प्रेरणादायक कहानी दशरथ मांझी मनुष्य जब जोड़ लगता है पत्थर पानी बन जाता है

प्रेरणादायक कहानी दशरथ मांझी

प्रेरणादायक कहानी दशरथ मांझी मनुष्य जब जोड़ लगता है पत्थर पानी बन जाता है

Limant Post में आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत है। आज आप सभी के बीच में फिर से एक बार प्रेरणादायक कहानियों के साथ उपस्थित हूं। कहां जाता है मनुष्य जब जोर लगाता है पत्थर पानी बन जाता है। ऐसा कोई कार्य नहीं से मनुष्य चाह ले और वह कार्य पूर्ण ना हो। मनुष्य के अंदर उपस्थित क्षमता को पहचान पाना मनुष्य के लिए ही कठिन साबित हो सकता है। लेकिन जिस दिन मनुष्य ने अपने अंदर उपस्थित अपनी शक्ति अपनी क्षमता अपने कौशल को पहचान लेगा। उस दिन के बाद मनुष्य किसी भी कार्य को सफलता पूर्ण करने में सक्षम हो जाएगा। आप सभी जानते हैं कि दुनिया में ऐसा कोई कार्य नहीं है जो मनुष्य नहीं कर सकता है। (प्रेरणादायक कहानी दशरथ मांझी मनुष्य जब जोड़ लगता है पत्थर पानी बन जाता है)

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जमीन से लेकर चांद तक पहुंच गया मनुष्य। बड़ी-बड़ी मिसाइलें बना दिया मनुष्य। असंभव से असंभव काम को संभव कर देने वाला इस पृथ्वी पर एक मनुष्य ही हैं। इसलिए कहा गया है मनुष्य के अंदर उपस्थित क्षमता कौशल जिस दिन मनुष्य ने पहचान लिया। जिस दिन मनुष्य खुद के अंदर की शक्ति को आभास कर लिया। उसी दिन से मनुष्य की सफलता का सफर शुरू हो जाता है। प्रेरणादायक कहानी में इंसान की कहानी है। जिस की हिम्मत कौशल और शक्ति को देखकर आप सभी दंग हो जाएंगे। (प्रेरणादायक कहानी दशरथ मांझी मनुष्य जब जोड़ लगता है पत्थर पानी बन जाता है)

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कहा जाता है कि इस दुनिया में पहाड़ सबसे कठोर होता है। अक्सर हम अपने बोलचाल की भाषा में किसी को उदाहरण के तौर पर भी पहाड़ का उदाहरण ही देते हैं। इससे यह प्रतीत होता है कि हम अपने जीवन में पहाड़ को सबसे ज्यादा कठोर सख्त मानते हैं। लेकिन आज हमारे प्रेरणादायक कहानी के नायक ने पहाड़ जैसे कठोर पर्वत को अपनी हिम्मत के सामने धराशाही कर दिया। आज मैं बात करने जा रहा हूं दशरथ मांझी जिन्हें माउंटेन मैन के नाम से भी जाना जाता है। आप सभी को बता दूं कि दशरथ मांझी को माउंटेन मैन का नाम ऐसे ही नहीं प्राप्त हुआ है।

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दशरथ मांझी के क्षमता को देख कर उनको पूरी दुनिया आज माउंटेन मैन के नाम से जानती है। जैसा की मैंने आप सभी को बताया अभी के समय में हम अपने जीवन में कठोर पर्वत को ही मानते हैं किसी पहाड़ को ही मानते हैं। लेकिन दशरथ राम मांझी ने इन कठोर पर्वत को भी अपने हिम्मत के सामने छलनी छलनी कर दिया कर दिया। तो आइए आज हम दशरथ मांझी के जीवन के उन सच्चाई को विस्तार से जानते हैं। जिससे पूरी दुनिया अनभिज्ञ है। (प्रेरणादायक कहानी दशरथ मांझी मनुष्य जब जोड़ लगता है पत्थर पानी बन जाता है)

दशरथ मांझी का जन्म 1934 ईस्वी में बिहार राज्य के गया जिले के पास हुआ था। इनके जन्म की कोई निश्चित समय और निश्चित महीना नहीं बताया जा रहा है। दशरथ मांझी का जन्म जब हुआ उस समय भारत अंग्रेजों के गुलाम था। चारों तरफ अंग्रेजी शासन होने के कारण दशरथ मांझी के गांव की हालत कुछ ज्यादा ही खराब थी। यहाँ के लोगो को पुरा पेट खाना तक नसीब नहीं होता था 1947 में जब भारत आजाद हुआ। भारत के आजाद होने के बाद शासन जमींदारों के हाथ चली गई। जमींदार लोग गांव के लोगों को बहुत ज्यादा परेशान किया करते थे। उन्हें तरह तरह की यातनाएं दी जाती थी।

