दस्त (Diarrhea) अतिसार के कारण लक्षण और इसका उपचार

दस्त (Diarrhea) अतिसार के कारण लक्षण और इसका उपचार

दस्त (Diarrhea) अतिसार के कारण लक्षण और इसका उपचार

अतिसार का रोग इंसान के शरीर के अंदर उनके द्वारा किए गए भोजन के सही ढंग से शरीर के अंदर न पच  पाने के कारण होता है। अतिसार का रोग खाने में असंतुलित भोजन और खान पान में गड़बड़ी के कारण भी होना शुरू हो जाता है। इस रोग में इंसान के द्वारा किए गए भोजन पाचन तंत्रिका के द्वारा ठीक से पचा नहीं पाते हैं। शरीर के अंदर किए गए भोजन यदि ठीक तरह से नहीं पच पाते हैं। तो यह दस्त का रूप धारण कर लेती है। इस रोग में इंसान के शरीर के अंदर से बार बार मल का आना शुरू हो जाता है। साथ ही साथ मल शरीर के अंदर से बहुत पतले निकलने शुरू हो जाते हैं। अतिसार को डायरिया के नाम से भी जाना जाता है।(दस्त (Diarrhea) अतिसार के कारण लक्षण और इसका उपचार)

दस्त (Diarrhea) अतिसार के लक्षण

अतिसार रोग में मल के समय मल से रक्त आना शुरू हो जाता है। यदि किसी इंसान के शरीर के अंदर डायरिया काफी लंबे समय से चलती आ रही है। तो ऐसे में इंसान के दस्त करने के समय दस्त के साथ साथ रक्त का आना भी शुरू हो जाता है।

ज्यादा मात्रा में मल त्याग करने से शरीर के अंदर कई तरह के पौष्टिक तत्व शरीर से बाहर निकल जाते हैं। इस कारण से शरीर में हमेशा थकावट बना रहता है। और इंसान हमेशा थकावट महसूस करने के कारण हमेशा आराम करना चाहता है।

अतिसार के रोग में रोगी को खाना खाने का बिल्कुल मन नहीं करता है। रोगी को खाने से विरक्ति होना शुरू हो जाता है। हमेशा प्यास लगना और मुँह सुखा हुआ रहना डायरिया और अतिसार के प्रमुख लक्षण माने जाते हैं। (दस्त (Diarrhea) अतिसार के कारण लक्षण और इसका उपचार)

डायरिया के लक्षणों में सिर का दर्द होना भी प्रमुख लक्षण माना जाता है। लंबे समय से मल त्याग करने के कारण हमेशा सर में दर्द बना रहता है।

ज्यादा मात्रा और पतले मल त्याग करने से बुखार का आना और वजन की कमी होनी ही शुरू हो जाती है।

कभी कभी देखा जाता है कि डायरिया के लक्षणों में जैसा हम भोजन करते हैं। बिना पचे हमारे भोजन हमारे मल के माध्यम से वैसे ही निकल जाते हैं। खाना खाने के तुरंत उपरांत जी मिचलाना उल्टी का आना भी अतिसार और डायरिया के लक्षण माने जाते हैं।

मल त्याग करने के समय में ढीले मल का त्याग होना अर्थात ज्यादा मात्रा में पतले और पानी जैसे मल का त्याग करना अतिसार के प्रमुख लक्षणों में से एक माने जाते हैं।

हमेशा पेट में दर्द होना और पेट में किसी चीज का चुभन महसूस होना भी अतिसार और डायरिया के लक्षणों में से एक हैं। (दस्त (Diarrhea) अतिसार के कारण लक्षण और इसका उपचार)

डायरिया और अतिसार के रोग का उपचार

खजूर

दस्त (Diarrhea) अतिसार के कारण लक्षण और इसका उपचार
दस्त (Diarrhea) अतिसार के कारण लक्षण और इसका उपचार

खजूर का नाम आप लोगों ने आवश्य सुना होगा। खजूर शरीर के अंदर रोगों से लड़ने की क्षमता अर्थात रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में रोगी की मदद करता है। अतिसार और डायरिया के रोग में खजूर का एक बहुत बड़ा महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। खजूर के पांच से छह की संख्या को लेकर इसके सेवन करने से शरीर के अंदर हो रहे डायरिया और अतिसार के रोग को खत्म किया जा सकता है।

इसके उपयोग करने के लिए हमें 5 से 6 खजूर के फल को लेकर इसका सेवन करना है। और 1 घंटे के बाद थोड़ा थोड़ा पानी पीते रहना है। लगातार थोड़े थोड़े पानी के सेवन करने से शरीर के अंदर अतिसार और पतले दस्त की समस्या को दूर किया जा सकता है। साथ ही साथ खजूर के सेवन करने से शरीर के अंदर रोग से लड़ने की क्षमता में भी काफी वृद्धि होती है।

