भारत की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला

भारत की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला

भारत की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला

‌आप सभी ने कल्पना चावला का नाम अवश्य सुना होगा। कल्पना चावला पहली भारतीय महिला थी। जिन्होंने अंतरिक्ष तक का सफर बिना डरे और अपने हिम्मत और बहादुरी के साथ किया था। कल्पना चावला ने ना केवल अपने नाम को पूरे विश्व में फहराया बल्कि भारत देश को भी पूरे विश्व में प्रसिद्ध किया। अंतरिक्ष की रानी कही जाने वाली कल्पना चावला का जन्म हरियाणा के करनाल में हुआ था। कल्पना चावला के पिता का नाम बनारसी लाल था। और कल्पना चावला के माता का नाम संजोती था। (भारत की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला)

कल्पना चावला बचपन से ही किसी चीज के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी हासिल करने में रुचि रखती थी। शुरुआती दौर से ही कल्पना चावला पढ़ने में अव्वल थी। और अपने पढ़ाई को पूरे मन लगाकर किया करती थी। शुरुआती दौर से ही कल्पना चावला हमेशा अंतरिक्ष तारे चांद सूरज इन सभी चीजों के बारे में ज्यादा जानकारी हासिल करना चाहती थी। अपने विद्यालय में शिक्षकों से अपने घर में अपने माता-पिता से हमेशा चांद और सूरज के बारे में अत्यधिक जानकारी हासिल करती रहती थी।

कल्पना चावला की शुरुआती पढ़ाई हरियाणा के करनाल में ही टैगोर विद्यालय से हुई थी। अपने हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद कल्पना चावला ने चंडीगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज से एरोनॉटिकल की पढ़ाई पूरी की। हालाकि कल्पना चावला का बचपन से ही एरोनॉटिकल विज्ञान में ज्यादा मन लगा रहता था। इसी कारण से वह अपने एरोनॉटिकल की और ज्यादा अधिक ज्ञान लेने के लिए अमेरिका चली गई। कल्पना चावला अमेरिका पहुंचने के बाद पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। (भारत की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला)

अपने अच्छे पढ़ाई और कठिन लगन के कारण कल्पना चावला को 1988 में नासा में शामिल कर लिया गया था। नासा में आने के बाद कल्पना चावला ने नासा के लिए कई सारे शोध किए। और अपने द्वारा किए गए। सभी शोध में सफलता प्राप्त की जिस समय कल्पना चावला को नासा में काम करने का मौका मिला। उसी समय नासा के सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अंतरिक्ष के ज्ञान को और ज्यादा जानने के लिए 15 लोगों की एक टीम बनाई थी। हालांकि कल्पना चावला की आयु अभी कम थी।

लेकिन इनके कठिन परिश्रम और इनका ज्ञान को देखकर नासा के सभी वरिष्ठ अधिकारियों ने उस 15 लोगों के टीम में कल्पना चावला को भी शामिल कर लिया था। कल्पना चावला की चयन हो जाने के बाद कल्पना चावला ने अपने काम को और दुगुनी रफ्तार और कठिन परिश्रम से करना शुरू कर दिया। और एक समय ऐसा आया जब नासा के अधिकारियों ने अंतरिक्ष में 6 लोगों को भेजने का एक टीम बनाया। जिसमें कल्पना चावला का भी नाम शामिल किया गया। (भारत की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला)

इस तरह से कल्पना चावला ने अपने सपनों को पूरा किया। क्योंकि कल्पना चावला हमेशा से अंतरिक्ष में जाकर वहां की सभी बारीकियों को बड़े ध्यान से पढ़ना और देखना चाहती थी। अब समय आ चुका था। जब इन्हें के टीम को नासा अंतरिक्ष में भेजने वाली थी। कल्पना चावला का पहला अंतरिक्ष जाने का काम 19 नवंबर 1997 में शुरू हुआ था। 6 लोगों को टीम के साथ कोलंबिया एयरस्पेस से कल्पना चावला को भी अंतरिक्ष भेजा गया। इस तरह से कल्पना चावला अंतरिक्ष में उड़ने वाली प्रथम भारतीय महिला बन गई।

5 दिसंबर 1997 को इस काम को सफलता पूर्ण कर लिया गया। अपने पहले मिशन को सफलतापूर्वक करने के बाद कल्पना चावला का नाम नासा के साथ-साथ पूरे विश्व में फैलने लगा। कल्पना चावला पूरे विश्व में प्रसिद्ध हो चुकी थी। और साथ ही साथ कल्पना चावला ने भारत के नाम को भी बहुत ज्यादा रोशन किया। अपने पहले मिशन को सफलतापूर्वक करने के बाद कल्पना चावला फिर से नासा के नए कामो में अपना हाथ बटाने लगी। पहली बार सफल हो जाने के कारण 5 साल बाद फिर से नासा के अधिकारियों ने कल्पना चावला को अंतरिक्ष में भेजने का निर्णय किया। (भारत की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला)

कल्पना चावला का दूसरा अंतरिक्ष अभियान 16 जनवरी 2003 को कोलंबिया स्पेस शटल से ही प्रारंभ हुआ था। इस मिशन में कल्पना चावला के साथ और भी 16 लोग शामिल किए गए थे। अंतरिक्ष में जाने के बाद कल्पना चावला अपने सहयोगियों के साथ मिलकर लगभग 100 ऐसे शोध किए। जिससे नासा को बहुत ज्यादा फायदा प्राप्त हुआ। लेकिन कल्पना चावला के जीवन में एक ऐसा मोड़ आया। जिससे ना केवल कल्पना चावला का परिवार बल्कि पूरे विश्व के साथ भारत के सभी लोग शोक में डूब गए।

कल्पना चावला अपने अंतरिक्ष के सभी शोधों को पूरा करने के बाद वापस पृथ्वी पर आ रही थी। और पृथ्वी से लगभग 20 मिनट की दूरी पर ही अचानक से कल्पना चावला के प्लेन ब्लास्ट हो गया। यह किसी को मालूम नहीं था। कि पृथ्वी से मात्र 20 मिनट की दूरी पर इन 16 साइंटिस्ट का इस हादसा के कारण मौत हो जाएगा। सभी साइंटिस्ट और विश्व के सभी अंतरिक्ष प्रेमी लोग अंतरिक्ष से वापस आ रहे। 16 साइंटिस्टों के भव्य स्वागत के लिए खड़े थे। (भारत की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला)

लेकिन अचानक से हुए इस ब्लास्ट में 16 साइंटिस्ट की मौत हो गई। जिसमें भारत की हिम्मती बेटी कल्पना चावला भी शामिल थी। सही मायने में यदि देखा जाए तो कल्पना चावला की तो मौत हो चुकी है। लेकिन कल्पना चावला के द्वारा किए गए काम हमेशा पूरे विश्व में अंतरिक्ष प्रेमियों के हृदय में विराजमान रहेगी। आज भी कल्पना चावला पूरे विश्व के अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष प्रेमी लोगों के लिए एक आदर्श मानी जाती है। इस प्रकार से 1 फरवरी 2003 को भारत की हिम्मती बेटी कल्पना चावला का निधन हुआ।

भले ही 1 फरवरी 2003 को दुर्घटना के कारण भारत की हिम्मती बेटी कल्पना चावला का निधन हुआ। लेकिन कल्पना चावला के द्वारा किए गए कार्य हमेशा भारत के इतिहास में अमर हो चुका है। सही कहा जाता है की कोई इंसान बस पृथ्वी पर जीने के लिए आता है। और कोई इंसान पृथ्वी पर मर कर भी हमेशा के लिए अमर हो जाता है। इस बात को भारत की हिम्मती बेटी कल्पना चावला ने सत्य साबित करके दिखाया है। (भारत की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला)

यदि आपको कल्पना चावला के बारे में दी गई यह जानकारी पसंद आई हो। तो आप इसे अपने दोस्तों और परिवार के बीच अवश्य शेयर कर दें। कल्पना चावला अपने जीवन में आने वाले कठिनाइयों का सामना करते हुए। भारत के इतिहास में अमर हो चुकी है। यदि आप में से किसी को इस पोस्ट के संबंध में कुछ पूछना हो या कुछ बताना चाहते हो। तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं।

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