भारत देश के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी

भारत देश के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी

भारत देश के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी

आज मैं आप सभी को बताने जा रहा हूं। भारत के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जिन्होंने अपनी 32 साल के कम आयु में ही गणित के क्षेत्र में बहुत सारी अद्वितीय खोज किए। आप सभी को यह बात जानकर बहुत हैरानी होगी कि इतने बड़े महान गणितज्ञ जिन्होंने ना जाने दुनिया में कितनी सारी खोजे की उन्होंने कोई विशेष रूप से पढ़ाई नहीं की थी। यह श्रीनिवास रामानुजन का खुद के कठिन परिश्रम का ही फल था। श्रीनिवास रामानुजन खुद की मेहनत से यह मुकाम हासिल किया। इन्होंने अपनी पूरी जिंदगी गरीबी में बिता दिया। यह बचपन से लेकर जवानी तक की पूरी जिंदगी गरीबी से जूझते रहे। (भारत देश के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी)

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आप सब को यह जानकर बड़ी हैरानी होगी कि यह अपने स्कूल में आयोजित परीक्षा में भी फेल हो गए थे। जिसके कारण स्कूल के द्वारा मिल रहे स्कॉलरशिप भी मिलना बंद हो गया था। इसी कारण से इन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ गई थी। इन्हें अपनी जिंदगी में बहुत सारी तकलीफों का सामना करना पड़ा। यहां तक कि इन्हें नौकरी के लिए भी दर-ब-दर भटकना पड़ा। लेकिन इन्हें भगवान में बहुत ही अटूट विश्वास होने के कारण और गणित में इनकी हमेशा से लगन होने के कारण इनको हमेशा प्रेरणा मिलती रहे। तकलीफो का सामना करने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। (भारत देश के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी)

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आप श्रीनिवास रामानुजन के गणित के प्रति कितना लगाव था। आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं। जब इनकी आयु महज 11 वर्ष की थी। इसी उम्र में उन्होंने कॉलेज के गणित को बनाना शुरु कर दिया था। यह सुनकर बड़े आश्चर्य लगता है। कि कोई एक 11 वर्ष का बालक एक कॉलेज के गणित को बड़े आसानी से बना लेता था। 13 साल की उम्र तक इन्होंने एडवांस ट्रिग्नोमेट्री को पूरी तरह से खत्म कर दिया था। कहने का तात्पर्य यह है। कि इस उम्र में एडवांस ट्रिग्नोमेट्री को पूरी तरह से बना लिया था। 32 साल की छोटी उम्र में इस महान गणितज्ञ को पूरे सम्मान के साथ इनके जन्मदिन मनाया जाता है। (भारत देश के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी)

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इस दिन को मैथमेटिक्स डे के रूप में लोग जानते हैं। तो आइए मैं आज आप सभी को श्रीनिवास रामानुजन की जीवन के बारे में उन पहलुओं को विस्तार से बताता हूं। जिसे आज पूरी दुनिया अनजान है। यदि आप श्रीनिवास रामानुजन के बारे में नहीं जानते हैं। आप सभी को यह बताना चाहता हूं अभी के समय में चल रहे सीबीएसई पैटर्न के गणित के किताब के सबसे पहले पृष्ठ पर आपने एक तस्वीर अवश्य देखी होगी। इस तस्वीर में मौजूद इंसान कोई और नहीं श्रीनिवास रामानुजन जी ही हैं। श्रीनिवास रामानुजन की तस्वीर सीबीएसई पैटर्न के चल रहे बुक के सबसे पहले पृष्ठ पर लगाई जाती है। (भारत देश के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी)

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श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर 1887 को भारत के तमिलनाडु राज्य के एक गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम के श्रीनिवास अयंगर था। श्रीनिवास रामानुजन के पिता एक साड़ी के दुकान में काम करते थे। श्रीनिवास रामानुजन की माता का नाम कोमल था। जो एक हाउसवाइफ थी। श्रीनिवास रामानुजन की माता कामकाज करने के साथ-साथ मंदिरों में भजन गाने का काम भी किया करती थी। श्रीनिवास रामानुजन का बचपन ज्यादातर कुंभकोणम नाम के जगह पर बीता जो की पुरानी मंदिरों के लिए आज भी बहुत प्रसिद्ध माना जाता है। आज भी श्रीनिवास रामानुजन के घर को वहां के म्यूजियम में देखा जा सकता है। (भारत देश के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी)

