआती दौर में महाशय धर्मपाल गुलाटी की पढ़ाई उनके घर के पास के विद्यालय में हो रही थी। लेकिन महाशय धर्मपाल गुलाटी पांचवी कक्षा में पढ़ाई पूरी करने के बाद अपनी पढ़ाई को बंद कर दिया। महाशय धर्मपाल गुलाटी पांचवी कक्षा से आगे पढ़ नहीं पाए। हालांकि महाशय धर्मपाल गुलाटी के परिवार पहले से ही व्यवसाय से जुड़े हुए थे।

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यही कारण था कि महाशय धर्मपाल गुलाटी 1937 ईस्वी में अपने पिता की सहायता से उन्होंने एक छोटा सा व्यापार शुरू किया। पांचवी कक्षा के बाद पढ़ाई ना करने के कारण महाशय धर्मपाल गुलाटी को कोई और चारा नहीं दिख रहा था इसी कारण से वह अपने पिता की सहायता से अपना व्यवसाय करने की सोच ली।

लेकिन कम उम्र में किया गया व्यवसाय और ज्यादा तजुर्बा ना होने के कारण व्यवसाय इनका बंद हो गया। पिता के द्वारा व्यवसाय में लगाए सारे पैसे बर्बाद हो गए। व्यवसाय के बर्बाद होने के बाद इन्होंने नौकरी करना पसंद किया। नौकरी करने में भी इन्हें संतुष्टि नहीं मिल रही थी यही कारण था कि इन्होंने फिर से नौकरी छोड़ दी और फिर से व्यवसाय करने का मन बना लिया।

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पहले की अपेक्षा अब ज्यादा तैयार होकर उन्होंने सोचा कि अब व्यापार किया जाएगा क्योंकि नौकरी करते करते इन्हें अच्छा खासा ज्ञान भी हो चुका था। अब इन्हे अच्छी जानकरी  व्यवसाय के बारे में हो चुकी थी। यही कारण था कि इन्होने  फिर से सोचा कि अब मै फिर से व्यवसाय करूंगा। नौकरी छोड़ने के बाद महाशय धर्मपाल गुलाटी ने कपड़े का व्यापार करना शुरू किया। कपड़े के व्यापार में भी नुकसान होने कारण उन्हें कपड़े के व्यापार को बंद कर दिया और चावल के व्यापारी बन गए। लेकिन चावल के व्यापार में भी महाशय धर्मपाल गुलाटी ज्यादा दिन तक टिक न सके। क्योंकि इसमें भी उन्होंने काफी नुकसान कर लिया था। ज्यादा नुकसान होने के कारण इनके परिवार वालों ने भी इन्हें नौकरी करने की सलाह दी। (प्रेरणादायक कहानी तांगा चलने वाला धर्मपाल गुलाटी कैसे बने MDH मसाले कम्पनी के मालिक)

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लेकिन अब धर्मपाल गुलाटी के मन में यह बात बैठ चुकी थी। कि अब वह व्यवसाय ही करेंगे। जब महाशय धर्मपाल गुलाटी को यह लगा कि उन्हें अपना पैतृक व्यवसाय ही करना ज्यादा सही है तो उन्होंने फिर से अपने पिता किया जाने वाला व्यवसाय मसालों के व्यवसाय में अपना हाथ बताया। उस समय देगी मिर्च का नाम पूरे भारतवर्ष में मशहूर था। और महाशय धर्मपाल गुलाटी के पिता दिग्गी मिर्च का व्यवसाय किया करते थे। इसी कारण से धर्मपाल गुलाटी भी अपने पिता के व्यवसाय दिग्गी मिर्च की व्यवसाय मैं जुड़ गए। लेकिन देश के विभाजन के बाद महाशय धर्मपाल गुलाटी को भारत वापस आना पड़ा।

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27 दिसंबर 1947 में धर्मपाल गुलाटी दिल्ली पहुंचे। जब वह दिल्ली पहुंचे तो उनके पास सिर्फ 1500 रूपये थे। 1500 सौ रुपए में उनका जीवन का गुजारा करना बहुत मुश्किल हो सकता था। यही कारण था कि वह यह बात समझ गए थे कि उनके इन 15 सौ रुपए से उनको अपने जीवन के किसी लक्ष्य की प्राप्ति करनी होगी। अतः अपने 15 सौ रुपए650 का उन्होंने एक तांगा खरीदा। एक बात और स्पष्ट कर देता हूं। कि तांगा होता क्या है। आप सभी ने सायद देखा होगा कि एक लकड़ी का गाड़ी होते हैं जिसमें घोड़े लगे होते हैं और घोड़े की सहायता से उस टांगे को खींचा जाता है। पहले के समय में मोटर गाड़ी गाड़ी ट्रक यह सब सुविधाएं उपलब्ध नहीं थी। इसी कारन से पहले के समय में यातायात के लिए टांगे गाड़ी का ही उपयोग किया जाता

