Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार की हिंदी में जानकारी

Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार

Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार की हिंदी में जानकारी 

आज पूरी दुनिया में अस्थमा अर्थात दमा एक ऐसी बीमारी है। जिसके विकार से मनुष्य को सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ महसूस होती है। कहा जाता है। जिस किसी इंसान को एक बार अस्थमा अर्थात दमे की बीमारी पकड़ लेती है। उसे सांस लेने में बहुत ज्यादा कठिनाई महसूस होती है। सांस लेने में कठिनाई महसूस होने का कारण है। कि जब भी किसी इंसान को दमा में अर्थात अस्थमा के बीमारी का लक्षण उसके शरीर के अंदर आ जाता है। (Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार की हिंदी में जानकारी)

उसके स्वशन अंग सिकुड़ जाती है। जिससे मरीज को सांस लेने में बहुत कठिनाई उत्पन्न होने लगती है। पूरी दुनिया में अस्थमा अर्थात दमा एक ऐसी बीमारी है। जिसके विकार में मनुष्य को सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ महसूस होती है।(Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार की हिंदी में जानकारी)

जिस किसी इंसान को एक बार अस्थमा अर्थात दमे की बीमारी पकड़ लेती है। उसे सांस लेने में बहुत ज्यादा कठिनाई महसूस होती है। सांस लेने में कठिनाई महसूस होने का कारण है। कि जब भी किसी इंसान को दमा में अर्थात अस्थमा के बीमारी का लक्षण उसके शरीर के अंदर आ जाता है। और उसके स्वशन अंग सिकुड़ जाती है। जिससे मरीज को सांस लेने में बहुत कठिनाई उत्पन्न होने लगती है।

अस्थमा के रोग के मरीजों को उनके स्वास लेने के मार्ग में सूजन आ जाता है। जिसके कारण मरीज जब भी साँस लेने की कोशिश करता है। उसके सांस लेने की प्रक्रिया में उसे काफी तकलीफ का सामना करना पड़ता है। ज्यादतर देखा जाता है जब भी इंसान सांस लेने की कोशिश करता है। आवाज आने लगती है। खांसी होने लगती है। और गले में और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं भी उत्पन्न होने लगती है।

अस्थमा के मरीज को दो भागों में बांटा गया है। पहला भाग को हम आन्तरिक अस्तमा कहते हैं। और दूसरे भाग को बाहरी अस्तमा कहते हैं। (Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार की हिंदी में जानकारी)

सबसे पहले आइए हम जानते हैं कि बाहरी अस्तमा क्या है। और यह कैसे हमारे शरीर के अंदर अस्थमा जैसे रोग को जन्म देती है। बाहरी अस्थमा बाहर के एलर्जी साधरण भाषा में हम इसे यह कह सकते हैं कि बाहरी धूलकण पराग जानवर इत्यादि हमारे स्वास्थ्य के अंदर हमारे शरीर के अंदर जाते हैं। जिसके कारण हमारे शरीर के अंदर एलर्जी पैदा हो जाती है और अस्थमा जैसे खतरनाक करो हमारे शरीर को जकड़ लेते हैं।

यह बाहरी अस्थमा का एक परिभाषा है। जिसमें वातावरण के हिस्से से बाहर ही पदार्थ तत्व से होने वाले अस्तमा के विकार को बहरी अस्तमा का विकार भी कह सकते हैं। सिगरेट का धुआं भी इसका एक हिस्सा है। यदि हम सांस की नली से सिगरेट की धुए को होने अंदर लेते है। या किसे और कारन से हमारे अंदर जाती है। तो यह भी अस्थमा जैसी खतरनाक बीमारी को पैदा करने में सक्षम होती है।

अब हम बात करते हैं आंतरिक अस्थमा की। आंतरिक अस्थमा में बहुत सारे कारण हो सकते हैं। किसी भी मरीज को अस्थमा के रोग का शिकार बनाने के लिए ज्यादातर देखा जाता है की दवाइयां भी अस्थमा के रोग का कारण होती है। अभी के समय में ज्यादातर लोग एस्प्रिन और डिस्प्रीन का इस्तेमाल ज्यादा मात्रा में करते हैं। इस तरह की दवाइया अस्थमा के रोग को जन्म देने  बहुत ज्यादा मदद करता है। एस्प्रिन और डिस्प्रिन के लगातार उपयोग करने से इंसान के शरीर के अंदर अस्थमा और दमा जैसे खतरनाक रोग के लक्षण आने लगते हैं। कभी कभी बलगम का जमा होना और लगातार खांसी होना भी अस्तमा जैसे खतरनाक हमारे शरीर के अंदर उत्पन्न कर देती है।

Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार
Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार

पूरी दुनिया के अपेक्षा भारत में अस्थमा के रोगियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि अस्थमा रोग अर्थात दमा का रोग एक स्वसन रोग बीमारी है। जो इंसान के फेफड़ो से जुड़ी होती है। अस्थमा के रोग में मरीज को सांस लेने में काफी कठिनाई उत्पन्न हो जाती है। और मरीज सांस नहीं ले पाता है। इस कारन से मरीज के फेफड़े में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं जा पाता। जिसे अस्थमा अटैक भी कहा जाता है। यदि हमारे शरीर के अंदर ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाती है। यदि हमारी फेफड़ो में हमारे श्वसन प्रक्रिया के द्वारा पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पा रही है तो हमारी दम घुटने लगने लगती है।

मरीज तड़पने और छटपटाने लगता है। और यह मरीजों के लिए जानलेवा साबित भी हो सकता है। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि ऑक्सीजन हमारे शरीर के लिए बहुत उपयुक्त बहुत जरूरी होता है। यदि हमारे शरीर के अंदर पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन ना जाए तो हमारी मौत संभव हो पाती है। यही एक कारण है कि अस्थमा के मरीज को जान जाने की भी संभावना ज्यादातर बढ़ जाती है। (Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार की हिंदी में जानकारी)

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अब आइए हम जानते हैं कि अस्थमा अर्थात दमा के रोगियों को कौन से लक्षण है जिससे आप आसानी से पता लगा सकते हैं कि किसी इंसान को दमे की बीमारी ने जकड़ रखा है।

सर्वप्रथम मैं आपको बताना चाहता हूं कि यदि किसी इंसान को अस्तमा के रोग ने जकड़ रखा है। तो उस इंसान के शरीर के अंदर बलगम का लगातार निर्माण होने लगता है। कभी-कभी मरीज के शरीर के अंदर बिना बलगम के भी सूखी खांसी होने लगती है। ज्यादातर मामलों में देखा जाता है कि इंसान की खांसी होती रहती है।

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अस्थमा के मरीज को अपने सीने में हमेशा जकड़न जैसा महसूस होता रहता है। शरीर में जकरण के लक्षण के पता चल जाता है की  अस्थमा के मरीज के शरीर के अंदर बलगम काफी मात्रा में बन गया है। बलगम के काफी मात्रा में बन जाने का अनुभव सीने में हमेशा जलन जैसा महसूस करने लगता है।

सबसे महत्वपूर्ण लक्षण  देखा जाता है की यदि हम छोटी से छोटी किसी कार्य को भी करते हैं। तो हम बहुत जल्दी थक जाते हैं। तुम्हारी सांस फूलने लगती है। इसका सबसे अच्छा उपाय यह है कि जब भी हम कभी अपने घर की सीढ़ियों पर चढ़ते हैं तो देखा जाता है कि अस्थमा के रोग के मरीज बहुत जल्दी हांफने लगते हैं। उनकी सांसे बहुत जल्दी फूलने लगती है। एक बहुत ही महत्वपूर्ण लक्षण अस्थमा के रोगी हो सकते हैं।

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अस्थमा के रोग से पीड़ित मरीजों को उनके मुंह से बदबू आना खाने के समय उनके शरीर के अंदर से बदबू आना ये सभी लक्षण भी अस्थमा का हो सकता है। अस्थमा के मरीज के बोलने और खांसने के समय उनके मुंह के अंदर से बदबू आने लगती है। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि बलगम हमारे शरीर का एक बेकार चीज होता है। शरीर के अंदर लगातार बलगम रहने का कारण बलगम में सरन उत्पन्न हो जाती है। जो बदबू देने लगती है। यही कारन है की अस्थमा से पीड़ित मरीज के बोलने के समय या खांसने के समय बलगम का दुर्गंध उनके मुंह से उनके साथ से बाहर निकलने लगता है।

आइए मैं आपको बताता हूं कि अस्थमा के वह कौन से कारण है जिससे एक स्वस्थ इंसान भी इस खतरनाक बीमारी के का शिकार हो जाता है। (Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार की हिंदी में जानकारी)

