Gonorrhea प्रमेह रोग के कारण लक्षण और उपचार

Gonorrhea प्रमेह रोग के कारण लक्षण और उपचार

Gonorrhea प्रमेह रोग के कारण लक्षण और उपचार

प्रमेह रोग होने का मुख्य कारण वात,पित्त और कफ होते हैं। ऐसे व्यक्ति जिनके शरीर में वात,पित्त,कफ इन तीनों का संतुलन सही नहीं होता है। इस कारण से प्रमेह रोग उत्पन्न होना शुरू हो जाता है। या फिर किसी कारणवश इनके संतुलन में खराबी होने शुरू हो जाती है। ऐसे व्यक्तियों को प्रमेह रोग आसानी से अपने प्रभाव से प्रभावित करने लगता है। इस रोग के दौरान पीड़ित के मूत्र के साथ गाढा पतला विभिन्न रंगों का द्रव निकलना शुरू हो जाता है। साथ ही साथ कभी-कभी यह मूत्र मार्ग में खुजली उत्पन्न भी कर देते हैं। विभिन्न रंगों के द्रव्य के स्राव होने से कई बार यह रोग शर्मिंदगी का सामना करने पर भी मजबूर कर देता है। (Gonorrhea प्रमेह रोग के कारण लक्षण और उपचार)

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यदि सही समय पर प्रमेह रोग का उपचार नहीं किया गया। तो हमारे शरीर से उन सभी तत्वों का नाश हो जाता है। जो हमारे शरीर को काम करने के लिए प्रेरित करते हैं। साधारण भाषा में कहां जाए तो यदि प्रमेह रोग को सही समय पर उपचार नहीं किया जाए। तो इंसान कई प्रकार के रोगों से ग्रसित हो जाता है। शरीर से निकलने वाले यह गाढा रंग-बिरंगे तरल पदार्थ हमारे शरीर के अंदर रोग से लड़ने की क्षमता को मजबूत करने में मदद करते हैं। ऐसे में यदि किसी कारणवश यह सभी तत्व हमारे शरीर से बाहर निकल जाएं। तो हमारा शरीर छोटे से छोटे रोग से भी प्रभावित होना शुरू हो जाता है। प्रमेह रोग से पीड़ित व्यक्ति का शरीर के अंदर अधिक मात्रा में मूत्र आना स्वभाविक अवस्था बन जाती है। (Gonorrhea प्रमेह रोग के कारण लक्षण और उपचार)

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साथ ही साथ मूत्र का दुर्गंध देना, मूत्र का गंदा होना, यह सभी प्रमेह रोग के प्रमुख लक्षण माने जाते हैं। कभी-कभी प्रमेह रोग से पीड़ित रोगी को मूत्र त्याग करने के समय इनके वीर्य का स्राव भी होना शुरू हो जाता है।साथ ही साथ यह जरूरी नहीं है। कि हमेशा मूत्र त्याग करने के समय ही हमारे वीर्य का स्राव मुत्र त्याग करने से पहले भी वीर्य का स्राव होना प्रमेह रोग के लक्षणों में ही माना जाता है।  मूत्र त्याग करने के बाद भी यदि किसी रोगी का वीर्य स्राव हो रहा हो। तो इसे भी हम प्रमेह रोग के रूप में ही देखते हैं। आज हमें जानकारी के माध्यम से प्रमेह रोग को आयुर्वेदिक नुस्खों के साथ सही करने के बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे। (Gonorrhea प्रमेह रोग के कारण लक्षण और उपचार)

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आयुर्वेद के विज्ञान में सभी रोगों का उपचार दिया गया है। यदि हम सही समय पर आयुर्वेद का साथ ले ले। तो हमारे शरीर में किसी प्रकार की कोई तकलीफ और रोग उत्पन्न नहीं होंगे। औषधियों के साथ-साथ हमें रोगों के लिए परहेज करना भी अति आवश्यक होता है। परहेज करने से घातक से घातक रोग को अल्प समय में सही किया जा सकता है। प्रमेह रोग के अच्छी तरह से जानने के लिए इसके कुछ प्रमुख लक्षण है। जिसे आसानी से हमें यह पता लगाया जा सकता है। कि यह प्रमेह रोग है। तो आइए हम जानते हैं कि ऐसे कौन-कौन से लक्षण है। जिसे देखकर आसानी से किसी व्यक्ति के अंदर प्रमेह रोग के लक्षण को पता किया जा सकता है।