प्रेरणादायक कहानी दशरथ मांझी
प्रेरणादायक कहानी दशरथ मांझी

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गरीब के बहू बेटियों के इज्जत को तार-तार किया जाता था। एक बार दशरथ मांझी के पिता ने किसी जमींदार से कुछ पैसे उधार लिए। पैसे समय पर ना चुकाने के कारण जमींदार ने दशरथ मांझी के पिता को दशरथ मांझी को बंधुआ मजदूर बनाने के लिए कहा। जैसा की आप सभी जानते है पहले  बदुआ मजद्दोर बना के उससे जानवरो की तरह काम करवाया जाता था  लेकिन दशरथ मांझी को किसी के गुलाम बनने की बात कतई कबूल ना थी। यही कारण था कि दशरथ मांझी बड़ी अल्प आयु में ही अपने घर को छोड़कर घर से भाग गए। दशरथ मांझी घर छोड़ के झारखंड चले गए। वहां वह कोयले की खान में काम करने लगे।

लेकिन कुछ दिनों के बाद अपने पिता और अपने घरवालों की याद सताने के कारण दशरथ मांझी फिर से वापस अपने गांव आ गए। गांव आने के बाद दशरथ मांझी को पता चला कि उनकी माता का स्वर्गवास हो चुका है। दशरथ मांझी अब अपने पिता के साथ अपना जीवन व्यतीत करने लगे। इतने समय के बाद आने के बाद भी दशरथ मांझी ने अपने गांव की हालत वैसे ही देखा जैसा वह यहां से छोड़ कर गए थे। आज भी उनके गांव में जमींदारों का ही राज था सड़क नहीं थी बिजली नहीं थी पढ़ाई का कोई सुविधा नहीं था। (प्रेरणादायक कहानी दशरथ मांझी मनुष्य जब जोड़ लगता है पत्थर पानी बन जाता है)

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इन सब चीजों को देखते हुए भी दशरथ मांझी अपने पिता के साथ अपने गांव में ही जीवन व्यतीत करने लगे। कुछ समय में दशरथ मांझी को गांव की एक लड़की से प्यार हो गया। इसी लड़की से दशरथ माझी को बचपन में बाल विवाह भी करवाया गया था। लड़की का नाम फाल्गुनी देवी था। जब दशरथ मांझी के पिता फाल्गुनी के पिता से उनकी बेटी का हाथ मांगने गए तो लड़की के पिता ने साफ मना कर दिया। उन्होंने दशरथ मांझी के बारे में बताया कि यह किसी काम का नहीं यह कोई काम नहीं कर सकता पर बैठकर खाता रहता है कोई काम नहीं करता इसी कारण से वह अपनी बेटी की शादी दशरथ मांझी से बिल्कुल नहीं करेंगे।

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यह सुनकर दशरथ मांझी बहुत दुखी हो गए। लेकिन फाल्गुनी को भी दशरथ मांझी से अति लगाव हो गया था। यही लगाव के कारण दशरथ मांझी और फाल्गुनी दोनों घर छोड़कर भाग गए। लेकिन भगवान को यह मंजूर नहीं था। कर जहां दशरथ माझी और उनकी पत्नी फाल्गुनी देवी आकर रहने लगी वह पहाड़ी इलाका था। लोगों को कहीं आने जाने के लिए बाहर ऊपर चढ़कर जाना पड़ता था। आस-पास में कोई अच्छे रास्ते का साधन ना होने के कारण गांव वाले सभी मजबूरी बस किसी पहाड़ से अपने आने जाने का रास्ता बनाया। लेकिन एक दिन ऐसा भी आया जब दशरथ राम मांझी की पत्नी फाल्गुनी देवी इसी पहाड़ से कहीं जा रही थी। (प्रेरणादायक कहानी दशरथ मांझी मनुष्य जब जोड़ लगता है पत्थर पानी बन जाता है)