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वायु प्रदूषण अस्थमे के रोग का प्रमुख कारण है। जिसके कारण एक स्वस्थ रोगी भी अस्थमा जैसे खतरनाक विकार का शिकार हो जाता है। सांस लेने के साथ हमारे शरीर के अंदर बहुत सारी ऐसी पदार्थ हमारे श्वसन क्रिया से अंदर चली जाती है जिसके कारण शरीर के अंदर अस्थमा जैसे खतरनाक रोग उत्पन्न हो जाते हैं। प्रदूषण होने के कारण हमारे घर में भी धूल का माहौल हो जाता है लगातार धूल हवा में मिलने कारण हमारे श्वसन क्रिया से धूल भी हमारे शरीर के अंदर जाने लगता है। धूल के लगातार हमारे शरीर के अंदर जाने से हमारे शरीर के अंदर दमा अर्थात अस्थमा जैसे खतरनाक रोग उत्पन्न हो जाते हैं।

यदि आपके घर में कोई पालतू जानवर है। तो यह भी एक कारण हो सकता है कि आपके घर के अंदर किसी भी इंसान को अस्थमा आसानी से अपने चपेट में जकड़ ले। घर में पालतू जानवर पालने से हमारे घर के कुछ ऐसे तत्व उपस्थित हो जाती हैं। जो लगातार इंसान के शरीर के अंदर जाने से इंसान को अस्थमा जैसे खतरनाक रोगों का सामना करना पड़ता है। यदि आप घर में पालतू जानवर पालते हैं तो आपको अपने पालतू जानवर को समय-समय पर साफ रखना अति आवश्यक है। (Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार की हिंदी में जानकारी)

Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार
Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार

धूम्रपान भी एक स्वस्थ इंसान को अस्थमा की बीमारी का शिकार बना सकता है। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि सिगरेट के धुएं में बहुत तरह के रसायन और गैस होती है। एक स्वस्थ इंसान को बीमार बनाने के लिए उपयुक्त होती है। जब भी एक स्वस्थ इंसान धूम्रपान करता है। तो उसके अंदर उपस्थित रसायन और गैस उसके फेफड़े को बीमार बनाने लगता है। और यदि इंसान के शरीर का अंदर का फेफड़ा बीमार हो जाता है तो उसे अस्थमा जैसे रोग आसानी से अपनी चपेट में जकड़ लेते हैं।

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शराब का सेवन भी अस्थमा जैसे खतरनाक रोग को आपके शरीर में उत्पन्न करने में मदद करता है। यदि आप शराब का सेवन करते हैं। तो आसानी से इंसान के सरीर में अस्थमा अर्थात दमा आप को अपनी चपेट में जकड़ लेंगे। और बीयर में सल्फाइड की मात्रा अधिक होती है शरीर में सल्फाइड की मात्रा यदि ज्यादातर बढ़ जाती है। एक स्वस्थ इंसान के अंदर भी अस्थमा अर्थात दम है जैसे खतरनाक रोग आसानी से आरम्भ हो जाते हैं।

ज्यादा मात्रा में नमक का सेवन करना भी अस्थमा के रोग को निमंत्रण देने के बराबर है। यदि एक इंसान अपने भोजन में ज्यादा मात्रा में नमक का सेवन करता है तो इंसान को अस्थमा और दमा जैसे खतरनाक लोग आसानी से अपनी चपेट में जकड़ लेते हैं। नमक के ज्यादा सेवन करने से हमारे शरीर के अंदर फेफड़े में बहुत तरह की समस्याएं उत्पन्न होने लगती है। और फिर फेफड़ा के अस्वस्थ होने के कारण हमारे शरीर में आसानी से अस्थमा अपना रोग प्रारंभ कर सकता है। (Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार की हिंदी में जानकारी)

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अब मैं आपको ऐसी जानकारी प्रदान करने जा रहा हूं जिसको सुनकर आप सभी को हैरानी होने लगेगी। जहां पर यह कहा जाता है कि योग किसी भी रोग का उपचार हो सकता है। योग करने से अपने शरीर के अंदर उपस्थित किसी भी तरह के विकार को आसानी से समाप्त कर सकते हैं। वहीं पर यह एक मुख्य कारण है। अस्थमा के रोग का। यदि कोई इंसान ज्यादा मात्रा में व्यायाम करता है। तो यह भी इंसान के शरीर के अंदर अस्थमा जैसे खतरनाक हो को उत्पन्न करने में मदद करता है। यह बात सुनकर बहुत ही हैरानी होती है लेकिन WHO  के शोधकर्ताओं के हिसाब से ज्यादा व्यायाम करना भी अस्थमा के रोग का कारण हो सकता है।

