भारत रत्न से सम्मानित डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय

भारत रत्न से सम्मानित डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय

भारत रत्न से सम्मानित डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय

इंसान को गुलाम बनाने की प्रक्रिया पुराने समय से ही चलती आ रही है। लेकिन गुलाम को इंसान बनाने वाले लोगों की संख्या बहुत ही कम मात्रा है। आज मैं एक ऐसे इंसान के बारे में विस्तार से बताने जा रहा हूं। जिन्होंने गुलाम के जिंदगी जीने वाले उन सभी इंसानो को इंसान की जिंदगी जीने की तालीम दी थी। तो आइए आज हम जानते हैं। भारत के एक ऐसे महापुरुष के बारे में जिन्होंने ना केवल भारत में बने गुलाम को एक अच्छी जिंदगी जीने की तालीम दी। बल्कि इन के साथ इन्होंने गुलाम की हक की लड़ाई भी लड़ी थी। आज मैं आप सभी के साथ बात करने जा रहा हूं। समानता के प्रतिक एक ऐसे महापुरुष की जिन्होंने भारत के संविधान का भी निर्माण किया था। (भारत रत्न से सम्मानित डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय)

तो आइए हम जानते हैं। भारत के महापुरुष भारत रत्न डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के बारे में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने भारत देश के लिए संविधान का निर्माण किया था। साथ ही साथ भारत में उन सभी लोगों को समानता का अधिकार भी दिलाया था। जिन्हें भारत देश में गुलाम की जिंदगी जीने के लिए मजबूर किया जा रहा था। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर समाज में चल रहे कुरूतियो को जड़ से खत्म करने का आंदोलन भी जारी किया था। और अंततोगत्वा बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर काम को पूरी तरह से संपन्न भी किया। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने समाज के चल रहे उन सभी कुरीतियों को जड़ से खत्म किया।

जिसके कारण समाज में नीचे तबके के लोगो को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का कहना था। मैं एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहता हूं। जिसमें सभी तबके के लोगों को एक नजर से देखा जाए। भारत के सभी लोगों को समानता का अधिकार मिले। यह सोच रखने वाले बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने अपने जीवन में बहुत तरह की परेशानियों का सामना किया। लेकिन कभी भी वह अपने जीवन में आने वाले कठिनाइयों से हार नहीं माने। और अपनी लड़ाई हमेशा समानता के अधिकार के लिए जारी रखा। डॉ भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के इंदौर जिले भारत देश में हुआ था। (भारत रत्न से सम्मानित डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय)

डॉ भीमराव अंबेडकर के पिता का नाम रामजी सकपाल था। जो भारतीय सेना में कार्यरत थे। डॉ भीमराव अंबेडकर के पिता रामजी सकपाल भारत देश के लिए पूर्ण रूप से समर्पित थे। डॉ भीमराव अंबेडकर के पिता राम जी सकपाल अपने अच्छे कार्य किए जाने के कारण भारतीय सेना में एक सेना के पोस्ट से सूबेदार के पोस्ट तक पहुंच चुके थे। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के माता का नाम भीमाबाई था। और डॉ भीमराव अंबेडकर की माता एक कुशल गृहिणी थी। साथ ही साथ डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की माता का भगवान के पूजा पाठ में ज्यादा ध्यान लगाया करती थी। इसीलिए अपने घर के आस-पास ज्यादातर भगवान के पूजा पाठ में अपना समय व्यतीत किया करती थी।

डॉ भीमराव अंबेडकर के पिता सेना में थे। इसी कारण से वह अपने पुत्र डॉ भीमराव अंबेडकर को ज्यादा समय नहीं दे पाते थे। लेकिन डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की माता एक कुशल गृहिणी होने के साथ-साथ अपने पुत्र का अच्छे से पालन पोषण करती थी। और अपने पुत्र डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को शुरुआत से ही कड़ी मेहनत के लिए प्रोत्साहित करती रहती थी। इसी कारण से डॉ भीमराव अंबेडकर के पढ़ाई लिखाई करने का शौक बचपन से ही था। लेकिन जाति में छोटे जाति से ताल्लुक रखने के कारण डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को अपने जीवन में बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। डॉ भीमराव अंबेडकर एक महार जाति से ताल्लुक रखते थे। (भारत रत्न से सम्मानित डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय)