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किसी भी तरह के सामान को या किसे व्यक्ति  किसी सवारी को यहां से वहां पहुंचाने में तांगा का उपयोग किया जाता था अतः महाशय धर्मपाल गुलाटी ने 1500 रूपये  में से 650 रूपये का एक टांगा खरीद लिया। इसके बाद धर्मपाल गुलाटी न्यू दिल्ली रेलवे स्टेशन से कुतुब रोड और करोल बाग में सवारी को पहुंचने के काम करने लगे। जैसा की मैंने आप सभी को पहले ही बताया कि पहले के समय में इतनी मोटर गाड़ियां उपलब्ध नहीं थी जिससे कि यातायात का साधन आसानी से हो सके इसी। उस समय तांगा गाड़ी रिक्शा आदि का सहारा लेना पड़ता था। धीरे-धीरे महाशय धर्मपाल गुलाटी ने तांगा चलाने के बाद एक छोटी सी लकड़ी के खोखे खरीद लिए। खोखी मसाले को बनाने और रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता था और  धीरे-धीरे पैसा जमा करने के बाद महाशय धर्मपाल गुलाटी ने अपने पैतृक व्यवसाय को फिर से शुरू करने का मन बना लिया।

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इसी कारण से वह धीरे धीरे पैसा जमा करने के बाद एक एक छोटी से दुकान भी खोल लिए और अपने पैतृक व्यवसाय को दिल्ली में ही करना शुरू कर दिया। महाशय धर्मपाल गुलाटी को  अपने व्यवसाय के प्रति बहुत ज्यादा लगन होने के कारण इनकी वेबसाइट उचाईयों को छूने लगा। धीरे धीरे इनका सफर एम डी एच मसाले के रूप में परिवर्तन हो गया। बहुत कम ही ऐसे घर है जहां पर एम डी एच मसाले का उपयोग किसी न किसी रूप में नहीं किया जाता हो। (प्रेरणादायक कहानी तांगा चलने वाला धर्मपाल गुलाटी कैसे बने MDH मसाले कम्पनी के मालिक)

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MDH के नाम से मिर्च हल्दी गरम मसाला जीरा इलायची लौंग आदि सभी चीजों का चूर्ण बड़े ही आसानी से उपलब्धि और मुहैया हो जाता है। आप सोच सकते हैं कि पिता के अच्छे चल रहे व्यवसाय में जब यह काम कर रहे थे। और भारत पाकिस्तान के विभाजन के बाद जब इन्हें दिल्ली आना पड़ा।  इनकी इतनी बहुत जयादा खराब थी। इसे कारन से महासय धर्मपाल को तांगा चलाने पर मजबूर हो जाना पड़ा।  लेकिन भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद उनकी मजबूरी और बढ़ गई। लेकिन अपने व्यवसाय के प्रति अटूट विश्वास कठिन मेहनत और ईमानदारी के कारण इन्होंने फिर से अपने पैतृक व्यवसाय को करना शुरू किया।

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उन्होंने खुद से मसाला कूटना शुरू किया खुद से उसकी पैकिंग करना शुरू किया। और बाजारों में इसे बेचना शुरू किया। इनकी इमानदारी को देखकर इन का बिजनेस इतना चलने लगा  इतना बढ़ने लगा कि आज पूरी दुनिया एम डी एच मसाले के नाम से इन्हें जानती है। कई जगहों पे महासय धर्मपाल गुलाटी को मसाला किंग के नाम से भी जाना जाता है।

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1968 में महाशय धर्मपाल गुलाटी ने दिल्ली में अपने की मसाले की फैक्ट्री भी खोली थी। फैक्ट्री खोलने के बाद उन्होंने अपने मसालों को ना केवल भारत में बल्कि बाहर के देशों में भी बेचना शुरू करने लगे। अभी के समय में एमडीएच विश्व के 100 से अधिक देशों में अपना 70  से अधिक तरह के मसलो को बेच रहा है कहा जाता है कि 2016 में एम डी एच मसाले का सिर्फ चना चाट मसाले की कमाई 924सौ करोड़ का मुनाफा हुआ था।