दालचीनी

दस्त (Diarrhea) अतिसार के कारण लक्षण और इसका उपचार
दस्त (Diarrhea) अतिसार के कारण लक्षण और इसका उपचार

दालचीनी के सेवन करने से भी शरीर के अंदर उत्पन्न हो रहे अतिसार और दस्त की समस्या को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है। दालचीनी के उपयोग करने के लिए हमें दालचीनी 10 ग्राम लेकर इसे अच्छे से कूटकर चूर्ण बना लेना है। चूर्ण बनाने के उपरांत हमें 1 लीटर ठंडे पानी में इसे मिलाना है। और इसे हल्की आंच पर गर्म करना है। जब यह पानी उबलने लगे तो हमें किसी छलनी के माध्यम से इस पानी को छान लेना है। और 24 घंटे तक हमें इस पानी की थोड़ी-थोड़ी मात्रा सेवन करने से शरीर के अंदर उत्पन्न हो रहे डायरिया अतिसार और पतले दस्त की समस्या को हमेशा के लिए दूर किया जा सकता है।

जामुन

दस्त (Diarrhea) अतिसार के कारण लक्षण और इसका उपचार
दस्त (Diarrhea) अतिसार के कारण लक्षण और इसका उपचार

पेट से जुड़ी समस्याओं को जड़ से खत्म करने में जामुन का बहुत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। जामुन एक ऐसा औषधीय प्राकृतिक फल है। जिसके सेवन करने से पेट की समस्याओं को खत्म करने के साथ साथ शरीर के अंदर उत्पन्न हो रहे अन्य लोगों को भी जड़ से खत्म करने की क्षमता रखता है। जामुन के गुठली का चूर्ण 3 से 4 दिन लगातार सेवन करने से पुराना से पुराना डायरिया और अतिसार या पतले दस्त से हो रहे रोग को जड़ से खत्म किया जा सकता है। (दस्त (Diarrhea) अतिसार के कारण लक्षण और इसका उपचार)

यदि नवजात शिशु के अंदर डायरिया के लक्षण नजर आ रहे हैं तो ऐसे शिशु को जायफल को पीसकर और बार-बार चटाने से अतिसार में यह अत्यंत लाभप्रद साबित होता है। हालांकि नवजात शिशु को आप हमारे द्वारा बताए गए ऊपर के किसी और औषधि का सेवन ना करवाएं। क्योंकि नवजात शिशु में इम्यून सिस्टम व्यस्क पुरुष के मुकाबले कमजोर होता है। ऐसे में यदि किसी कम आयु के बच्चे में अतिसार अर्थात डायरिया के लक्षण नजर आ रहे हैं। तो उसे जायफल को पीसकर उसको चटाने से कम आयु के बच्चे में अतिसार की बीमारी को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है।

डायरिया अर्थात अतिसार के रोग को जड़ से खत्म करने के लिए नीम की पत्ती का उपयोग किया जा सकता है। नीम के पत्ती के अंदर बहुत सारे ऐसे गुण मौजूद है। जो शरीर के अंदर उत्पन्न हो रहे रोग को हमेशा के लिए खत्म कर सकता है। नीम के उपयोग करने के लिए हमें नीम के कोमल पत्तियां लेनी है। चार से पांच कोमल पति को लेकर अच्छे से साफ कर लेना है। इसे पीसकर इसका पेस्ट तैयार कर लेना है। पेस्ट तैयार होने के बाद इसमें शहद की मात्रा मिलाकर 1 दिन में तीन से चार बार सेवन करने से डायरिया अर्थात पतले हो रहे दस्त में काफी सुधार प्राप्त किया जा सकता है।

डायरिया की रोक को सुधार करने के लिए प्याज का भी बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। प्याज के सेवन करने से शरीर के अंदर उत्पन्न हो रहे डारिया की समस्या को खत्म किया जा सकता है। प्याज का उपयोग करने के लिए हमें एक प्याज लेकर इसे अच्छी तरह से पीसकर इसका जूस बाहर निकाल लेना है। इसका सेवन हमें तीन से चार दिन तक लगातार करना है। 3 से 4 दिन तक लगातार प्याज के जूस के सेवन करने से शरीर के अंदर अतिसार में काफी लाभप्रद साबित होता है। (दस्त (Diarrhea) अतिसार के कारण लक्षण और इसका उपचार)