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ऐसे व्यक्ति जिनके शरीर से अत्यधिक मात्रा में पसीने का स्राव होता है। ऐसे व्यक्तियों को प्रमेह रोग होने का संभावना अत्यधिक बढ़ जाता है। पसीने के आने के साथ-साथ पसीने के विशेष प्रकार के गंद का आना या पसीने का ज्यादा बदबू देना भी प्रमेह रोग के लक्षणों में माने जाते हैं। छाती हमेशा भारी रहना और हृदय के अंदर कुछ भारी भारी सा महसूस होना भी प्रमेह रोग के लक्षणों में ही आते हैं। आंख,जीव और कानों में हमेशा गंदगी जमा रहना बार बार साफ करने के उपरांत में इन में गंदगी का जमा हो जाना भी प्रमेह रोग के लक्षणों के प्रमुख लक्षण माने जाते हैं। नख बाल इत्यादिओं का समय सीमा से ज्यादा बढ़ना भी प्रमेह रोग के  प्रमुख लक्षण माने जा सकते हैं। (Gonorrhea प्रमेह रोग के कारण लक्षण और उपचार)

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आइए हम जानते हैं किसी भी व्यक्ति के अंदर प्रमेह रोग होने के मुख्य कारण क्या हैं। ऐसे व्यक्ति जो ज्यादा मात्रा में वसा (FAT) वाली वस्तुओं का सेवन करते हो। जैसे पनीर, घी, दूध, काजू,  मुनक्का इत्यादिओं का सेवन अत्यधिक मात्रा में करने से और शरीर से नियमित रूप से काम ना लेने के कारण प्रमेह रोग होने शुरू हो जाते हैं। ऐसे व्यक्ति जो इन सब चीजों का सेवन अत्यधिक मात्रा में करते हो। और पूरे दिन आराम की अवस्था में रहते हो। ऐसे व्यक्ति के शरीर के अंदर प्रमेह रोग होने की आशंका ज्यादा बढ़ जाती है। साथ ही साथ मन में हमेशा कामुक विचार रखना दिमाग में यौन विषय के ऊपर हमेशा सोचते रहना इन सभी चीजों के हमेशा सोचने के कारण भी प्रमेह रोग होना शुरू हो जाता है।

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मन में गंदे विचार हमेशा सोचने के कारण प्रमेह रोग आसानी से किसी भी स्वस्थ व्यक्ति को अपने प्रभाव से प्रभावित करना शुरू कर देती है। यदि सही समय पर प्रमेह रोग का उपचार नहीं किया गया। तो यह आगे चलकर स्वप्नदोष जैसे समस्याओ को जन्म देने के लिए सफल साबित होने लगती है। हालांकि शुरुआती दौर में प्रमेह रोग मूत्र के साथ वीर्य निकलने के साथ प्रारंभ होता है। लेकिन यदि इसका उपचार प्रारंभिक समय में ही करना शुरू कर दिया जाए तो यह कम समय में ही आसानी से सही हो जाता है। लेकिन यदि शुरुआती समय में इसके ऊपर अच्छे तरीके से ध्यान नहीं दिया गया। तो आगे चलकर स्वप्नदोष जैसे रोगों को जन्म देने के लिए तैयार हो जाती है। (Gonorrhea प्रमेह रोग के कारण लक्षण और उपचार)