आप सोच सकते हैं कि एक साधारण व्यक्ति तांगा चलाने वाला इंसान अभी के समय में मसालों की कमाई से अरबपति हो गया। लेकिन हमें इनके जीवन के उन पहलुओं को भी देखना चाहिए कि उन्होंने अपने जीवन में इस मुकाम को पाने के लिए कितनी मेहनत की है। (प्रेरणादायक कहानी तांगा चलने वाला धर्मपाल गुलाटी कैसे बने MDH मसाले कम्पनी के मालिक)

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एक बातचीत के दौरान इनका कहना है कि 15 साल की उम्र में ही लगभग 50 से 70  नौकरियां बदल ली थी। काम में मन नहीं लग रहा था लेकिन जब यह अपने पैतृक व्यवसाय में आए तो इन्होंने अपनी पूरी ईमानदारी से अपने पैतृक व्यवसाय को करना शुरू किया। और यह इनके जीवन का पहला ऐसा काम था जो यह अपने तन मन से कर दिया करते थे। इनका कहना है की यही आपका सामान शुद्ध है आप अपने काम को पूरी ईमानदारी से कर रहे है तो आपका सामान आसानी से बिकना सुरु हो जाता है 

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महाशय धर्मपाल गुलाटी से जब यह पूछा जाता है कि आप के बिजनेस के सफलता का राज क्या है तो यह बड़े ही साधारण तौर पर यह कहते हैं कि उनके बिजनेस के सफलता का कोई राज  नहीं है। यह बस उन्हीं वसूलों को पालन करते आए हैं जो पहले से चलती आ रही है। इनका कहना है कि आपको अपने काम के प्रति ईमानदार रहना अति आवश्यक है (प्रेरणादायक कहानी तांगा चलने वाला धर्मपाल गुलाटी कैसे बने MDH मसाले कम्पनी के मालिक)

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आप जो भी काम कर रहे हो उस काम में आप की इमानदारी अत्यंत आवश्यक होती है। अपने किसी भी काम को कर रहे हो और उसमें आप की इमानदारी ना हो तो आप उस काम में कभी सफलता नहीं पा सकते हैं अतः आप जिस काम को भी कर रहे हो पूरे तन मन धन लगाकर पूरे आत्मविश्वास के साथ पूरी ईमानदारी के साथ करें।

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अपने जीवन की अपार सफलता के बाद 1975 में महाशय धर्मपाल गुलाटी ने अस्पताल भी खोला। यह अस्पताल न्यू दिल्ली के सुभाष नगर में उपस्थित है। अपनी माता चानन देवी की याद में इन्होंने दिल्ली के जनकपुरी में भी एक अस्पताल की स्थापना की जिसको बाद में जाकर और विस्तारित किया गया जनकपुरी एरिया का सबसे बड़ा अस्पताल माना जाता है। अपने जीवन में इतनी सफलता के पानी के बाद महाशय धर्मपाल गुलाटी ने बहुत ही नेक काम किए हैं जिसका सराहना पूरे भारतवर्ष करता है। (प्रेरणादायक कहानी तांगा चलने वाला धर्मपाल गुलाटी कैसे बने MDH मसाले कम्पनी के मालिक)

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महाशय धर्मपाल गुलाटी ने बच्चों की सहायता करने में भी कोई चूक नहीं छोड़ी है कई स्कूलों को स्थापित किया है बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दिलवाई है। एम डी एच मसाले के नाम से कई जगह स्कूल भी खोली गई है जिसमें उन्होंने अपने माता-पिता के नाम पर चुन्नी लाल सरस्वती शिशु विद्या मंदिर माता लीलावती कन्या विश्वविद्यालय महाशय धर्मपाल इत्यादि शामिल है। इन्होंने अपनी कमाई का 10% फायदा हमेशा दान में दिया है जिससे गरीब बच्चे और अनपढ़ बच्चों को शिक्षा और भोजन प्रदान किया जा सके। (प्रेरणादायक कहानी तांगा चलने वाला धर्मपाल गुलाटी कैसे बने MDH मसाले कम्पनी के मालिक)

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प्रेरणादायक कहानी दशरथ मांझी मनुष्य जब जोड़ लगता है पत्थर पानी बन जाता है