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और वह पहाड़ों के बीच गिर के मर गई। फाल्गुनी देवी के मरने की खबर सुन के दशरथ मांझी के पैरों तले जमीन खिसक गया। क्योकि दशरथ मांझी अपने पति फाल्गुनी से बहुत ज्यादा प्यार करते थे। फाल्गुनी देवी की मृत्यु की खबर सुनकर दशरथ मांझी पागल से हो गए। उसी संकल्प लिया कि इस पहाड़ को वह हमेशा के लिए समाप्त कर देंगे। सुनने में जितना आसान लगता है कि किसी भी बड़े पहाड़ को तोड़कर समाप्त कर देना करने के समय उतना ही नामुमकिन प्रतीत होता है। लेकिन दशरथ मांझी के शक्ति और कठिन परिश्रम लगन को देखकर आप सभी दंग रह जाएंगे। 260 फुट लंबा 25 फुट गहरा 30 फुट चौड़ा पहाड़ को तोड़कर गलहोर की पहाड़ियों में रास्ता बनाना शुरु कर दिया। दशरथ मांझी ने जब पहाड़ों को तोड़ना शुरू किया तो इन्हें आसपास के गांव के लोग पागल बोलते थे।

आने जाने वाले सभी लोग इन्हें पागल के नाम से नवाजा हर कोई कहता था कि दशरथ मांझी पत्नी के मरने के सोक में पागल सा हो गया है। लेकिन मन में लिया हुआ दृढ़ संकल्प दशरथ मांझी को अपने पथ से डिगा नहीं सका। रात-दिन दशरथ राम माझी बिना किसी भी तरह के रूकावट के   बिना बरसात बिना ठंड बिना गर्मी की सोच के इस पहाड़ को लगातार तोड़ते रहे। 22 साल की कड़ी मेहनत के बाद दशरथ मांझी ने पहाड़ को तोड़ कर रास्ता बनाने में सफल रहे। 22 साल की कड़ी मेहनत 1 दिन दशरथ मांझी के जीवन में वह खुशी लाई जिसका इंतजार दशरथ मांझी 22 साल से करते आ रहे थे। (प्रेरणादायक कहानी दशरथ मांझी मनुष्य जब जोड़ लगता है पत्थर पानी बन जाता है)

प्रेरणादायक कहानी दशरथ मांझी
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इसी कारण से दशरथ मांझी को आज पूरी दुनिया माउंटेन मैन के नाम से जानने लगी। इसलिए कहा जाता है मनुष्य जब जोर लगाता है पत्थर पानी बन जाता है। इंसान के अंदर वह शक्ति होनी चाहिए वह सोच होनी चाहिए वह दृढ़ संकल्प होना चाहिए। जो इंसान को उसकी सफलता के मार्ग पर अवश्य एक दिन अवश्य सफलता दिलाती है। कहां जाता है इंसान अपनी शक्ति का जिस दिन आभास कर ले। जिस दिन इंसान को अपनी शक्ति का ज्ञान हो जाएगा। वह दुनिया का असंभव से असंभव काम करने में भी संभव हो जाएगा। दशरथ मांझी भी एक साधारण इंसान थे।

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जिन्होंने अपने जीवन में एक ऐसे संकल्प का निर्माण किया। जिसने 22 साल लगा दिए दशरथ मांझी को सफलता के मुकाम तक पहुंचाने में।  22 साल को छोटी समय नहीं होती। अच्छे अच्छे इंसानों का धैर्य टूट जाता है। लेकिन जिस इंसान का संकल्प दृढ हो उसे कोई अपने पथ से डिगा नहीं सकता। और एक दिन ऐसा आया कि दशरथ राम मांझी ने इतने बड़े पहाड़ को चकनाचूर कर के इसके सीने को फाड़ के बीच सड़क का निर्माण कर दिया। एक समय दशरथ मांझी को इंदिरा गांधी से मिलने जाना था। जब वह ट्रेन पर चलें लेकिन टिकट न होने के कारन TT ने दशरथ मांझी को  ट्रेन से धक्के मार कर बाहर कर दिया। (प्रेरणादायक कहानी दशरथ मांझी मनुष्य जब जोड़ लगता है पत्थर पानी बन जाता है)

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लेकिन दशरथ मांझी ने हार नहीं मानी उन्होंने पैदल रेल की पटरी के सहारे दिल्ली तक का सफर किया। ऐसे दृढ़ संकल्प इंसान को मामूली समझना मूर्खतापूर्ण कार्य होगा। किसी भी इंसान के अंदर कितनी बड़ी शक्ति इतना ऊर्जा इतनी बुद्धिमानी इतनी ताकत उसको अपने अंदर किए हुए दृढ़ संकल्प से ही मिल सकता है। हमारे जीवन में किसी भी उद्देश्य को पूरा करने के लिए हमें अपने जीवन में एक दृढ़ संकल्प करना अतिआवश्यक है। बिना संकल्प के हम अपने जीवन में किसी भी कार्य को पूर्ण नहीं कर सकते हैं। अतः आप सभी से भी निवेदन करता हूं अगर आप अपने जीवन में किसी काम को किसी लक्ष्य को इसी उद्देश्य को प्राप्त करना चाहते है 