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आइए हम जानते हैं कि प्रमेह रोग और स्वप्नदोष जैसे रोगों को कैसे हम आयुर्वेदिक नुस्खों के साथ अल्प समय में जल्दी से जल्दी खत्म कर सकते हैं। हालांकि स्वप्नदोष और प्रमेह रोग को जड़ से समाप्त करने के लिए कई प्रकार के रसायनिक दवाइयां भी बाजार में उपलब्ध है। लेकिन आप सभी को मैं यह बताना चाहूंगा कि रासायनिक दवाइयों के सेवन करने से कुछ समय के लिए हमारे शरीर के अंदर उत्पन्न हो रहे रोग में सुधार प्राप्त होता है। लेकिन यदि हम अपने शरीर से रोग को पूर्ण रूप से समाप्त करना चाहते हैं। तो ऐसे में हमारे शरीर को आयुर्वेदिक दवाइयों का सेवन करना अत्यधिक लाभप्रद साबित होता है।

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साथ ही साथ ऐसे व्यक्ति जिनके शरीर में पहले ही से किसी अन्य प्रकार के रोग ग्रसित है। ऐसे व्यक्तियों को बाजारू रसायनिक दवाइयों के सेवन करने से शरीर के अंदर साइड इफेक्ट होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। जो आगे चलकर हो सकता है कि शरीर के अंदर उत्पन्न हो रहे साइड इफेक्ट होने की वजह से पुराने रोगों को बढ़ने में मदद मिल जाए। आप सभी ने गेंदे के फूल का नाम आवश्य सुना होगा। गेंदे का फूल पूरे भारतवर्ष में प्रत्येक जगह पूजा पाठ के कार्यों को संपन्न करने के लिए उपयोग में किया जाता है। साथ ही साथ कई जगह इसे अफ्रीकन गेंदा भी कहा जाता है। आज तक तो आपने इसे फूल के रूप में जाना है। (Gonorrhea प्रमेह रोग के कारण लक्षण और उपचार)

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आइए हम जानते हैं कैसे गेंदे के फूल का उपयोग करके हम अपने जीवन में होने वाले प्रमेह रोग को आसानी से खत्म कर सकते हैं। जिन लोगों को प्रमेह रोग की परेशानी है। श्वेत प्रदर की बीमारी है,श्वेत स्राव अधिक होता है। तो उनके लिए गेंदे का फूल बहुत ही लाभप्रद साबित हो सकता है। साथ ही साथ महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान होने वाले रक्त स्राव में भी गेंदे का फूल बहुत लाभकारी साबित होता है। ऐसी महिलाएं जिनके मासिक धर्म के दौरान अधिक मात्रा में रक्त स्राव हो रहा हो। ऐसी महिलाओं को गेंदे का फूल का सेवन करना लाभप्रद होता है। तो आइए हम जानते हैं कैसे हम गेंदे के फूल के उपयोग के साथ रक्त प्रदर और प्रमेह रोग को आसानी से समाप्त कर सकते हैं।

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सबसे पहले आपको गेंदे के फूल के ऊपरी भाग का कुछ पत्ति निकाल लेना है। साथ ही साथ गेंदे के फूल के पत्तियों के साथ गेंदे के पेड़ से चार से पांच पत्तिया भी ले ले। इसके बाद आपको फूल के ऊपरी भाग को पीस के इसका पेस्ट तैयार कर लेना है। पेस्ट तैयार होने के बाद इसे थोड़ी सी मात्रा में आप मिश्री मिला दे। ध्यान रखें कि मिश्री आपको बाजार से मिल रहे छोटे छोटे टुकड़े वाले उपयोग नहीं करने हैं। मिश्री आपको हमेशा बड़े साइज का उपयोग करना है। (Gonorrhea प्रमेह रोग के कारण लक्षण और उपचार)

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क्योंकि बाजार से मिल रहे छोटे आकर के मिश्री में कई प्रकार के रासायनिक दवाइयों का उपयोग किया जाता है। अतः आप हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि आपको छोटे आकर वाले मिश्री का उपयोग नहीं करना है। तैयार किए गए पेस्ट में हलकी मात्रा में मिश्री मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम दो से तीन चम्मच सेवन करें। लगातार 10 से 12 दिन इस औषधि का सेवन करने से प्रमेह रोग में काफी सुधार महसूस किया जा सकता है। (Gonorrhea प्रमेह रोग के कारण लक्षण और उपचार)