अतिसार की समस्या को खत्म करने के लिए बेल का पानी भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। गर्मी के समय में बेल का उपयोग करना अतिसार के साथ साथ कई अन्य रोगों को जड़ से खत्म करने के लिए किया जाता है। यदि किसी रोगी को अतिसार की समस्या बहुत विकृत होती जा रही है। तो ऐसे में पके हुए बेल के गुदा को पानी में अच्छी तरह से मिलाकर और थोड़ी सी शक्कर डालकर इसका शरबत बनाकर इसके सेवन करने से अतिसार के रूप में काफी फायदेमंद साबित होता है।

अतिसार और डायरिया के रोग से छुटकारा पाने के लिए पीपल के पत्ते का भी सेवन करना अति आवश्यक है। पीपल के पत्ते में बहुत सारे ऐसे आयुर्वेदिक गुण मौजूद है। जो शरीर के अंदर रोगों से लड़ने की क्षमता को प्रबल बनाता है। साथ ही साथ इसके सेवन करने से अतिसार और डायरिया के रोग को जड़ से खत्म करने में हमारी मदद करता है। पीपल के पत्ते के उपयोग करने के लिए हमें तीन से चार पीपल के पत्ते को अच्छी तरह से धोकर पानी में उबालना है।

इसे तब तक उबलते रहना है। जब तक कि पीपल के पत्ते का रंग बदल ना जाए। पीपल के पत्ते के रंग बदल जाने के बाद हमें इस पानी को किसी छलनी या कपड़े की मदद से अच्छे से छान लेना है। इस पानी का सेवन करने से शरीर के अंदर उत्पन्न हो रहे डायरिया के रोग को हमेशा के लिए जड़ से खत्म किया जा सकता है।

डायरीया और अतिसार की समस्या में लौकी का सेवन भी बहुत फायदेमंद माना जाता है। लोकी हमारे पेट से जुड़ी सभी समस्याओं को समाप्त करने में हमारी मदद करता है। ऐसे में अतिसार की समस्या को भी जड़ से समाप्त करने में लौकी का महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। प्रतिदिन लौकी के जूस के सेवन करने से शरीर के अंदर उत्पन्न हो रहे डायरिया अर्थात अतिसार की समस्या को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है।

आपकी प्रतिक्रिया

हालांकि डायरिया और अतिसार की समस्या को दूर करने के लिए कई तरह के रासायनिक दवाइयों का भी सेवन किया जा रहा है। लेकिन मैं आप सभी से यही कहूंगा कि रसायनिक दवाइयों के सेवन करने से शरीर के अंदर उत्पन्न हो रहे रोग में कुछ समय के लिए इजाफा प्राप्त होता है लेकिन यह रसायनिक दवाई हमारे शरीर के अंदर हो रहे रोग को जड़ से खत्म नहीं कर पाता है (दस्त (Diarrhea) अतिसार के कारण लक्षण और इसका उपचार)

रासायनिक दवाइयों के सेवन करने से शरीर के अंदर साइड इफेक्ट होने की संभावना होती है ऐसे में यदि कोई रोगी पहले से किसी रोग से पीड़ित हो तो साइड इफेक्ट होने के कारण और ज्यादा विकृत होने लगता है अतः आप सभी हमेशा आयुर्वेदिक औषधियों के सेवन करने के साथ-साथ अपने खान-पान के ऊपर परहेज रखें

हालांकि आयुर्वेदिक दवाइयों के सेवन करने से रोग को खत्म करने में कुछ समय लग जाता है लेकिन आयुर्वेदिक दवाइयों के सेवन करने से शरीर के अंदर उत्पन्न हो रहे रोगों को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है और सबसे अच्छी बात यह मानी जाती है कि आयुर्वेदिक दवाइयों के सेवन करने से शरीर के अंदर किसी भी प्रकार के साइड इफेक्ट होने की संभावना नहीं होती है।

रासयनिक दवाइयों के सेवन करने से शरीर के अंदर कई तरह के रोग उत्पन्न होने लगते हैं। लेकिन आयुर्वेदिक दवाइयों का सेवन करने से हमेशा के लिए खत्म तो होते ही हैं। साथ ही साथ यह शरीर के अंदर उत्पन्न हो रहे रोग को भी खत्म करने में हमारी मदद करता है। (दस्त (Diarrhea) अतिसार के कारण लक्षण और इसका उपचार)

यदि आप सभी को मेरे द्वारा दस्त (Diarrhea) अतिसार के बारे में दिया गया जानकारी पसंद आया हो तो आप इसे अपने दोस्त और परिवार के बीच अवश्य शेयर कर दे। दस्त (Diarrhea) अतिसार बहुत ही परेशान कर देने वाला रोग है। अतः आप के द्वारा शेयर करने से यह जानकारी बहुत सारे लोगों को दस्त (Diarrhea) अतिसार के समस्या से राहत  दिला सकता है। (दस्त (Diarrhea) अतिसार के कारण लक्षण और इसका उपचार)

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