वात पित्त कफ के समस्याओ के कारण और इसके उपचार

वात पित्त कफ के समस्याओ के कारण और इसके उपचार

वात पित्त कफ के समस्याओ के कारण और इसके उपचार

आयुर्वेद के विज्ञान में हमेशा से यह कहा जाता है। कि यदि हमारे शरीर के अंदर वात पित्त कफ तीनों का संतुलन बना रहे। तो हमें किसी भी तरह के किसी रोग की समस्या कभी नहीं होती है। मैं आप सभी को इसी विषय पर विस्तार से बताने जा रहा हूं। कि कैसे आप अपने शरीर के अंदर हो रहे इन सब तरह की कठिनाई को संतुलन कर सकते हैं। क्योंकि हमारे शरीर के अंदर वात-पित्त-कफ के जरिए बहुत सारे नए लोग जन्म लेते हैं। (वात पित्त कफ के समस्याओ के कारण और इसके उपचार)

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यदि अपने शरीर के अंदर वात पित्त कफ को संतुलन बनाए रखें तो हम हमेशा स्वस्थ बने रहेंगे। यदि किसी व्यक्ति को हमेशा अपने जीवन में स्वास्थ्य एवं रोग मुक्त बना रहना है। तो उसे अपने जीवन में इन तीनों चीजों का संतुलन बनाए रखना अति आवश्यक है। शरीर के अंदर वात पित्त कफ के संतुलन के बिगड़ने के कारण ही शरीर में सर्दी-खांसी-जुकाम से लेकर कैंसर तक की समस्या पैदा होने लगती है। शुरुआती दौर में वात-पित्त-कफ के असंतुलित होने के कारण सर्दी जुकाम खांसी इत्यादि का होना शुरू हो जाता है।

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लेकिन जब यही संतुलन धीरे-धीरे हमारे शरीर के अंदर बिगड़ती जाती है। तो आगे चलकर यह कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का रूप धारण कर लेती है। आज मैं आप सभी को वात-पित्त-कफ इन तीनों चीजों के संतुलन बनाए रखने की जानकारी विस्तार से दूंगा। सबसे पहले मैं आपको बताना चाहता हूं। कि हमारे शरीर के अंदर पित्त कफ को संतुलित रखने के लिए हमारे खाना खाने के बाद तुरंत पानी का सेवन नहीं करना चाहिए। आपके सरीर क अंदर वात-पित्त-कफ को संतुलन में बनाए रखने का पहला नियम है।(वात पित्त कफ के समस्याओ के कारण और इसके उपचार)

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यदि हम अपने भोजन करने के तुरंत बाद पानी का सेवन करते हैं। तो हमारे शरीर के अंदर वात पित्त कफ तीनो का संतुलन धीरे-धीरे बिगड़ने लगता है। और इस संतुलन के बिगड़ने से शरीर के अंदर नए-नए रोग भी पैदा होने लगते हैं। आयुर्वेद विज्ञान में कहा गया है। कि भोजन के तुरंत बाद पानी पीना हमारे शरीर के अंदर विष निर्माण करने के बराबर है।जब भी हम भोजन का सेवन करते हैं। तो यह हमारे शरीर के अंदर जाकर पेट के नाभि के बगल में एक छोटा से जगह पर इकट्ठा हो जाता है।

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जैसा की आप सभी को पहले से ज्ञात है। कि हमारे द्वारा किए गए भोजन जब हमारे पेट के अंदर एकत्रित होते हैं। तो इसमें एक पाचन क्रिया चलता है। उदाहरण के तौर पे मैं आपको बताना चाहता हूं। कि जब आप अपनी रसोई घर में भोजन का निर्माण करते हैं। तो उस समय जैसे हम अग्नि में जला कर अपने भोजन को पकाते हैं। ऐसे हमारे द्वारा किए गए भोजन हमारे पेट के अंदर अग्नि की तरह जलाए जाते हैं। यदि इसी समय में हम पानी का सेवन करें। तो यह आग के ऊपर पानी डालने के बराबर है। (वात पित्त कफ के समस्याओ के कारण और इसके उपचार)