जो कि समाज में उस समय के सबसे छोटे जाति में माना जाता था। और डॉक्टर भीमराव को अछूत माना जाता था। अछूत का मतलब नीची जाति के लोग होते थे। जिन्हे समाज में किसे तरह का सुविधा का लाभ नहीं मिलता था। ऊंची जाति के लोगों के किसी काम में दखल अंदाजी अथवा किसी वस्तु को छूने की इजाजत नहीं थी। यदि अछूत जाति के लोग ऊंची जाति के लोगों के किसी वस्तु को छू लेता था। तो उसे अछूत मान लिया जाता था। अर्थात अपवित्र मान लिया जाता था। ऊंची जाति के लोग अछूत जाती के किसी बस्तु के छू देने के बाद उस वस्तु का उपयोग अपने जीवन में नहीं करते थे।

उनका मानना था कि जिस चीज को अछूत जाति के लोगों ने छू दिया। वह अपवित्र हो जाता था। आप लोगों को यह जानकर बड़ी हैरानी होगी। कि यह छुआछूत और ऊंची नीची जाति का सोच इतना ज्यादा खतरनाक था। कि नीची जाति के बच्चे विद्यालय पढ़ने भी नहीं जा सकते थे। लेकिन डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के जीवन में इन सभी तरह के परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा। क्योंकि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के पिता सेना में काम करते थे। और उसी समय सरकार ने सेना में काम कर रहे उन सभी लोगों के बच्चों के लिए एक विशेष तौर पर स्कूल चलाया। जिसकी वजह से डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की शुरुआती पढ़ाई लिखाई संभव हो सका। (भारत रत्न से सम्मानित डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय)

लेकिन सरकार के द्वारा चलाए गए यह विशेष तरीके के स्कूल में भी बहुत तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ता था। कहा जाता है कि स्कूल में ऊंची जाति के बच्चों के पढ़ाई लिखाई के लिए अच्छे प्रकार से सुख सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती थी। लेकिन जो छोटे तबके के लोग थे। जिन्हें अछूत माना जाता था। उनके साथ क्लास में दुर्व्यवहार किया जाता था। साथ ही साथ उन्हें क्लास के किसी कोने में बैठा दिया जाता था। और शिक्षकगण भी उन पर किसी भी तरह के पढ़ाई लिखाई के बारे में सोचा नहीं करते थे। आश्चर्य तो तब होता है। जब एक ही स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को एक साथ पानी पीने की भी इजाजत नहीं होती थी।

ऊंची जाति के लोगों को पानी पीने के लिए आराम से किसी भी नल पर जाकर पानी पीने का इजाजत था। लेकिन छोटी जाति के लोगों अर्थात अछूत बच्चों के लिए नल पर जाकर पानी पीने के भी इजाजत नहीं हुआ करता था। यदि किसी बच्चे को प्यास लगती थी। तो उसे उस विद्यालय के चपरासी का इंतजार करना होता था। जब चपरासी नहीं आते थे। तो अछूत बच्चे को प्यासा ही रहना पड़ता था। कभी अगर चपरासी टाइम से आ भी जाए तो उसे अलग से पानी उनके हाथों पर डाला जाता था। इस तरह से अपनी प्यास बुझाने में संभव हो पाते थे। आप सोच सकते हैं। इस तरह के दिक्कतों में कौन सा अछूत बच्चा विद्यालय जाना पसंद करेगा। (भारत रत्न से सम्मानित डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय)

अगर किसी कारणवश बच्चा स्कूल पहुंच भी गया तो क्या वह पढ़ाई करने में संभव हो पाएगा। क्या वह इस तरह की ऊंच-नीच भावना में खुद को ढाल पाएगा। यह बहुत ही असंभव प्रतीत होता है। 1894 ईसवी में रामजी सकपाल सेना से रिटायर हो चुके थे। रिटायर होने के बाद रामजी सकपाल अपने पूरे परिवार के साथ महाराष्ट्र के सतारा नामक जगह पर आ कर अपना जीवन व्यतीत करने लगे। लेकिन दुख की घड़ी तो तब आई जब सातारा आने के बाद 2 साल तक यहां रहने के बाद डॉ भीमराव अंबेडकर की माता की मृत्यु हो गई।

माता की मृत्यु होने के बाद डॉक्टर भीमराव अंबेडकर बहुत दुखी हुए। क्योंकि हमेशा से वह अपने माता के साथ रहा करते थे। इसी कारण से डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को अपने माता के प्रति कुछ ज्यादा ही लगाव हो गया था। अचानक से माता के देहांत होने के बाद डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के मन में बहुत पीड़ा हुई। डॉ भीमराव अंबेडकर के माता के देहांत होने के बाद डॉक्टर भीमराव अंबेडकर अपनी बुआ मीराबाई के यहां चले गए। हालांकि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की बुआ मीराबाई की भी हालत कुछ ज्यादा सही नहीं थी। (भारत रत्न से सम्मानित डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय)

