Inspirational Story of Arunima Sinha Mountaineer without legs

Inspirational Story of Arunima Sinha Mountaineer without legs

Limant Post में आप सभी का बहुत बहुत स्वागत है। एक बार फिर मै आप सभी के समक्ष एक प्रेरणादायक कहानी के साथ उपस्थित हु। कहा जाता है इंसान बिकलांग अपने मन से होता है अपने तन से नहीं।  आज मै बात करने जा रहा हु एक ऐसे महिला की जिसने न केवल अपना नाम बल्कि पुरे भारत का नाम रौशन किया है। सायद आप लोगो ने इस महिला का नाम सुना भी होगा कुछ लोगो ने नहीं भी सुना होगा। (Inspirational Story of Arunima Sinha)

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आज मै बात करने जा रहा हु। अरुणिमा सिन्हा की जिन्होंने बिना पैर के माऊंट एवरेस्ट को भी पार कर दिया। कहा जाता है जब इंसान के मन में किसे चीज का जिद आ जाए तो वो अपने जिद को पूरा किये बिना चुप नहीं बैठता। ऐसा हे एक जिद अरुणिमा सिन्हा ने भी किया। लेकिन आस्चर्य की बात ये है जो काम पुरे तंदुरुस्त इंसान से नहीं हो पता जिस काम को करने के लिए कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उस काम को अरुणिमा सिन्हा ने बिना पैरो के कर दिखाया।

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जी हा अरुणिमा सिन्हा सिन्हा के पैर नहीं है। वो बनाबटी पैरो का इस्तेमाल करती है। अब मै आप सभी पाठको को अरुणिमा सिन्हा के जिंदगी के सच्चाई को बताता हु। ऐसा नहीं था की हमेशा से अरुणिमा सिन्हा के पैर ऐसे  थे। मै इनके जीवन से जुड़े कुछ ऐसे सच्चाई के बारे में बतात हु। जिसे पढ़ के सायद आपके अंदर भी एक ऊर्जा का प्रवाह हो जाए।

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इस दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं है।
हम वो सब कर सकते है जो हम सोच सकते है।
और हम वो सब कुछ सोच सकते है।
जो आजतक हमने नहीं सोचा है।

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अरुणिमा सिन्हा का जन्म 20 जुलाई 1988 के उतर प्रदेश के आंबेडकर नगर जिले में हुआ था। अरुणिमा सिन्हा एक मध्यमवर्गीय परिवार से है। अरुणिमा सिन्हा का लगाव बचपन से हे खेल खुद के तरफ रहा है। इसी कारन से अरुणिमा सिन्हा ने बॉलीवॉल खेलना अपने बचपन से प्रारम्भ कर दिया था। अच्छा खेलने के कारण अरुणिमा सिन्हा नेशनल लेवल की प्लेयर बन गई थी। लेकिन एक बार अरुणिमा सिन्हा उत्तर प्रदेश से दिल्ली किसी काम से ट्रैन से सफर कर रही थी। ट्रैन में कुछ बदमासो ने अरुणिमा सिन्हा के साथ जबरदस्ती सामान लूटने की कोशिश की। अरुणिमा सिन्हा के गले के चैन को छीनने की कोशिश करते रहे। (Inspirational Story of Arunima Sinha)

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लेकिन अरुणिमा सिन्हा ने उन्हें ये देने से मना कर दिया। तो उन बदमासो ने अरुणिमा सिन्हा को ट्रैन से बाहर धक्का दे दिया। जब अरुणिमा सिन्हा ट्रैन से गिरी तो अरुणिमा सिन्हा बेहोस हो गई। जब अरुणिमा सिन्हा को होश आया तो वो अपने घुटने के बल वहां से उठने की कोशिस की लेकिन वो असफल रहे। जब उसका ध्यान अपने पैर पर गया तो वो चकित रह गई। उनके एक पैर बुरी तरह से कटे हुए थे। बहुत सारा खून उनके अंदर से बह चूका था। जख़्म इतना बड़ा था की उनका खून बंद होने का नाम हे नहीं ले रहा था।

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Inspirational Story of Arunima Sinha
Inspirational Story of Arunima Sinha

वो रात बाहर उसी ट्रैन की पटरी के बिच पड़ी मदद के लिए चिल्लाती रही। लेकिन उनके कोई मदद नहीं मिला। हलाकि वो पटरी के बिच में पड़ी हुए थी। और रात को मदद मिलना संभव भी नहीं था। उनके हाथ पैर ने काम करना भी बंद कर दिया था। लेकिन अरुणिमा सिन्हा खुद बताती है की उनके आँखों से उन्हें कुछ नहीं दिख रहा था। लेकिन वो आते जाते ट्रैन को महसूस कर रही थी।जब सुबह हुई तो आस पास के लोगो ने अरुणिमा सिन्हा को मारा समझ के पास में भी नहीं जा रहे थे। अरुणिमा सिन्हा के हालत ऐसे हो चुकी थी की उसके मुँह से आवाज तक नहीं आ रही थी।