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जो हमारे शरीर के अंदर गैस खट्टी डकारें का निर्माण करती है। इसी कारण से कहा जाता है। कि जब भी हम भोजन कर रहे हो। तो तुरंत भोजन करने के बाद हमें पानी का सेवन नहीं करना चाहिए। यदि हम अपने भोजन को अपने पेट के अंदर ठीक तरह से पचने नहीं देंगे। और खाना खाने के पश्चात तुरंत पानी का सेवन करेंगे। तो यह हमारे भोजन को हमारे पेट के अंदर ठीक से पचने नहीं देगा। जिस कारण से तरह तरह की परेशानियां हमारे शरीर के अंदर उत्पन्न होने लगती है।

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अब आपके मन में यह प्रश्न आवस्य उठ रहा होगा कि हमें खाना खाने के कितने देर बाद पानी पीना चाहिए। तो मैं आप सभी को बता देना चाहता हूं कि आपके खाना खाने के लगभग 30 से 35 मिनट के बाद आप पानी का सेवन कर सकते हैं। क्योंकि इन समय के बीच में हमारे द्वारा किए गए भोजन हमारे पेट के अंदर पचने का क्रिया करती रहती है। अतः इस समय में पानी का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। नहीं तो हमारे द्वारा किए गए भोजन हमारे पेट के अंदर ठीक से नहीं पच पाते हैं। (वात पित्त कफ के समस्याओ के कारण और इसके उपचार)

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यदि आप खाना खाने के पश्चात कुछ पीना चाहते हैं। तो आप खाना खाने के पश्चात लस्सी सेवन कर सकते हैं। लस्सी के साथ-साथ आप दही से बने मट्ठे का सेवन भी भरपूर मात्रा में कर सकते हैं। फलों के रस का सेवन कर सकते हैं। गन्ने का रस का सेवन कर सकते हैं। संतरे का रस का सेवन कर सकते हैं। मौसम्मी के  जूस का सेवन कर सकते हैं। आप अपने  प्यास बुझाने के लिए अनार चुकंदर इत्यादि का जूस बनाकर भी सेवन कर सकते हैं। नींबू का रस भी हम शिकंजी बनाकर सेवन कर सकते हैं।

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खाने के तत्पश्चात हम दूध का भी सेवन कर सकते हैं। लेकिन हमें खाना खाने के तुरंत बाद पानी का सेवन नहीं करना है। यदि हम खाना खाने के तुरंत बाद पानी का सेवन करते हैं। तो हमारे शरीर के अंदर पाचन क्रिया में तरह तरह की परेशानियां उत्पन्न होने लगती है। वात पित्त कफ को अपने शरीर से दूर रखने के लिए हमें सुबह के नाश्ते में फलों का रस पीना अति आवश्यक है। यदि हम सुबह नाश्ते के समय फलों का रस का सेवन करते हैं। (वात पित्त कफ के समस्याओ के कारण और इसके उपचार)

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तो ना केवल यह हमारे शरीर के अंदर वात-पित्त-कफ इत्यादि जैसे परेशानियों को दूर रखता है बल्कि इसके साथ-साथ यह हमारे शरीर के अन्य परेशानियों को भी दूर रखने में हमारी मदद करता है। दोपहर के खाना खाने के बाद हम दही से बने मट्ठे का सेवन कर सकते हैं। दही से बने मट्ठे का सेवन करने से हमारे शरीर में ऊर्जा काफी मात्रा में प्राप्त होती है। हमें रात के खाना खाने के बाद दूध का सेवन कर सकते हैं। रात में खाना खाने के बाद दूध के सेवन करने से हमारे शरीर के अंदर अधिक से अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

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और यह हमारे दैनिक जीवन में जरूरी भी माना गया है। हमें  रात में खाना खाने के बाद कम से कम एक गिलास गाय का दूध का सेवन अवश्य करें। अब मैं आपको वात पित्त कफ से छुटकारा पाने के दूसरे उपाय के बारे में विस्तार से बताता हूं। जयादातर लोगो में देखा जाता है कि वह पानी को एक ही बार में घटा घट घटा घट पीने लगते हैं। शरीर के लिए बहुत ज्यादा दुष्प्रभाव उत्पन्न करता है। हमें हमेशा अपने द्वारा पिए जाने वाले पानी को छोटी छोटी घुट में पीना चाहिए। जैसे हम चाय और कॉफी का सेवन करते हैं। (वात पित्त कफ के समस्याओ के कारण और इसके उपचार)

