सरदार पटेल की जीवनी और राष्ट्रीय एकता में सरदार पटेल की भूमिका

सरदार पटेल की जीवनी और राष्ट्रीय एकता में सरदार पटेल की भूमिका

सरदार पटेल की जीवनी और राष्ट्रीय एकता में सरदार पटेल की भूमिका

कैसे एक साधारण मनुष्य लौह पुरुष बना। इसका जवाब इस लेख में आपको जरूर मिलेगा। लोह पुरुष की ऐसी छवि ना देखी ना सोची जिसके आवाज में सिंह सी दहाड़ थी। हृदय में कोमलता की पुकार थी। जो एकता का स्वरूप था। जिसने भारत रचा देश का मानचित्र पल भर में बदला। गरीबों का सरदार था। वह दुश्मनों के लिए लोहा था। वह आंधी की तरह बहता गया। ज्वालामुखी सा धड़कता गया। बनकर गांधी का अहिंसा का शस्त्र महकता गया विश्व में जैसे कोई ब्रह्मास्त्र। इतिहास के गलियारे खोजते हैं। जिसे ऐसे सरदार पटेल अपना मिलते पूरे विश्व में सरदार वल्लभभाई पटेल एक ऐसा नाम जो अभी किसी बुजुर्ग जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को प्रत्यक्ष रूप से देखा था। के जहँ में आता है तो उनका शरीर उर्जा से भर जाता है। (सरदार पटेल की जीवनी और राष्ट्रीय एकता में सरदार पटेल की भूमिका)

लेकिन मन में एक आत्म गलिन उमड़ पड़ती है। क्योंकि उस वक्त का हर एक युवा वल्लभभाई को ही  प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहता था। लेकिन अंग्रेजों की नीति गांधीजी के निर्णय एवं नेहरू जी के हट के कारण यह सपना सच ना हो सका। नमस्कार दोस्तों मै विक्रमादित्य रंजन आपको अपने इस लेख के माध्यम से सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन के उन पहलुओं से रूबरू करवाने जा रहा हु। जिससे आज भी भारत की अधिकांश जनता अनजान है। आगे बढ़ने से पहले मई आप सभी को बताना चाहता हु। अगर आपने हमारा वेबसाइट को सब्सक्राइब नहीं किया हो तो इसे सब्सक्राइब कर ले। ताकि इस तरह के इतिहास से जुड़ी कहानिया आप सभी को प्रतिदिन प्राप्त होती रहे। आइये अब हम सरदार वल्लभभाई पटेल जो लोह पुरुष के रूप में पहचाने जाते हैं। सरदार पटेल की ख्याति किसी शूरवीर से कम नहीं थी। इन्होंने 200 वर्षो की गुलामी में फसे भारत देश के अलग-अलग राज्यों को संगठित कर सम्पूर्ण भारत का निर्माण किया। और उस बड़े कार्य के लिए सरदार पटेल को किसी प्रकार के सैन्य बल की ज़रूरत तक नहीं पड़ी। (सरदार पटेल की जीवनी और राष्ट्रीय एकता में सरदार पटेल की भूमिका)

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यही उनकी सबसे बड़ी ख्याति थी। जो इन्हें सभी से पृथक करती थी। सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 में हुआ था। और इनका मृत्यु 15 दिसंबर 1950 को इनका जन्म स्थान नाडियाड और इनकी मृत्यु मुंबई में हुए थी। इनके पिता का नाम झावर भाई था और उनकी माता का नाम लाड बाई था। इनकी पत्नी जुबेर भाई और उनके भाइयों का नाम सोम भाई विट्ठलभाई और नरसी भाई था। और उनकी बहन का नाम दहीबा था। इनके बेटे का नाम भीमा भाई था। और इनकी बेटी मनिवेन थी। सरदार पटेल का पॉलीटिकल  कर्रिएर कुछ इस प्रकार से है। 1917 में वह बोरसाथ  में एक भाषण के जरिए उन्होंने लोगों को जागृत किया। और गांधीजी का स्वराज में उनकी लड़ाई के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए प्रेरित किया। (सरदार पटेल की जीवनी और राष्ट्रीय एकता में सरदार पटेल की भूमिका)