लेकिन कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए भी डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की बुआ मीराबाई में भीमराव अंबेडकर का पालन पोषण शुरू कर दिया। रामजी सकपाल और भीमाबाई के कुल मिलाकर 14 बच्चे थे। जिसमें से 3 बेटे और तीन बेटी ही जीवित बच पाए। जिनका नाम बलराम आनंदराव और भीमराव और तीन बेटियां मंजुला गंगा और तुलसा था। अपने सभी भाइयों एवं बहनों में केवल डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ही ऐसे थे। जो समाज की ताना और कुरीतियों को अनदेखा करने के बाद अपनी पढ़ाई को जारी रख सके। इस तरह से डॉ भीमराव अंबेडकर 1897 ईस्वी में मुंबई के एलफिंस्टन हाई स्कूल में दाखिला लिया। (भारत रत्न से सम्मानित डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय)

और इस तरह से अछूत जाति के सबसे पहले छात्र एलफिस्टन हाईस्कूल के बन गए। 1907 ईस्वी में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने अपने स्कूल के परीक्षा को अच्छी तरह सफलतापूर्वक पास कर लिया। साथ ही साथ इनके पास हो जाने के बाद इनके जाति में एक खुशी की लहर दौड़ गई। इनके जाति के लोग बहुत खुश हुए। क्योंकि उस समय में हाईस्कूल की परीक्षा पास कर लेना एक बहुत बड़ा सफलता माना जाता था। इस सफलता के बाद डॉक्टर भीमराव अंबेडकर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखें। और अपनी पढ़ाई को जारी रखा। इसी कारण से 1912 ईस्वी में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने इकोनॉमिक्स और पॉलिटिकल साइंस में अपनी उच्चतम डिग्री प्राप्त की।

और फिर 1913 में इन्हें अच्छे पढ़ाई-लिखाई करने के कारण डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को स्कॉलरशिप प्राप्त होना शुरू हो गया। स्कॉलरशिप प्राप्त होने के कारण डॉक्टर भीमराव अंबेडकर अमेरिका चले गए। अमेरिका जाने के बाद डॉक्टर भीमराव अंबेडकर कोलंबिया यूनिवर्सिटी में 1915 में M.A की डिग्री प्राप्त की। M.A की डिग्री प्राप्त करने के 1 साल बाद ही 1916 में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को PHD रिसर्च करने के कारण सम्मानित भी किया गया था। डॉक्टरेट की डिग्री लेकर 1916 डॉक्टर भीमराव अंबेडकर लंदन चले गए। वहां उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में कानूनी पढ़ाई करना शुरू कर दिया। आप सभी लोग को यह जान के बहुत आस्चर्य होगा। की कैसे डॉक्टर भीमराव अंबेडकर अपने जीवन में इस तरह के संघर्षों का सामना करते हुए अमेरिका और लंदन में पढ़ाई करने में सफल साबित हो रहे थे। (भारत रत्न से सम्मानित डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय)

यह बड़े ही गर्व की बात है। क्योंकि हम जानते हैं। यदि हम अपने जीवन में संघर्ष को पूरा करने के लिए कठिन परिश्रम करना शुरू कर देते हैं। तो संघर्ष हमारे लिए आसान हो जाता है। और कठिन से कठिन काम आसानी से कर लेते हैं। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर लंदन में अपने कानून की पढ़ाई के साथ-साथ अर्थशास्त्र में भी डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की। लेकिन स्कॉलरशिप खत्म हो जाने के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई को बीच में मजबूरी बस छोड़ना पड़ा। अपनी पढ़ाई को छोड़ कर वह वापस भारत लौट आए। और भारत में आकर उन्होंने कई जगहों पर कलर्क और अकाउंटेंट जैसी छोटी-छोटी नौकरियां भी की। लेकिन 1920 में फिर से डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के जीवन में एक ऐसा समय आया। जब उन्होंने अपने पास बचे पैसे और अपने दोस्तों से कुछ पैसे लेकर वापस इंग्लैंड चले गए।

और 1923 में उन्होंने अपने बाकी रिसर्च को पूरा किया। और साथ ही साथ लंदन यूनिवर्सिटी द्वारा डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि भी प्राप्त किए। इसके बाद डॉक्टर भीमराव अंबेडकर फिर से वापस भारत आ गए। और अपने बाकी जीवन को भारत के समाज सेवा के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर भारत के स्वतंत्रता के कई सारे अभियानों में शामिल हुए। दलितों के सामाजिक आजादी के लिए कई तरह के संघर्ष किए। और साथ ही साथ स्वतंत्र राष्ट्र बनाने के लिए उन्होंने अपने द्वारा बहुत सारी किताबों को भी लिखा। जिससे भारत के लोगों पर एक जोश छा गया था। (भारत रत्न से सम्मानित डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय)