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आप लोगों को यह बात जानकर बड़ी हैरानी होगी। कि दुनिया के इतने बड़े गणितज्ञ बचपन में पढ़ाई लिखाई में बहुत सामान्य थे। कहा जाता है। कि बचपन में श्रीनिवास रामानुजन का बौद्धिक विकास ज्यादा नहीं हो पाया था। जहां बच्चे 1 से 2 साल की उम्र में ही बोलने लगते हैं। वहीं रामानुजन ने 3 सालों तक कुछ नहीं बोला था। इस बात को लेकर श्रीनिवास रामानुजन के माता-पिता बहुत चिंतित रहने लगे। श्रीनिवास रामानुजन के माता-पिता ने श्रीनिवास रामानुजन के अलावा और भी 2 बच्चों को जन्म दिया था। लेकिन किसी कारणवश उनकी मृत्यु बचपन में ही हो गई थी। अक्टूबर 1894 में रामानुजम का एडमिशन स्कूल में करवाया गया। (भारत देश के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी)

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श्रीनिवास रामानुजम को पढ़ाई का शौक बचपन से ही था। लेकिन अन्य विषयों में रुचि के अपेक्षा श्रीनिवास रामानुजन की रूचि गणित में ज्यादा थी। श्रीनिवास रामानुजन बचपन की उम्र में प्राइमरी स्कूल की परीक्षा दी और पूरे जिले में सबसे ज्यादा नंबर लाने वाले छात्र बने। स्कूल में सबसे ज्यादा नंबर प्राप्त करने के बाद इन्होंने आगे की पढ़ाई टाउन हायर सेकेंडरी स्कूल में किया। कहा जाता है। कि श्रीनिवास रामानुजन हमेशा अपने विद्यालय में अजीबो गरीब चीजों के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहते थे। उदाहरण के तौर पर श्रीनिवास रामानुजन अपने विद्यालय में हमेशा इन तरह की चीजों का खोज किया करते थे। इस संसार में पहला पुरुष कौन था। (भारत देश के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी)

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पृथ्वी और बादल की बीच की कितनी दूरी होती है। इस तरह की अन्य सवालों में वह हमेशा उलझे रहते थे। इसी कारण से कई बार इन्हें अपने विद्यालयों के शिक्षकों द्वारा डांट भी पड़ती थी। लेकिन श्रीनिवास रामानुजम का स्वभाव इतना प्यारा था। कि कोई भी उनसे ज्यादा देर तक नाराज नहीं रह सकता था। इसी कारण बहुत अल्प समय में ही श्रीनिवास रामानुजन की पढ़ाई में रुचि उनके विद्यालय में सभी शिक्षकों को दिखाई देने लगा। जैसा की मैंने आप सभी को पहले भी बताया है। कि श्रीनिवास रामानुजम को गणित के विषय में कुछ ज्यादा ही रूचि  हुआ करती थी। (भारत देश के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी)

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और बचपन की उम्र में ही उन्होंने कॉलेज के गणित को बनाना शुरु कर दिया था। एक समय ऐसा भी आया कि श्रीनिवास रामानुजन के स्कूल के प्रिंसिपल ने विद्यालय में हो रहे परीक्षा के पेपर को रामानुजन के ऊपर लागू होने से मना कर दिया। उन्होंने यह कहा कि श्रीनिवास रामानुजन के लिए अलग से परीक्षा पेपर को तैयार किया जाए। क्योंकि श्रीनिवास रामानुजन परीक्षा पेपर को आसानी से हल कर दिया करते थे। हाई स्कूल में भी अच्छे नंबर से पास होने की वजह से श्रीनिवास रामानुजन को सुब्रमण्यम स्कॉलरशिप मिली। जिससे उनके आगे की पढ़ाई करना आसान साबित होने लगा। (भारत देश के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी)