सरदार पटेल ने खेड़ा आंदोलन में अहम भूमिका निभाई। एवं अकाल और प्लेग से ग्रस्त लोगों की सेवा की। बारडोली सत्याग्रह में इन्होंने लोगों को कर ना देने के लिए प्रेरित किया। और एक बड़ी जीत हासिल की। जहां से इन्हें सरदार की उपाधि मिली। और असहयोग आंदोलन में गांधीजी का साथ दिया। इन्होने पूरे देश में भ्रमण कर लोगो को एकत्र किया। और आंदोलन के लिए धन राशि एकत्र की। और बढ़ चढ़कर भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। और कई बार जेल भी गए। भारत देश की आजादी के बाद देश के गृहमंत्री एवं उप प्रधानमंत्री बने। इस पद पर रहते हुए उन्होंने राज्यों से देशों को मिलाने का कार्य किया। जिससे उन्हें लौह पुरुष की छवि मिली। सरदार वल्लभभाई पटेल का प्रारंभिक जीवन परिचय कुछ इस प्रकार से है। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि परिवार से थे। जिसमें 4 बेटे थे। एक साधारण मनुष्य की तरह इनके जीवन के भी कुछ लक्ष्य थे। यह पढ़ना चाहते थे।

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कुछ बनना चाहते थे। और उस कमाई का कुछ हिस्सा जमा करके इंग्लैंड जाकर अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहते थे। इन सब में इन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। पैसे की कमी घर की जिम्मेदारी इन सभी के बीच में धीरे-धीरे अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ते रहे। शुरुआती दिनों में इन्हें घर के लोग नाकारा समझते थे। उन्हें लगता था यह कुछ नहीं कर सकते। इन्होंने 22 वर्ष की उम्र में मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की। और कई सालों तक घर वालों से दूर रहकर अपनी वकालत की पढ़ाई की। जिसके लिए इन्हें उधार किताबें लेनी पड़ती थी। इस दौरान उन्होंने नौकरी भी की। और परिवार का पालन भी किया। (सरदार पटेल की जीवनी और राष्ट्रीय एकता में सरदार पटेल की भूमिका)

एक साधारण मनुष्य की तरह यह जिंदगी से लड़ते-लड़ते आगे बढ़ते रहे। इस बात से बेखबर की ये भारत देश के लोह पुरुष कहलाने वाले हैं। इनके जीवन की एक विशेष घटना से इनके कर्तव्यनिष्ठा का अनुमान लगाया जा सकता है। यह घटना जब की थी। जब उनकी पत्नी मुंबई के हॉस्पिटल में एडमिट थी। कैंसर से पीड़ित इनकी पत्नी का देहांत हो गया। जिसके बाद उन्होंने दूसरे विवाह के लिए इंकार कर दिया। और अपने बच्चों को सुखद भविष्य देने हेतु मेहनत में लग गए। इंग्लैंड जाकर इन्होंने 36 माह की पढ़ाई को 30 महीने में पूरा किया। उस वक्त इन्होंने कॉलेज में टॉप किया। (सरदार पटेल की जीवनी और राष्ट्रीय एकता में सरदार पटेल की भूमिका)

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इसके बाद वापस स्वदेश लौट कर अहमदाबाद में एक सफल और प्रसिद्ध बैरिस्टर के रूप में कार्य करने लगे। इंग्लैंड से वापस आए थे। इसलिए उनकी चाल ढाल बदल चुकी थी। सूट-बूट युरोपियन स्टाइल में कपड़े पहनने लगे थे। इनका सपना था यह बहुत पैसे कमाए। और अपने बच्चों को एक अच्छा भविष्य दे। लेकिन नियति ने इनका भविष्य तय रखा था। गांधी जी के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने सामाजिक बुराई के खिलाफ अपनी आवाज उठाई। भाषण के जरिए लोगों को एकत्र किया। इस प्रकार रुचि ना होते हुए भी धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति का हिस्सा बन गए। स्वतंत्र संग्राम में वल्लभभाई पटेल का योगदान को किस प्रकार से है। स्थानीय कार्य गुजरात के रहवासी वल्लभभाई ने सबसे पहले अपने स्थानीय क्षेत्रों में शराब छुआछूत एवं नारियों के अत्याचार के खिलाफ लड़ाई की।