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आइए अब हम दूसरे नुस्ख़े  के बारे में जानते हैं। आप सभी ने बबूल का नाम आवश्य सुना होगा। बबूल के पेड़ के अंदर कई प्रकार के ऐसे औषधीय गुण मौजूद हैं। जो शरीर के अंदर उत्पन्न हो रहे कई अन्य प्रकार के रोगों को शरीर से खत्म करने में हमारी मदद करते हैं। साथ ही साथ बबूल का उपयोग प्रमेह रोग और श्वेत प्रदर के रोग के लिए किया जा सकता है। आइए हम जानते हैं कैसे बबूल के उपयोग के साथ हम श्वेत प्रदर और प्रमेह रोग को आसानी से समाप्त कर सकते हैं। ऐसे व्यक्ति जिन्हें प्रमेह रोग की शिकायत है या धातु रोग की शिकायत है या बार-बार स्वप्नदोष हो रहा हो ऐसे व्यक्तियों के लिए बबूल का सेवन करना काफी लाभप्रद साबित होता है। (Gonorrhea प्रमेह रोग के कारण लक्षण और उपचार)

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स्वप्नदोष,धातु रोग,प्रमेह रोग और श्वेत प्रदर रोग को जड़ से समाप्त करने के लिए बबूल के पत्ति को इसे अच्छी तरह से चबा के एक गिलास पानी के साथ निगल जाना है। प्रत्येक दिन बबूल के पत्ते के सेवन करने से 4 से 5 दिन में ही प्रमेह रोग में काफी राहत महसूस किया जा सकता है। प्रमेह रोग और श्वेत प्रदर रोग से छुटकारा पाने में पालक का भी महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। आप सभी ने पालक का नाम अवश्य सुना होगा। पालक कई अन्य प्रकार के रोगों में भी हमारी काफी मदद करता है। (Gonorrhea प्रमेह रोग के कारण लक्षण और उपचार)

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आइए हम जानते हैं कैसे पालक के सेवन करने से शरीर के अंदर उत्पन्न हो रहे प्रमेह रोग और श्वेत प्रदर रोग साथ ही साथ स्वप्नदोष जैसे लोगों को आसानी से खत्म किया जा सकता है। उपयोग अनुसार कुछ पालक की पत्तियां ले इसे बिना पानी के मिलाए ही अच्छी तरह से पीस लें। इसके बाद कोशिश करें इससे अच्छी तरह से इसका रस निचोड़ लें। सुबह-सुबह बिना कुछ खाए खाली पेट इस रस का सेवन करें। एक हफ्ते लगातार इस रस के सेवन करने से प्रमेह रोग और श्वेत प्रदर रोग जैसे रोगों में काफी राहत महसूस किया जा सकता है। (Gonorrhea प्रमेह रोग के कारण लक्षण और उपचार)

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यदि आप सभी को प्रमेह रोग और श्वेत प्रदर रोग के बारे में दिया गया यह जानकारी पसंद आया हो तो आप इसे अपने दोस्त और परिवारों के बीच अवश्य शेयर कर दें। कई बार प्रमेह रोग से ग्रसित रोगी शर्मिंदगी का कारण बन जाता है। जिसके कारण इससे पीड़ित लोग अपने मन की बात किसी अन्य व्यक्ति के सामने बताने में हिचकीचा जाते हैं। ऐसे में आपके द्वारा शेयर करने से यह जानकारी कई अन्य लोगों के लिए राहत महसूस दिला सकता है। साथ ही साथ यदि आप प्रमेह रोग और स्वप्नदोष के बारे में किसी अन्य जानकारी को पूछना चाहते हैं। या फिर आप इस जानकारी के बारे में कुछ बताना चाहते हैं। तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं। (Gonorrhea प्रमेह रोग के कारण लक्षण और उपचार)

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