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लेकिन आगे चल के श्रीनिवास रामानुजन के सामने एक बहुत बड़ी परेशानी आ खड़ी हुई। रामानुजन गणित में इतना ज्यादा समय देने लगे कि उनके अन्य विषयों में बहुत कमजोर हो रहे थे। और नतीजा यह हुआ कि एक 11वीं की परीक्षा में गणित को छोड़कर श्रीनिवास रामानुजन बाकी सभी विषयो में फेल हो गए। इस कारण से उन्हें सुब्रमण्यम स्कॉलरशिप मिलनी भी बंद हो गई। जैसा की मैंने आप सभी को पहले भी बताया है। कि श्रीनिवास रामानुजन के घर की हालत सही नहीं थी। आर्थिक स्थिति के खराब होने के कारण घर से कोई मदद नहीं ले सकते थे। (भारत देश के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी)

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दूसरी तरफ इन्हें स्कॉलरशिप बंद हो चुकी थी। श्रीनिवास रामानुजन के लिए यह बहुत ही कठिन समय था। श्रीनिवास रामानुजन अपने घर की आर्थिक स्थिति को सही करने के लिए गणित पढ़ना शुरू कर दिया। वह घूम-घूमकर जगह-जगह बच्चों को पढ़ा कर अपने जीवन को चलाने लगे। और इसी तरह 1964 में श्रीनिवास रामानुजन ने 12वीं क्लास का एग्जाम दिया। लेकिन सिर्फ गणित को छोड़ कर यहां भी वह अन्य सभी विषयों में फेल हो गए। इसके बाद श्रीनिवास रामानुजन ने स्कूल जाना ही छोड़ दिया। (भारत देश के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी)

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स्कूल छोड़ने के बाद अगले 5 साल का समय श्रीनिवास रामानुजन के लिए बहुत कठिनता भरा रहा। ऐसे समय में ना श्रीनिवास उनके पास कोई नौकरी थी। और ना ही कोई ढंग का करने के लिए काम। पैसे ना होने के कारण श्रीनिवास रामानुजम अपने गणित में भी किसी भी तरह का एक्सपेरिमेंट नहीं कर पा रहे थे। लेकिन कहा जाता है। कि श्रीनिवास रामानुजम को भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा थी। और अपने गणित के अच्छी लगन। इन दो चीजों ने इन्हें कभी रुकने नहीं दिया। और इतनी कठिन और विपरीत परिस्थितियों में भी इन्होंने अकेला ही अपना रिसर्च जारी रखा।

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1908 में रामानुजन के माता-पिता ने उनकी शादी जानकी नाम की एक लड़की से कर दी। शादी के बाद अपनी पत्नी की भी देखभाल रामानुजन पर आ गए। अब श्रीनिवास रामानुजन ने नौकरी की तलाश करनी शुरू कर दी। लेकिन 12वीं की परीक्षा पास ना होने की वजह से श्रीनिवास रामानुजन को कहीं भी नौकरी नहीं मिल रही थी। नौकरी खोजने के दौरान ही श्रीनिवास रामानुजन की तबीयत भी बहुत बिगड़ गई। जिसके कारण उन्हें वापस घर लौटना पड़ा। (भारत देश के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी)

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तबीयत ठीक होने के बाद श्रीनिवास रामानुजन वापस मद्रास आए और फिर से नौकरी की तलाश शुरू कर दी। दोबारा श्रीनिवास रामानुजन मद्रास आए उस समय के डिप्टी कलेक्टर श्री जी रामास्वामी भी एक बहुत बड़े गणितज्ञ थे। और गणित में अच्छी मित्रता रखने के कारण उनका ध्यान श्रीनिवास रामानुजन की प्रतिभा की ओर भी गया। उन्होंने वहां के जिला अधिकारी श्री रामचंद्र राव से कह कर उन्हें ₹25 के हर महीने की स्कॉलरशिप दिलवाई। इसी स्कॉलरशिप की मदद से श्रीनिवास रामानुजन ने मद्रास में 1 साल रहते हुए अपना पहला रिसर्च किया। इस रिसर्च का नाम इन्होंने प्रॉपर्टीज ऑफ बर्थ रखा। (भारत देश के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी)