इन्होंने हिंदू मुस्लिम एकता को बनाए रखने की पुरजोर कोशिश की। खेड़ा आंदोलन 1917 में गांधी जी ने वल्लभभाई पटेल से कहा कि वे खेड़ा के  किसानों को एकत्र करके और उन्हें अंग्रेजो के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित करें। उन दिनों बस कृषि ही भारत का सबसे बड़ा आय का स्तोत्र थी। लेकिन कृषि हमेशा ही प्रकृति पर निर्भर करती है। 1917 में जब अधिक वर्षा के कारण किसानों की फसल नष्ट हो गई थी। लेकिन फिर भी अंग्रेजी हुकूमत को  विद विद कर देना बाकी था। इस विपदा को देख वल्लभ भाई ने गांधी जी के साथ मिलकर किसानों को कर ना देने के लिए बाध्य किया। (सरदार पटेल की जीवनी और राष्ट्रीय एकता में सरदार पटेल की भूमिका)

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और अंततः अंग्रेजी हुकूमत को हामी भरनी पड़ी। और यह भी सबसे पहली बड़ी जीत थी। जिसे खेड़ा आंदोलन के नाम से याद किया जाता है। इन्होंने गांधीजी के हर आंदोलन में इनका साथ दिया। इन्होंने और उनके पूरे परिवार ने अंग्रेजी कपड़ों का बहिष्कार किया। और खादी को अपनाया था। स्थानीय लड़ाई से देशव्यापी आंदोलन- गांधी जी की अहिंसा की नीति ने उन्हें बहुत ज्यादा प्रभावित किया था। और इनके कार्यों ने गांधी जी पर अच्छी छाप छोड़ दी थी। इसलिए स्वतंत्रता के लिए किए गए सभी आंदोलन जैसे असहयोग आंदोलन स्वराज्य आंदोलन दांडी यात्रा भारत छोड़ो आंदोलन इन सभी में सरदार पटेल की भूमिका अहम थी। (सरदार पटेल की जीवनी और राष्ट्रीय एकता में सरदार पटेल की भूमिका)

अंग्रेजों की आंखों में खटक ने वाले स्वतंत्रता सेनानी थे। सरदार पटेल 1923 में जब गांधी जी जेल में थे। तब इन्होंने नागपुर में सत्याग्रह आंदोलन का नेतृत्व किया। इन्होंने अंग्रेजी सरकार द्वारा राष्ट्रीय ध्वज को बंद करने के खिलाफ आवाज उठाई। जिसके लिए अलग-अलग प्रांतों से लोगों को इकट्ठा कर मोर्चा निकाला गया। इस मोर्चा के कारण अंग्रेजी सरकार को झुकना पड़ा। और उन्होंने कई कैदियों को जेल से रिहा किया। इनके बाप शक्ति ही इनकी सबसे बड़ी ताकत है। जिस कारण उन्होंने देश के लोगों को संगठित किया। इनके प्रभाव के कारण ही एक आवाज पर आवाम इनके साथ ही चलती थी। कैसे मिला सरदार पटेल नाम – इस बुलंद आवाज नेता वल्लभ भाई पटेल ने बारडोली में सत्याग्रह का नेतृत्व किया।(सरदार पटेल की जीवनी और राष्ट्रीय एकता में सरदार पटेल की भूमिका)