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खून इतना बह चूका था की अरुणिमा सिन्हा का बोल पाना संभव नहीं था। लेकिन जब अरुणिमा सिन्हा को आभास हुआ की वहां पे कुछ लोग आ चुके है। सुबह हो चुकी है तो अरुणिमा सिन्हा से अपने हाथ को हिलाया। जब वहां के स्थानीय लोगो ने ये देखा तो वो सभी मिल के अरुणिमा सिन्हा को पास एक हॉस्पिटल में ले गए। लेकिन वहां पे डॉक्टर ने अरुणिमा सिन्हा को बरेली के एक दूसरे हॉस्पिटल में भेज दिया। जब अरुणिमा सिन्हा बरेली एक एक दूसरे हॉस्पिटल पहुंची तो वहां के डॉक्टर ने कहा की इनके पैर को काटना पड़ेगा। (Inspirational Story of Arunima Sinha)

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क्योकि ट्रैन के काटने से अरुणिमा सिन्हा के पैर बिलकुल उनके कपडे के साथ लटक रहा था। कहा जाता है की वहां के डॉक्टर ने यह तक कह दिया की ये जिन्दा नहीं बचेगी। लेकिन जब डॉक्टर ने अरुणिमा सिन्हा के पैर काट के अरुणिमा सिन्हा को बचने की कोशिश की तो हॉस्पिटल में मरीज को बेहोश और सुन्न करने वाली दवाई ही नहीं थी। जब सारे डॉ आपस में ये बात कर रहे थे । तो अरुणिमा ने एक डॉ को पास बुलया और कहा वो उनके पैर बिना सुन्न किये हे काट दे। इतना बड़ा फैसला लेने के बाद आप सोच सकते हो

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ये किसी साधरण इंसान के फैसले नहीं हो सकते। जब डॉ ने ये बात सुनी उन्हें अरुणिमा सिन्हा की हिम्मत की बहुत तरफी किया। और ऐसा पहली बार हुआ की किसे डॉक्टर ने अपना खून किसी मरीज को दिया होगा। अक्सर देखा जाता है खून के लिए डॉक्टर ओप्रशन तक रोक देते है। लेकिन जब डॉक्टर ने अरुणिमा सिन्हा के इस हिम्मत को देखा तो उसने अपना ब्लड देके अरुणिमा सिन्हा के पैर को काट के अलग कर दिया। अरुणिमा सिन्हा बताते है की आज भी उन्हें उस दर्द का अनुभव है।

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आज भी उनके रोम रोम खड़े हो जाते है जब उन्हें उस समय की याद आती है। अरुणिमा सिन्हा एक प्लेयर थी तो जल्द हे ये बात मीडिया में फ़ैल गई और उत्तर प्रदेश सरकार ने अरुणिमा को दिल्ली एम्स में भर्ती कराया। 24 दिन लगातार उनका उपचार होता रहा तब जाके कही अरुणिमा को आराम सा महसूस हुआ।अरुणिमा कहती है जब वो ट्रैन से गिर के बेहोस हो गई थी। वहां ट्रैन के पटरी के बिच चूहे और चींटी इनके पैर को काट रही थी लेकिन अरुणिमा सिन्हा इतनी बेबश थी की वो उसे भगा तक नहीं सकती थी। (Inspirational Story of Arunima Sinha)

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Inspirational Story of Arunima Sinha
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किसे इंसान के अंदर जीवन की इतनी बड़ी संघर्ष की कहानी ही उस इंसान को महान बनती है। जब दिल्ली में अरुणिमा को 24 दिन के बाद होश आया तो उन्हने बहुत ही धक्का लगा जब उन्होंने ये सुना की अरुणिमा आत्महया करने के लिए ट्रैन के सामने आ गई। अरुणिमा बहुत दुखी हूई। हलाकि अरुणिमा के घर वालो ने इन बात का खंडन किया। लेकिन इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। अरुणिमा की हालत इतनी ख़राब थी। की उसका चलना फिरना भी मुश्किल हो गया था। वो ठीक से चल तक नहीं पाती थी। लगातार 4 महीने तक अरुणिमा का इलाज दिल्ली में होता रहा।

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जितना कठिन संघर्ष होता है जीत उतनी हे शानदार होती है।

जब अरुणिमा की इलाज दिल्ली में चल रहा था तभी अरुणिमा ने ये फैसला कर लिया की वो अब पर्वतारोही बनेगी। अरुणिमा सिन्हा के इस फैशले को सुन के सभी हैरान हो गए। आप सभी भी सोच रहे होंगे की कैसा फैसला है अरुणिमा सिन्हा का अब न तो उसका पैर सही न वो एकदम चलने में असमर्थ थी। और वो बात कर रही थी पर्वतारोही बनने की । सभी ने अरुणिमा सिन्हा को बहुत समझाया भी लेकिन अरुणिमा सिन्हा ने किसी की भी नहीं सुनी। अरुणिमा सिन्हा के दिल पे इस बात का बहुत ही गहरा असर हुआ जब अरुणिमा सिन्हा हॉस्पिटल में थी उसके बारे में तरह तरह की अफवाहे बहार फैलती जा रही थी। (Inspirational Story of Arunima Sinha)