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कभी-कभी यह देखा जाता है कि यदि अस्थमा हमारे दादाजी या पिताजी को हैं। तो उनके पोते में आसानी से या वंशानुगत प्रभाव फैलाने लगता है। अस्थमा एक ऐसी बीमारी है। जो वंशानुगत भी फैलती है। यदि हमारे घर में किसी भी परिवार के सदस्य को अस्थमा का रोग है। तो दूसरों को अस्थमा का रोग होना बहुत ही आसान हो जाता है। (Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार की हिंदी में जानकारी)

अस्थमा के रोग के उपचार के लिए कुछ घरेलू नुस्खे भी हैं। जिनके उपयोग से आप अपने अस्तमा को आसानी से कम और खत्म दोनों कर सकते हैं। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि आयुर्वेदिक में सभी बीमारियों की अचूक औषधि उपलब्ध है। जिससे कोई भी इंसान अपने किसी भी तरह के रोग को आसानी से जड़ से खत्म करने में सफल साबित हो सकता है। 

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आइए आज हम भी कुछ ऐसे नुस्खे के बारे में आपको विस्तार से बताते हैं। जिस के उपयोग से आप अस्थमा के खतरनाक बीमारी को अपने शरीर के अंदर से कम और खत्म दोनों आसानी से करने में सफल हो सकते हैं।  आप सभी जानते हैं कि किसी बीमारी में इंसान के द्वारा लिया गया आहार एक ऐसा माध्यम है। जिससे हम किसी भी तरह के खतरनाक बीमारी को खत्म सकते हैं। सबसे पहले हम जानते हैं कि अस्थमा के रोग में मरीजों को किस तरह के भोजन का सेवन करना चाहिए।

यदि कोई भी इंसान अस्थमा के रोग से पीड़ित है। तो उसे किसी भी तरह के भोजन को ज्यादा से ज्यादा मात्रा में चलाकर सेवन करना चाहिए। ज्यादा मात्रा में किसी भोजन को चबा चबाकर खाने से हमारे शरीर के अंदर रोग निरोधक क्षमता बढ़ जाती है। अरुण निरोधक क्षमता हमारे शरीर के अंदर की कैसी क्षमता है जो किसी भी रोग से लड़ने के लिए सक्षम होता है। यदि हमारे शरीर के अंदर हो निरोधक क्षमता कम हो तो एक छोटी से छोटी बीमारी भी हमारे सरीर के ऊपर हावी होने लगती है।

Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार
Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार

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अस्थमा से पीड़ित मरीजों को अपने भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन अधिक से अधिक मात्रा में करना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन अधिक से अधिक मात्रा करने अस्थमा के मरीजों को अस्थमा के रोग में काफी सुधार मिलती है। हरी पत्तेदार सब्जी में अस्थमा के मरीजों को पालक का इस्तेमाल अधिक से अधिक मात्रा में करना चाहिए। पालक में मौजूद योगिक गुण शरीर के अंदर उपस्थित अस्थमा के रोग को जल्द से जल्द खत्म करने में मरीजों को मदद करता है। (Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार की हिंदी में जानकारी)

गाजर का इस्तेमाल भी अस्तमा के विकार के लिए रामबाण इलाज साबित हो सकता है। खीरे का जूस अथवा पालक का जूस प्रतिदिन दो बार अवश्य सेवन करना चाहिए। गाजर और पालक के रस से अस्थमा में बहुत ज्यादा फायदा होता है। यह आपके शरीर के अंदर रोगनिरोधी क्षमता को बढ़ा देता है और आपके शरीर के अंदर बलगम को बनने से भी रोकता है।

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अस्थमा के मरीजों को अस्थमा के उपचार के लिए विटामिन ए विटामिन सी और विटामिन बी का सेवन करना चाहिए। अस्थमा से पीड़ित मरीजों को कभी भी पहले के के तोड़े हुए फल का सेवन नहीं करना चाहिए। हमेशा ताजे फल का सेवन करने से अस्थमा के मरीज को किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता है। कोशिश करना चाहिए कि हमेशा ताजे फल का सेवन करें।

अब दवाइयों की बात करें ओमेगा 3 फैटी एसिड अस्थमा के रोग को रोकने में काफी कारगर साबित हो सकता है। ओमेगा-3 आपके शरीर के अंदर जब कभी भी अस्तमा का अटैक आता है। तो उस समय में ओमेगा-3 के सेवन करने से आपके शरीर के अंदर अस्थमा के अटैक कम हो जाती हैं। और आपका सांस फूलने की प्रक्रिया भी कम हो जाती है। जिससे आप बहुत ज्यादा आराम महसूस कर सकते हैं। (Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार की हिंदी में जानकारी)