अपने जीवन में अपार सफलता हासिल करने के बाद 1926 ईस्वी में डॉ भीमराव अंबेडकर को मुंबई के विधानसभा परिषद का सदस्य भी बनाया गया। साथ ही साथ 13 अक्टूबर 1935 में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को सरकारी लॉ कॉलेज का प्रिंसिपल बना दिया गया था। इस पोस्ट पर डॉ भीमराव अंबेडकर लगातार 2 सालों तक काम करते रहे। और 1936 में डॉ भीमराव अंबेडकर ने स्वतंत्र लेबर पार्टी की स्थापना की। 1937 में केंद्रीय विधानसभा में 15 सीटों से जीत गई थी। 1941 से 1945 के बीच डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने बहुत सारी विवाद किताबों का भी प्रकाशन किया। जिसमें से एक किताब पाकिस्तान के बारे में भी शामिल था। इस किताब के अनुसार डॉक्टर भीमराव अंबेडकर मुसलमानों के लिए एक अलग देश पाकिस्तान बनाने की मांग कर रहे उन सभी भारत देश के नेताओं का जमकर विरोध किया था।

डॉ भीमराव अंबेडकर का भारत के प्रति अटूट श्रद्धा के कारण वह कभी नहीं चाहते थे। कि भारत देश का बंटवारा हो। इसी कारण से उन्होंने अपने किताबों के माध्यम से उन सभी नेताओं का जमकर विरोध किया। जो भारत और पाकिस्तान को अलग करना चाहते थे। 15 अगस्त 1947 के बाद डॉक्टर भीमराव अंबेडकर स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री बने। और भारत देश के बिगड़ती हुई हालत को देखकर उन्होंने भारत के लिए कई सारे ठोस कानून बनाए। डॉ भीमराव अंबेडकर ने 26 जनवरी 1950 को अपनी लिखी संविधान को लागू करवाया। (भारत रत्न से सम्मानित डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय)

डॉ भीमराव अंबेडकर ने भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना भी करवाई। लेकिन काफी लंबे समय से डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का सेहत बिगड़ता जा रहा था। लेकिन डॉक्टर भीमराव अंबेडकर अपने सेहत के प्रति थोड़े से भी सजग नहीं थे। इसी कारण से दिन-प्रतिदिन डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का सेहत गिरता चला गया। और आखिरकार 6 दिसंबर 1956 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। हालांकि 6 दिसंबर 1956 को डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने दुनिया को अलविदा कह दिया था।

लेकिन डॉ भीमराव अंबेडकर के द्वारा दिए गए कानून भारत देश के सभी लोग हमेशा अपने जीवन में याद रखेंगे। डॉ भीमराव अंबेडकर ने समाज की सोच को बहुत हद तक बदल दिया। और गरीब दलित और महिलाओं को उनका हक दिलवाया। हमारे भारत देश के लिए डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने बहुत कुछ किया। जिसे हम अपने शब्दों में बयां नहीं कर सकते हैं।

यदि आप सभी को हमारे द्वारा दिए गए डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के जीवन के इस जानकारी को पसंद करते हैं। तो आप अपने दोस्तों और परिवार के बीच अवश्य शेयर कर दें। ताकि उन सभी लोगों को यह पता चल सके कि एक अछूत बालक कैसे अपने जीवन में इतनी बड़ी सफलता को प्राप्त किया। यदि आप डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के जीवन के बारे में कुछ प्रश्न पूछना चाहते हैं। तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं। कमेंट करने का विकल्प आपको इस पोस्ट के नीचे आसानी से प्राप्त हो जाएगा। यदि आप हमसे किसी खास मुद्दे पर बातचीत करना चाहते हैं। तो आप हमें कमेंट ईमेल और मैसेज के जरिए बता सकते हैं। (भारत रत्न से सम्मानित डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय)

यदि आप डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के जीवन में किसी अन्य जानकारी को रखते हैं। और आप हमारे साथ उस जानकारी को शेयर करना चाहते हैं। तो आप ईमेल के जरिए मैसेज के जरिए और कमेंट के जरिए हमारे साथ उन सभी जानकारियों को शेयर कर सकते हैं। यदि आपके द्वारा दिया गया जानकारी सत्य साबित होता है। तो हम आपके द्वारा दिए गए जानकारी को अपने वेबसाइट पर आपके नाम के साथ अवश्य संलग्न करेंगे। यदि आप हमसे मैसेज के जरिए बात करना चाहते हैं। तो आप हमारे वेबसाइट पर जाकर WhatsApp के जरिए मैसेज कर सकते हैं। (भारत रत्न से सम्मानित डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय)

2 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *