प्लासी युद्ध क्या है कब और किसके बीच में युद्ध लड़ी गई

प्लासी युद्ध क्या है कब और किसके बीच में युद्ध लड़ी गई

प्लासी युद्ध क्या है कब और किसके बीच में युद्ध लड़ी गई

आज मै आप सभी के लिए एक बार फिर से हाजिर हूं इतिहास का एक और पन्ना लेकर आज हम बात करेंगे एक ऐसे पन्ने की जिसमे कुछ भारत के राजाओ ने ब्रिटिश साम्राज्य को भारत में नींव रखने का मौका दिया था। हम बात करेंगे प्लासी के युद्ध की प्लासी का युद्ध बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला और ईस्ट इंडिया कंपनी के संघर्ष का परिणाम था। इस युद्ध के अत्यंत महत्वपूर्ण तथा स्थाई परिणाम निकले। 1757 में हुआ यह प्लासी का युद्ध ऐसा था। जिसने भारत में अंग्रेजों की सत्ता की पूर्णता स्थापना कर दी। बंगाल की तत्कालीन स्थिति और अंग्रेज स्वार्थ ने ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल की राजनीति में हस्तक्षेप करने का अवसर प्रदान किया। अलीवर्दी खान जो पहले बिहार का नया निजाम था। (प्लासी युद्ध क्या है कब और किसके बीच में युद्ध लड़ी गई)

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औरंगजेब की मृत्यु के बाद आई राजनीतिक उठापटक का भरपूर लाभ उठाया। उसने अपनी शक्ति बहुत बढ़ा ली। वह एक बहुत महत्वकांची व्यक्ति था। उसने बंगाल के तत्कालीन नवाब सरफराज युद्ध में हराकर मार डाला और स्वयं नवाब बन गया। 9 अप्रैल को अलीवर्दी खान की मृत्यु हो गई। अलीवर्दी खान की अपनी कोई संतान नहीं थी। इसलिए उसकी मृत्यु के बाद अगला नवाब कौन होगा इसके लिए कुछ लोगों में उत्तराधिकार के लिए षड्यंत्र शुरू हो गए। लेकिन अलीवर्दी खान ने अपने जीवन काल में ही अपनी सबसे छोटी बेटी के पुत्र सिराजुद्दौला को उत्तराधिकारी मनोनीत कर दिया था। और अन्तः वही हुआ सिराजुदौला बंगाल का नवाब बना। सिराजुदौला भले ही नवाब बन गया लेकिन उसे कई विरोधियों का सामना करना पड़ा। (प्लासी युद्ध क्या है कब और किसके बीच में युद्ध लड़ी गई)

सिराजुदौला का सबसे बड़ी विरोधी और प्रतिद्वंदी उसके परिवार से ही थी। वह थी सिराजुदौला की मौसी उसकी मौसी का नाम घसीटे बेगम था। घसीटी बेगम का पुत्र शौकत गंज जो स्वयं पूर्णिया का शासक था। उसने अपने दीवान अमीन चंद और मित्र जगत सेठ के साथ सिराजुद्दौला को परास्त करने का सपना दिखा। मगर सिराजुद्दौला पहले से ही सावधान हो चुका था। उसने सबसे पहले घसीटे बेगम को कैद किया। और  सारा धन जप्त कर लिया। इस बात से शौकत गंज बहुत भयभीत हो गया। और सिराजुद्दौला के प्रति वफादार रहने का वचन दिया। लेकिन कुछ समय के बाद सिराजुद्दौला ने बाद में उसे युद्ध में हराकर मार डाला।(प्लासी युद्ध क्या है कब और किसके बीच में युद्ध लड़ी गई)

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इधर ईस्ट इंडिया कंपनी अपनी स्थिति मजबूत कर चुकी थी। दक्षिण में फ्रांसीसी को हराकर अंग्रेजों के हौसले बुलंद हो चुके थे। लेकिन वो बंगाल में भी अपना प्रभुत्व जमाना चाहते थे। लेकिन अलीवर्दी खान मरने से पहले ही सिराजुद्दौला को सलाह दे दी थी कि किसी भी हालत में अंग्रेजों का दखल बंगाल में नहीं होना चाहिए। इसे कारण से सिराजुदौला भी अंग्रेजों को लेकर संकेत में था। सिराजुदौला ने अंग्रेजों को फोर्ट विलियम किले को नष्ट करने का आदेश दिया। इसको अंग्रेजों ने ठुकरा दिया। गुस्साए नवाब ने मई 1756 में आक्रमण कर दिया। (प्लासी युद्ध क्या है कब और किसके बीच में युद्ध लड़ी गई)

20 जून 1756 में कासिम बाजार पर नवाब का अधिकार हो गया। उसके बाद सिराजुद्दौला ने फोर्ट विलियम किले पर भी अपना अधिकार कर लिया। किले पे अधिकार होने से पहले ही अंग्रेज गवर्नर ड्रैक ने अपनी पत्नी और बच्चों के साथ भागकर फुल्टा नामक एक द्वीप में सरन ले ली। कोलकाता में बची कुची अंग्रेजों की सेना को आत्मसमर्पण करना पड़ा। साथ ही साथ बहुत सारे अंग्रेजों को बंदी बनाकर और मानिकचंद के जिम्मे कोलकाता का भर सौपकर नवाब अपनी राजधानी मुर्शिदाबाद लौट आया। ऐसी ही परिस्थिति में काली कोठरी की दुर्घटना द ब्लैक होल ट्रेजेडी घटी। जिसने अंग्रेजों और बंगाल के संबंध को और भी कटु बना दिया। (प्लासी युद्ध क्या है कब और किसके बीच में युद्ध लड़ी गई)

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कहा जाता है की 146 अंग्रेजों जिनमें उनकी स्त्री और बच्चे भी थे। को फोर्ट विलियम के एक कोठरी में बंद कर दिया गया था। जिसमे दम घुटने से कई लोगों की मौत हो गई थी। जब इस घटना की खबर मद्रास पहुंची तो अंग्रेज बहुत गुस्से में आ गई। और अंग्रेजो ने सिराजुद्दौला से बदला लेने की ठान ली। शीघ्र ही मद्रास से क्लाइव और वाटसन थल सेना लेके कोलकाता की ओर बढ़े। और नवाब के अधिकारियों को रिश्वत देकर अपने पक्ष में कर लिया। परिणाम स्वरूप मानिकचंद ने बिना किसी प्रतिरोध के कोलकाता अंग्रेजों को सौंप दिया। बाद में अंग्रेजों ने हुगली पर भी अधिकार कर दिया। ऐसी स्थिति में बाध्य होकर नवाब को अंग्रेजों से समझौता करना पड़ा। (प्लासी युद्ध क्या है कब और किसके बीच में युद्ध लड़ी गई)

9 February 1757 को कलाई में नवाब के साथ एक संधि की। जिसके अनुसार मुगल सम्राट द्वारा अंग्रेजों को दी गई सारी सुविधाएं वापस मिल जानी चाहिए। नबाब को लाचार होकर अंग्रेजों के जब्त फैक्ट्री और संपतिया लौटाने के लिए बाध्य होना पड़ा। ईस्ट इंडिया कम्पनी को नवाब की तरफ से हर्जाने की रकम भी मिली। नवाब अंदर ही अंदर बहुत अपमानित महसूस कर रहा था। अंग्रेजी इस संधि से भी संतुष्ट नहीं हुए वे सिराजुदौला को गद्दी से हटाकर किसी वफादार नवाब को बिठाना चाहते थे। जो उनके कहे अनुसार काम करें। और अंग्रेजो के काम में रोड़ा ना डालें। कलईव ने नवाब सिराजुदौला के खिलाफ षड्यंत्र करना शुरू कर दिया। उसने मीरजाफर से गुप्त संधि की और उसे नवाब बनाने का लोभ दे दिया। इसके बदले में मीरजाफर ने अंग्रेजों को कासिम बाजार ढाका और कोलकाता की किलेबंदी करने एक करोड रुपए देने और उसकी सेना का व्यय सहने का आश्वासन दे दिया। (प्लासी युद्ध क्या है कब और किसके बीच में युद्ध लड़ी गई)

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इस षडयंत्र मे जगत सेठ राय दुर्लभ और अमित चंद भी अंग्रेजों से जुड़ गए। अब क्लाइव ने  नबाब पर अलीनगर की संधि भंग करने का आरोप लगाया। इस समय नवाब की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। दरबारी षड्यंत्र और अहमद शाह अब्दाली की आक्रमण से उत्पन्न खतरे की स्थिति ने उसे और भी भयभीत कर दिया। नबाब सिराजुदौला ने मीरजाफर को अपनी तरफ करने की कोशिश भी की पर वह असफल रहा। नबाब की कमजोरी को भांपकर क्लाइव  ने सेना के साथ प्रस्थान किया। नबाब भी राजधानी छोड़ कर आगे बढ़ा। 23 जून 1757 का प्लासी के मैदान में दोनों सेनाओं की मुठभेड़ हुई। यह युद्ध नाम मात्र का युद्ध था । नवाब की सेना के एक बड़े भाग ने युद्ध में हिस्सा नहीं लिया। (प्लासी युद्ध क्या है कब और किसके बीच में युद्ध लड़ी गई)

आंतरिक कमजोरी के बावजूद सिराजुद्दौला का सेना जिसका नेतृत्व है मीर मदन और मोहनलाल कर रहे थे। अंग्रेजो के सेना का डटकर सामना करने लगी। परंतु मीर जाफर की विश्वासघात के कारण सिराजुदौला को यह युद्ध हारना पड़ा। वो जान बचाकर भागा परंतु मीर जाफर के पुत्र अमीर ने उसे पकड़ कर मार डाला। प्लासी के युद्ध के परिणाम अत्यंत ही व्यापक और स्थाई निकले। इसका प्रभाव कंपनी बंगाल और भारतीय इतिहास पर पड़ा। मीर जाफर को क्लाइव ने बंगाल का नवाब घोषित कर दिया। उसने कंपनी और क्लाइव को बेशुमार धन दिया। और संधि के अनुसार अंग्रेजों को भी कई सुविधाएं मिली। बंगाल की गद्दी पर अब एक एहसान नवाब आ गया जो अंग्रेजों के हाथों की कठपुतली मात्र था। प्लासी के युद्ध ने बंगाल की राजनीति पर अंग्रेजों का नियंत्रण कायम कर दिया। (प्लासी युद्ध क्या है कब और किसके बीच में युद्ध लड़ी गई)

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अंग्रेज अब व्यापारी से राजशक्ति के श्रोत बन गई थी। इसका नैतिक परिणाम भारतीय पर बहुत ही बुरा पड़ा। एक व्यापारिक कंपनी ने भारत आकर यहां से सबसे अमीर प्रांत के सूबेदार को अपमानित करके गद्दी से हटा दिया। और मुग़ल सम्राट तमाशा देखते रह गए। आर्थिक दृष्टिकोण से भी अंग्रेज ने बंगाल का शोषण करना आरंभ कर दिया था। इसी युद्ध से प्रेरणा लेकर क्लाइव ने आगे बंगाल में राजनीतिक सत्ता स्थापित कर ली। बंगाल से प्राप्त धन के आधार पर अंग्रेजों ने दक्षिण में फ्रांसीसी पर विजय प्राप्त की। और भारत में इकलौते प्रतिद्वंदी को नष्ट कर दिया। आशा करता हूं यह ऐतिहासिक तथ्य ऐतिहासिक किस्सा और यह ऐतिहासिक पन्ना आप सभी को पसंद आया होगा। (प्लासी युद्ध क्या है कब और किसके बीच में युद्ध लड़ी गई)

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