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उसका एक दृढ़ संकल्प आपके मन में अवश्य होना चाहिए। दुनिया के तमाम लोगों को अलग-अलग तरह की कार्य को संपन्न करने की इच्छा होती है। विद्यार्थी है तो उसे अपने पढ़ाई के प्रति लगनशील होना चाहिए। कोई किसान है उसे अपनी खेती के तरफ कार्य में लगनशील होना चाहिए। कोई व्यापारी है तो उसे अपने व्यापार में अपने व्यापार के कार्य में लगनशील होना चाहिए। मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि आप अपने जिस काम में खुद को सफल करना चाहते हैं उस काम के प्रति आपके मन में एक दृढ़ संकल्प दृढ़ निश्चय अवश्य होना चाहिए।

हमारे द्वारा लिए गए दृढ़ संकल्प एक दिन हमें सफलता के मार्ग पर अवश्य पहुंचाती है। दशरथ राम मांझी के जीवन में भी अपने पत्नी से लगाव होने के कारण वो इतने व्याकुल हो गए कि उन्हें एक ऐसा दृढ़ संकल्प लिया कि इतने बड़े लंबे चौड़े पहाड़ का सीना चीर के बीच से रास्ता निकाल दिया। (प्रेरणादायक कहानी दशरथ मांझी मनुष्य जब जोड़ लगता है पत्थर पानी बन जाता है)

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एक अकेला इंसान के लिए कर पाना बहुत मुश्किल होता है। लेकिन हमरी सोच अगर दृढ़ है। तो एक  दिन हमारे दृढ़ संकल्प को पूरा करने में आवश्यक हमारी मदद करता है। एक दिन ऐसा आता है कि अपने दृढ़ संकल्प अवश्य पूरा कर लेते हैं। पहाड़ो से लड़ने वाली दशरथ मांझी कुछ दिनों तो अपने कैंसर की बीमारी से लड़ते रहे। एक समय ऐसा भी आया कैंसर की बीमारी उन पर ज्यादा हावी हो गई। सन 2007 में श्री दशरथ मांझी का देहांत हो गया। इनके देहांत के उपरांत बिहार राज्य द्वारा राजकीय सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी गई। आज भले ही श्री दशरथ मांझी हमारे बीच में ना रहे लेकिन इनके द्वारा किया गया कार्य सदा हमारे जीवन को एक उद्देश्य का राह दिखाता रहेगा। इनके द्वारा यह किया हुआ कार्य हमेशा हमारे जीवन को प्रेरित करता रहेगा।

प्रेरणादायक कहानी दशरथ मांझी
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बिना स्वार्थ के समाज के लिए किया गया काम एक ना एक दिन अवश्य उस व्यक्ति के जीवन में सफलता लाती है। जिस पहाड़ की वजह से गांव के लोगों को ५० किलों मीटर की दूरी तय करनी होती थी। दशरथ मांझी ने उसी पहाड़ को तोड़ तोड़ कर इस दूरी को 55 किलोमीटर से 15 किलोमीटर का कर दिया। शुरुआती दौर में तो दशरथ मांझी को गांव वालों ने बहुत ताने कसे। उसी गांव में से कुछ ऐसे भी लोग थे जिन्होंने जीतन राम मांझी को खाना और पहाड़ तोड़ने के लिए औजार का मुहैया करवाया। (प्रेरणादायक कहानी दशरथ मांझी मनुष्य जब जोड़ लगता है पत्थर पानी बन जाता है)

इनके जीवन से प्रेरित होकर दशरथ मांझी के ऊपर एक फिल्म भी दर्शाया गया है। जिस फिल्म का नाम द माउंटेन मैन दशरथ मांझी रखा गया है। 2014 में प्रसारित TV सत्यमेव जयते सीजन 2 आमिर खान थे उन्होंने भी दशरथ मांझी की प्रसंसा अपने शो में  किया। 17 अगस्त 2007 में दशरथ मांझी का निधन हो गया। लेकिन इनके द्वारा किया गया इंसान के संपूर्ण जीवन में हमेशा याद रहेगा।

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