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तो आइए हम जानते हैं। कि ऐसा छोटी-छोटी घुटने पानी पीने के लिए हमें क्यों कहा जाता है। जब भी हम पानी का सेवन करते हैं। तो पानी की एक घूंट के साथ हमारे मुंह के अंदर बने लार पानी के साथ हमारे शरीर के अंदर जाते हैं। जो शरीर के अंदर बहुत ज्यादा फायदेमंद साबित होते हैं। यदि हम एक गिलास पानी को एक बार में पी लेते हैं। तो पानी के साथ हमारे शरीर के अंदर लार जयादा मात्रा में नहीं पहुंचा पाता है। जिससे हमें शक्ति मिले। इसलिए कहा जाता है। कि हमें पानी की छोटी-छोटी घुटो के साथ सेवन करना चाहिए।

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जिससे हमारे मुंह के अंदर बने लार पानी के साथ हमारे शरीर के अंदर तक पहुंच पाए। यदि हम छोटे-छोटे घुट के साथ पानी के सेवन करते हैं। तो इसके साथ मुँह के लार हमारे पेट के अंदर जाती है। तो यह हमारे शरीर के अंदर एसिडिटी की समस्या को दूर रखती है। साथ ही साथ इससे हमारे रक्त में अम्लता की मात्रा ज्यादा नहीं बढ़ पाती है। यदि हमारे शरीर के अंदर अम्ल की मात्रा ज्यादा नहीं बढे तो हमारे जिंदगी में कभी भी वात पित्त कफ के असंतुलन की समस्यापैदा नहीं होगी। (वात पित्त कफ के समस्याओ के कारण और इसके उपचार)

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यदि आपको ठंडे पानी पीने की आदत है। तो आपको ठंडे पानी पीने की लत से भी बचना चाहिए। क्योंकि हम सभी को पता है। कि हमारे शरीर के अंदर पेट में गर्मी रहती है। और यदि हम ठंडे पानी का सेवन करते हैं। तो यह हमारे शरीर के अंदर जाकर अचानक से हमें ठंड प्रदान करती है। जो हमारे शरीर के लिए बहुत ज्यादा घातक साबित होती है। तो आइए हम अगले नियम के बारे में विस्तार से जानते हैं। कि जब भी हम सुबह सो कर उठते हैं।

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तो हमें पानी का सेवन अवश्य करना चाहिए। सुबह उठकर पानी के सेवन करने से हमारे शरीर के अंदर उपस्थित बड़ी आंतों की सफाई हो जाती है। साथ ही साथ हमें बाथरूम करने में ज्यादा परेशानी नहीं होती है। यदि सुबह सुबह हम सो कर उठने के बाद और बाथरूम जाने से पहले दो से तीन गिलास पानी का सेवन करते हैं। तो यह हमारे पेट को साफ करने में हमारी मदद करता है। अतः हमें कोशिश करना चाहिए कि जब भी हम सुबह सोकर उठे तो बाथरूम जाने से पहले दो तीन गिलास पानी का सेवन आवस्य करें। (वात पित्त कफ के समस्याओ के कारण और इसके उपचार)

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यदि आप हमारे जानकारी से संतुस्ट है। तो आप इस जानकारी को अपने दोस्त परिवार वालों के साथ अवश्य शेयर कर दे। ताकि आजकल के समय में उत्पन्न हो रही वात पित्त कफ की समस्याओं को घरेलू नुस्खों के साथ और कुछ परहेज के साथ आसानी से दूर किया जा सके। यदि आप वात पित्त कफ के संदर्भ में कुछ कमेंट करना चाहते हैं। तो आपको इस पोस्ट के नीचे कमेंट का विकल्प आसानी से प्राप्त हो जाएगा। यदि आप हमें मैसेज करना चाहते हैं। (वात पित्त कफ के समस्याओ के कारण और इसके उपचार)

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