धर्मपाल गुलाटी भारतवर्ष के लिए बहुत सारे ऐसे काम किए हैं जिनकी सराहना भारत सरकार हमेशा करती रहती है। सरकार की सहायता के लिए महाशय धर्मपाल गुलाटी ने कई जगह छोटे-छोटे अस्पताल विवाह भवन और सड़क भी बनवाए हैं। महाशय धर्मपाल गुलाटी अनपढ़ बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल खुलवाना अविवाहित लड़कियों के लिए विवाह भवन का निर्माण करवाना ऐसे अभिभावक जो अपने बच्चों की शादी करने में असमर्थ रहते हैं ऐसे बच्चों की शादी करवाने का पूरा खर्च का जिम्मेदारी उठाना यह सभी नेक कार्य महाशय धर्मपाल गुलाटी ने किया है। (प्रेरणादायक कहानी तांगा चलने वाला धर्मपाल गुलाटी कैसे बने MDH मसाले कम्पनी के मालिक)

India Tv के मालिक रजत शर्मा के जीवन की संघर्षपूर्ण सफर की कहानी

1500 रुपये लेके व्यवसाय सुरु करने वाला महाशय धर्मपाल गुलाटी का व्यापार आज 15 सौ करोड रुपए का बना लिया है। कहना  बहुत ही मुश्किल हो सकता है कि एक 15 सौ रुपए के व्यापार से 15 सौ करोड़ का व्यापार महाशय धर्मपाल गुलाटी ने कैसे किया। हम किसी भी इंसान के सफलता को आसानी से देख लेते हैं कि हां वह इंसान सफल हो चुका है उसके पास इतनी बड़ी गाड़ी है उसके पास यह आराम है लेकिन हम उस इंसान के किए गए तपस्या उसके पहले के किए गए काम को कभी नहीं देख पाते हैं। (प्रेरणादायक कहानी तांगा चलने वाला धर्मपाल गुलाटी कैसे बने MDH मसाले कम्पनी के मालिक)

फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह की जीवनी और इनके जीवन की प्रेरणदायक कहानी

मैं आप लोगों को हमेशा से कहता आया हूं कि कि जिंदगी में किसी भी सफलता को किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए आपको उस लक्ष्य के प्रति ईमानदार होना अति आवश्यक है। आपको अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार होने के साथ-साथ कठिन परिश्रम करना भी अति आवश्यक है यदि आप किसी काम के प्रति कठिन परिश्रम नहीं करते हैं तो उस लक्ष्य की प्राप्ति कर पाना नामुमकिन सा हो साबित होने लगता है। आप सभी जानते हैं कि हमें किसे भी लक्ष्य की प्राप्ति किसी भी सफलता की प्राप्ति के लिए हमें कठिन परिश्रम करना अति आवश्यक है

पत्थर उठाने वाला दिलीप सिंह राणा बन गया The Great Khali

यदि बिना कठिन परिश्रम किए हमें सफलता आसानी से मिल जाती तो आज पूरी दुनिया में कोई इंसान और असफल नहीं होता। अपने हर एक प्रेरणादायक कहानी में आपको यह बात बताता आ रहा हूं कि यदि कोई इंसान आसानी से सफलता पा लेता तो आज पूरी दुनिया भर में कोई इंसान  असफल नहीं होता। जैसा की न केवल भारत में बेरोजगारी नहीं है यह  पूरी दुनिया में फैली हुई है। (प्रेरणादायक कहानी तांगा चलने वाला धर्मपाल गुलाटी कैसे बने MDH मसाले कम्पनी के मालिक)

प्रेरणादायक विचार जब दर्द नहीं था सीने में तो खाक मजा था जीने में Limant Post

आपको सफल सिर्फ एक ही आदमी बना सकता है वह खुद आप। आपने चाहा लिया कि आज मैं इस काम को कर लूंगा तो आप को दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती। आपको अपने लक्ष्य के प्रति जिद्दी होना पड़ेगा जिस दिन आपने अपने लक्ष्य के प्रति जिद्द बना लिया कि मैं यही काम करूंगा उस दिन से आप सफलता के राह पर चलना शुरू हो जाएंगे। (प्रेरणादायक कहानी तांगा चलने वाला धर्मपाल गुलाटी कैसे बने MDH मसाले कम्पनी के मालिक)

ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी

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