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वो अब बस पूरी दुनिया को दिखा देना चाहती थी की वो अभी भी क्या क्या कर सकती है। लेकिन इन सब चीजों का जबाब अरुणिमा सिन्हा ने मुँह से देने का नहीं सोचा । अरुणिमा सिन्हा ने ये सोच लिया था की अब इनसभी लोगो को मै वो कर के दिखाउंगी जिससे इन्हे भी ये लग जाए की वो कमजोर नहीं है। अरुणिमा सिन्हा के इस फैसले से सब ये सोच रहे थे की अरुणिमा सिन्हा के दिमाग पे इस दुर्घंट्ना का बहुत गहरा असर पड़ा है। इसी कारन से वहां पे मनोवैजानिक को भी बुलाया गया जिसे अरुणिमा सिन्हा की जाँच की। ये बात जब अरुणिमा सिन्हा को पता चली की सब उसे पागल समझ रहे है।

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अरुणिमा सिन्हा को इस बाते से कोई प्रभाव नहीं पड़ा। क्योकि अब तक अरुणिमा सिन्हा के मन में ये बात बिलकुल बैठ चुकी थी। की अब उसे पर्वतारोही ही बनना है। जब अरुणिमा सिन्हा को दिल्ली ने घर जाने के लिए बोला गया तो अरुणिमा सिन्हा ने अपने मां पिता से बात किया की उसे अब पर्वतरोही हे बनना है। अरुणिमा सिन्हा के घर वालो ने भी बहुत समझाया। लेकिन अब अरुणिमा सिन्हा किसी के कोई बात सुनने को तैयार ही नहीं थी। इसी कारन उस समय के महिला पर्वतरोहो बछेंद्री पाल से मिलने के निर्णय किया। जब ये सभी बछेंद्री पाल के पास पहुंची तो अरुणिमा सिन्हा को देखा के बछेंद्री पालके आँखों में भी आशु आ गए।

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जब अरुणिमा सिन्हा ने बछेंद्री पालको अपने बारे में बताया वो भी बड़े अचम्भे में रह गई। लेकिन बछेंद्री पाल ने अरुणिमा सिन्हा से कहा अरुणिमा सिन्हा जिस समय तूने ये करने को सोचा समझो तू उसे समय जीत गई। अब तो बस दुनिया तो वो तारीक पता चलना बाकि है। पुरे घर परिवार के बाद एक बछेंद्री पाल ही थे जिन्होंने अरुणिमा सिन्हा का साथ दिया। अब अरुणिमा सिन्हा से अपना प्रयास जारी कर दिया। हलाकि सुरुवात में अरुणिमा सिन्हा से ये सब करना बहुत ही कठिन हो रहा था। (Inspirational Story of Arunima Sinha)

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Inspirational Story of Arunima Sinha
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लेकिन जिद के सामने कौन टिका है। अरुणिमा सिन्हा ने ये ठान लिया था की उसे ये करना है। बस धीरे धीरे समय बीतता गया। और अरुणिमा सिन्हा न वो कर दिखाया। जो किसी ने सोचा भी नहीं था। जी हा अरुणिमा सिन्हा ने 8 km लम्बे माउंट एवरेस्ट को पार कर दिया। ऐसे तो एक साधारण सोच रखने वाले ले लिए ये कर पाना बड़ा ही असंभव है। लेकिन अरुणिमा सिन्हा ने अपने मेहनत और लगन से दुनिया के लिए एक मिसाल कायम कर दिया। आज ऐसा कोई नहीं जो अरुणिमा सिन्हा के नाम को नहीं जनता है एक 29 साल की लड़की बिना पैर के वो कर दिखया। जो किसी इंसान के बस के बहार था। (Inspirational Story of Arunima Sinha)

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वो सिरफिरे होते है जो इतिहास लिखते है।
और वो समझदार होते है जो इतिहास पढ़ते है।

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मेरे इस प्रेरक कहानी का भी यही भावना है की इंसान अगर चाहे तो वो सबसे बड़े चट्टान को भी चूर चूर कर सकता है। बस उस इंसान को अपने काम के प्रति लगन और कड़ी मेहनत करनी होगी। ऐसा कोई काम नहीं है जो इंसान नहीं कर सकता है। अभी के समय में अरुणिमा सिन्हा को बहुत सारे अवार्ड भी मिल चुके है। हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भी अरुणिमा सिन्हा की बहुत तारीफ किया है। अरुणिमा सिन्हा के जीवन पे एक किताब भी आयी है। आज अरुणिमा सिन्हा का नाम पुरे भारत देश में प्रसिद्ध हो गया। इस तरह से अरुणिमा सिन्हा ने अपनी जिंदगी के संघर्ष को अपने काम और लक्ष्य के बिच में कभी भी नहीं आने दिया। और अपने सफलता को प्राप्त किया।

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