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अपने पहले रिसर्च पूरा होने के बाद श्रीनिवास रामानुजन ने मद्रास में ही नौकरी कर ली। इस नौकरी के करने के बाद इनके घर की आर्थिक स्थिति में भी कुछ सुधार आया और यह बहुत खुश रहने लगे। अब इन्हें अपने गणित के ऊपर एक्सपेरिमेंट करने का भी समय मिल जाता था। और नौकरी करने से इनके घर की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आ रही थी। श्रीनिवास रामानुजन रात भर जागकर नए-नए गणित के फार्मूले लिखा करते थे। और थोड़ी ही देर आराम किया करते थे। और सुबह सुबह ऑफिस निकल जाया करते थे। धीरे-धीरे श्रीनिवास रामानुजन अपने एक्सपेरिमेंट के इस लेवल तक आ चुके थे (भारत देश के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी)

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कि अब इनका यह काम अकेले इनसे कर पाना असंभव सा दिख रहा था। बिना किसी अन्य गणितज्ञ की सहायता से अब काम को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता था। इसी समय श्रीनिवास रामानुजन ने अपने एक किए गए 1 एक्सपेरिमेंट के कुछ फार्मूला को एक प्रोफेसर को दिखाया। और उन से सहायता मांगी। वो विश्व के सबसे प्रसिद्ध गणितज्ञ में से एक थे। और वे श्रीनिवास रामानुजन के साथ काम करने के लिए भी तैयार हो गए। इस तरह से सरहदी ने श्रीनिवास रामानुजन की आर्थिक सहायता भी की और उन्हें इंग्लैंड बुला लिया। (भारत देश के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी)

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श्रीनिवास रामानुजन की और प्रोफेसर हार्डी की यह दोस्ती बहुत फायदेमंद साबित हुई। इन दोनों ने मिलकर बहुत सारी खोज किया और आगे चल के श्रीनिवास रामानुजन को एक विशेष अधिकार कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में दिया गया। आगे चलकर श्रीनिवास रामानुजन को भी वह का नागरिक भी बनाया गया। जिस समय भारत गुलामी में जी रहा था। तब श्रीनिवास रामानुजन एक व्यक्ति थे जिन्हे रॉयल सोसाइटी की सदस्यता मिला यह एक बहुत ही गर्व की बात थी। कुछ समय बाद इंग्लैंड में ही श्रीनिवास रामानुजन की तबीयत बहुत ज्यादा खराब रहने लगी। डॉक्टरी जांच पड़ताल के बाद पता चला कि श्रीनिवास रामानुजन को टीवी की बीमारी हो गई है। (भारत देश के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी)

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उस समाया में टीवी के बीमारी की कोई दवा नहीं हुआ करता था। और श्रीनिवास रामानुजन की लगातार बिगड़ती हालत और खराब होती जा रही थी। अंत में डॉक्टरों की सलाह के कारण श्रीनिवास रामानुजन को वापस भारत लौटना पड़ा। क्योंकि इंग्लैंड में ठंडे मौसम होने के कारण इन्हें बहुत परेशानी हो रही थी। लेकिन भारत वापस लौटने के बाद भी श्रीनिवास रामानुजन का तबीयत ठीक नहीं हुआ और उनकी हालत और गंभीर होती चली गई। आखिरकार अपना पूरा जीवन गणित को समर्पित करने वाले श्रीनिवास रामानुजन 35 साल की उम्र में ही 26 अप्रैल 1920 की साल अलविदा हो गए। आज भले ही श्रीनिवास रामानुजम हमारे बीच में नहीं हैं। लेकिन इनके द्वारा किया गया काम सदा हमारे जीवन को प्रेरित करता रहेगा। 

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