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यह सत्याग्रह 1928 में साइमन कमीशन के खिलाफ किया गया था। इसमें सरकार द्वारा बढ़ाए गए कर का विरोध किया गया था। और किसान भाइयों को एक देख ब्रिटिश व्यवसाय को झुकना पड़ा। इस बारडोली सत्याग्रह के कारण पूरे देश में वल्लभभाई पटेल का नाम प्रसिद्ध हुआ। और लोगों में उत्साह की लहर दौड़ पड़ी इस आंदोलन की सफलता के कारण वल्लभ भाई पटेल को बारडोली के लोग सरदार कहने लगे। जिसके बाद सरदार पटेल के नाम से ख्याति मिलने लगी। आजादी के पहले एवं बाद में अहम पद की सूची कुछ इस प्रकार से है। इनकी लोकप्रियता बढ़ती ही जा रही थी। (सरदार पटेल की जीवनी और राष्ट्रीय एकता में सरदार पटेल की भूमिका)

उन्होंने लगातार नगर के चुनाव जीते और 1922 1924 और 1927 में अहमदाबाद के नगर निगम के अध्यक्ष के रूप में चुने गए। 1922 के आसपास के दशक में सरदार पटेल ने गुजरात कांग्रेस को जॉइन किया। 1932 में इन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। कांग्रेस में सभी बहुत पसंद करते थे उस वक्त गांधी जी नेहरू जी एवं सरदार पटेल जी नेशनल कांग्रेस के मुख्य बिंदु थे। आजादी के बाद वे देश के गृहमंत्री एवं उप प्रधानमंत्री चुने गए। (सरदार पटेल की जीवनी और राष्ट्रीय एकता में सरदार पटेल की भूमिका)

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वैसे सरदार पटेल प्रधानमंत्री के प्रथम दावेदार थे। उन्हें कांग्रेस पार्टी के सर्वाधिक वोट मिलने के पूरे आसार थे। लेकिन गाँधी जी के कारण उन्होंने स्वयं को इस दौड़ से दूर रखा। आजादी के बाद सरदार पटेल द्वारा किया गया अहम्  कार्य कुछ इस प्रकार से है 15 अगस्त 1947 के दिन देश आजाद हो गया। इस आजादी के बाद देश की हालत बहुत गंभीर थी। पाकिस्तान के अलग होने से कई लोग बेघर थे। उस वक्त रियासत होती थी। हर एक राज्य एक स्वतंत्र देश की तरह था। जिन्हें भारत में मिलाना बहुत जरूरी था। यह कार्य बहुत कठिन था। कई बर्षो की गुलामी के बाद कोई भी राजा अब किसी भी तरह की अधीनता के लिए तैयार ना था। (सरदार पटेल की जीवनी और राष्ट्रीय एकता में सरदार पटेल की भूमिका)

लेकिन वल्लभभाई पर सभी को यकीन था। उन्होंने ही रियासतों को राष्ट्रीय एकीकरण के लिए बाध्य किया। और बिना किसी युद्ध के रियासतों को देश में मिलाया। जम्मू-कश्मीर हैदराबाद एवं जूनागढ़ के राजा इस समझौते के लिए तैयार ना थे। इनके खिलाफ सैन्य बल का उपयोग करना पड़ा। और आखिरकार यह रियासत भी भारत में आकर मिल गई। इस प्रकार वल्लभ भाई पटेल की कोशिश के कारण बिना रक्त बहे 560 रियासतें भारत में आ मिली। रियासतों को भारत में मिलाने का कार्य नवम्बर  1947 आजादी के महज कुछ महीनों में ही पूरा किया गया। गांधी जी ने कहा कि यह कार्य केवल सरदार पटेल ही कर सकते हैं। (सरदार पटेल की जीवनी और राष्ट्रीय एकता में सरदार पटेल की भूमिका)