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अस्थमा के मरीजों को अपने भोजन में अदरक लहसुन और हल्दी का उपयोग ज्यादा से ज्यादा मात्रा में करना चाहिए। क्या आप सभी जानते हैं कि अदरक लहसुन और हल्दी तीनों में मौजूद ऐसे योगिक गुण है। जो आपके शरीर के अंदर रोग निरोधक क्षमता को काफी बढ़ा देते हैं। जो आपके शरीर के अंदर किसी भी रोग से लड़ने की क्षमता रखता है। यदि शरीर के अंदर रोग निरोधक क्षमता काफी मजबूत है। तो आप के शरीर के अंदर किसी भी अन्य रोगों का टिक पाना बहुत मुश्किल साबित होने लगता है। अस्थमा के मरीजों को अपने भोजन में अदरक लहसुन का उपयोग अवश्य करना चाहिए। (Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार की हिंदी में जानकारी)

अस्थमा के मरीजों को हमेशा गर्म पानी का सेवन करना चाहिए। कभी भी अस्थमा के मरीज को ठंडे पानी का सेवन नहीं करना चाहिए। ठंडे पानी के सेवन करने से अस्थमा के मरीज के शरीर के अंदर बन रहे बलगम की क्षमता और ज्यादा बढ़ने लगती है। अतः मरीज हमेशा पानी को उबालकर गर्म करके ही पिए। गर्म पानी से आपके शरीर के अंदर ना केवल अस्थमा बल्कि और भी बहुत ऐसी बीमारियां हैं जो खत्म होने लगती है। गर्म पानी के सेवन से शरीर के अंदर बन रहे बलगम की क्षमता में भी कमी आती है। आपकी सांस लेने और बोलने के समय आने वाली बदबू में भी कमी आती है। अतः अस्थमा से पीड़ित मरीजों को हमेशा गर्म पानी का सेवन करना लाभदायक साबित हो सकता है। (Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार की हिंदी में जानकारी)

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जैसा की मैंने आप सभी को पहले भी बताया है कि ज्यादा योग करना भी अस्थमा के रोग का कारण बन सकता है। लेकिन यदि आप संयमित योग करते हैं। तो उससे आपको फायदा भी मिलेगा। अस्थमा के मरीजों को स्वर्गआसान  सिरसासन भुजंगासन उनके अस्तमा  में बहुत ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।

अस्थमा के रोग को जड़ से खत्म करने के लिए अस्थमा के मरीजों को एक चम्मच आंवले के पाउडर में एक चम्मच शहद को मिलाकर इसे एक अच्छा मिश्रण बना लेना है। इस मिश्रण का सेवन प्रतिदिन दिन में दो बार करने से शरीर के अंदर उपस्थित अस्थमा के खतरनाक रोग आसानी से जड़ से खत्म होने लगते हैं। (Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार की हिंदी में जानकारी)

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सरसों के तेल में कपूर को मिलाकर गर्म करें। जब यह आपस में अच्छे से घुल जाए तो इस तेल का पीठ और सीने पर मालिश करें। इस तेल की मालिश करने से अस्थमा के रोग से पीड़ित मरीजों को पीठ में जकड़न कम महसूस होने लगता है। और शरीर के अंदर बन रहे बलगम भी आसानी से खत्म होने लगते हैं। अतः आप सभी को मैं यह बताना चाहता हूं कि यदि आपके घर के आसपास या घर में कोई भी अस्थमा से पीड़ित मरीज हैं। तो आप उन्हें इस के सुझाव को अवश्य प्रदान करें। (Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार की हिंदी में जानकारी)

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अस्थमा से पीड़ित मरीजों को एक चम्मच अदरक के रस में और शहद डालकर एक मिश्रण तैयार करना है। इस मिश्रण का सेवन 1 दिन में तीन से चार बार करने से अस्थमा को काफी राहत मिलती है। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि यह सभी प्राकृतिक वस्तु है। इससे आपको अपने जीवन में किसी तरह की कोई परेशानी उत्पन्न नहीं होगी। इसके सेवन करने से आपको किसी भी तरह के साइड इफेक्ट का सामना नहीं करना पड़ेगा। अतः आप भी इन सभी घरेलू नुस्खे का उपयोग अस्थमा के रोग को जड़ से खत्म करने के लिए कर सकते हैं। (Asthma अर्थात दमा के विकार के उपचार की हिंदी में जानकारी)

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