इतिहास से लेकर आज तक इन जैसे व्यक्ति पूरे विश्व में नहीं थे। जिसमें बिना हिंसा के देश एकीकरण का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन दिनों इनकी इस सफलता के चर्चे पूरे विश्व के समाचार पत्रों में थी। इनकी तुलना बड़े बड़े महान लोगों से की जाने लगी थी। कहा जाता है अगर पटेल प्रधानमंत्री होते तो आज पाकिस्तान और चीन जैसी समस्या इतना बड़ा रूप नहीं लेती। पटेल की सोच इतनी पारंपरिक थी कि वह पत्र की भाषा पढ़ कर ही सामने वाले के मन के भाव समझ जाते थे। उन्होंने कई बार नेहरु जी को चीन के लिए सतर्क किया। लेकिन नेहरू जी ने इनकी कभी ना सुनी। पटेल एवं नेहरू जी के बीच अंतर- दोनों गांधी विचारधारा से प्रेरित थे।

इसलिए ही शायद एक कमान में थे। वरना तो इन दोनों की सोच में जमीन आसमान का अंतर था। जहां पटेल भूमि पर थे भारत के मिट्टी में रचे बसे साधारण व्यक्तित्व के तेजस्वी व्यक्ति थे। वही नेहरूजी अमीर घरानों के नवाब थे। जमीनी हकीकत से दूर एक ऐसे व्यक्ति जो बस सोचते थे। और वही काम पटेल करके दिखा देते थे। शैक्षणिक योग्यता हो या व्यवहारिक सोच इन सब में पटेल नेहरू जी से काफी आगे थी। वल्लभ भाई पटेल की मृत्यु 1948 में हुई। गांधी जी की मृत्यु के बाद पटेल को इस बात का गहरा आघात पहुंचा। और उन्हें कुछ महीने बाद हार्ट अटैक हुआ। जिससे वह उभर नहीं पाए। और 15 दिसंबर 1950 को इस दुनिया से चले गए। (सरदार पटेल की जीवनी और राष्ट्रीय एकता में सरदार पटेल की भूमिका)

सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय सम्मान-  की सूचि कुछ इस प्रकार से है। 1991 में उन्हें भारत रत्न का सम्मान दिया गया। इन के नाम से कई शैक्षणिक संस्थाएं हैं। हवाई अड्डे को भी इनका नाम दिया गया। स्टेचुए ऑफ़ यूनिटी के नाम से सरदार पटेल को 2013 में उनके जन्मदिन पर गुजरात में उनका स्मृति समारोह बनाने की शुरुआत की गई। यहस्मारक भरूच के पास नम्रता जिले में है। सरदार वल्लभ भाई पटेल के जीवन परिचय से यह बात सामने आती है। कि मनुष्य महान बनकर पैदा नहीं होता है। उनके प्रारंभिक जीवन को जानने के बाद हम कह सकते हैं। कि यह आप और हम जैसे ही एक व्यक्ति थे। जो सोहरत और पैसा और एक सुरक्षित भविष्य की इच्छा रखते थे। (सरदार पटेल की जीवनी और राष्ट्रीय एकता में सरदार पटेल की भूमिका)

लेकिन कर्म के पथ पर आगे बढ़ते बढ़ते बैरिस्टर बल्लभ भाई पटेल सरदार पटेल और लौह पुरुष वल्लभ भाई पटेल बन गए। सरदार वल्लभभाई पटेल ने राष्ट्रीय एकीकरण कर एकता का एक ऐसा स्वरुप दिखाया जिसके बारे में उस वक्त कोई सोच भी नहीं सकता था। उनकी इसी कार्य एवं सोच के कारण उनके जन्मदिवस पर राष्ट्रीय एकता दिवस पर नाम दिया गया। (सरदार पटेल की जीवनी और राष्ट्रीय एकता में सरदार पटेल की भूमिका)

उम्मीद करता हु की आज की दी गई जानकारी आप सभी को पसंद आयी होगी। यदि आप सभी को आज की दी गई जानकारी पसंद आती है तो आप इस लेख को शेयर कर दे ताकि सरदार पटेल की यह कहानी हमेशा याद की जाति रहे। (सरदार पटेल की जीवनी और राष्ट्रीय एकता में सरदार पटेल की भूमिका)

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