टी बी (क्षय रोग) कैसे होता है टी बी के प्रकार लक्षण और इसके उपचार

टी बी (क्षय रोग) कैसे होता है टी बी के प्रकार लक्षण और इसके उपचार

टी बी (क्षय रोग) कैसे होता है टी बी के प्रकार लक्षण और इसके उपचार

टी बी एक ऐसी बीमारी है। जिसे छुआछूत की नजरों से भी देखा जाता है। टी बी का रोग माइकोबैक्टेरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक विषाणु के कारण इंसान को अपने प्रभाव से प्रभावित करता है। टी बी का रोग मनुष्य के शरीर के अंदर फेफड़ों में उत्पन्न होने वाला रोग है। टी बी के रोग के दौरान इंसान के फेफड़े के अंदर का खांसी और बुखार की समस्या उत्पन्न होने लगती है।यह रोग एक व्यक्ति के शरीर से दूसरे व्यक्ति के शरीर में फैलने लगता है। यदि टी बी के रोग का शुरुआती दौर में ही उपचार न किया गया तो या आगे चलकर जानलेवा साबित होने लगता है। हालांकि टी बी का रोग अनुवांशिक रोग नहीं है। लेकिन यदि परिवार के सदस्य में किसी एक को भी टी बी का रोग हो जाए। तो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैल जाता है। टी बी का रोग खाँसने छीक के माध्यम से एक व्यक्ति के दूसरे व्यक्ति से फैलता है। टी बी के रोग का उपचार करने के लिए काफी लंबा समय लगता है। क्योंकि यह एक ऐसा रोग है। जो इंसान के शरीर के अंदर धीरे-धीरे फैलता है। और यदि इसका उपचार करना शुरू किया जाए तो यह धीरे-धीरे ही समाप्त होता है। (टी बी (क्षय रोग) कैसे होता है टी बी के प्रकार लक्षण और इसके उपचार)

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आइए इस लेख के माध्यम से हम टी बी के रोग के कुछ घरेलू उपचार के बारे में विस्तार से जानते हैं। जैसा कि आप सभी को पता है। कि आयुर्वेद के विज्ञान में सभी प्रकार के रोग का उपचार दिया गया है। यदि हमें शुरुआती दौर में ही किसी भी रोग का उपचार करना शुरू कर देते है। तो रोग को आसानी से जड़ से समाप्त किया जा सकता है। घरेलू नुस्खा के माध्यम से यदि हम टी बी के रोग का उपचार करना शुरू कर देते हैं। तो या धीरे-धीरे हमारे शरीर से टी बी के रोग को पूर्ण रूप से समाप्त करने में सफल साबित होता है। हालांकि बाजार में कई प्रकार के ऐसे रासायनिक दवाइयां भी हैं। जिनके सेवन करने से टी बी के रोग को सही किया जा सकता है। लेकिन रासायनिक दवाइयों के सेवन करने से शरीर के अंदर कई प्रकार के साइड इफेक्ट होने की समस्या उत्पन्न होती है। (टी बी (क्षय रोग) कैसे होता है टी बी के प्रकार लक्षण और इसके उपचार)

ऐसे में यदि कोई व्यक्ति पहले से किसी अन्य प्रकार के रोग का उपचार रासायनिक दवाइयों के सेवन से कर रहा हो। और साथ में टी बी का उपचार करने के लिए अन्य प्रकार के रासायनिक दवाइयों का सेवन करता है। तो ऐसे में शरीर के अंदर इससे उत्पन्न होने वाले साइड इफेक्ट घातक परिणाम को उत्पन्न करने के लिए उपयुक्त माने जाते हैं। हम जानते हैं कि इंसान के शरीर में टीबी रोग होने के प्रमुख कारण क्या क्या है। किन किन कारणों से किसी व्यक्ति के शरीर के अंदर टी बी रोग उत्पन्न होने लगता है। ऐसे व्यक्ति जो अधिक मात्रा में धूम्रपान करते हैं। ऐसे व्यक्ति के शरीर के अंदर टी बी के रोग होने की समस्या सबसे जल्दी होती है। अधिक धूम्रपान करने के कारण यह शरीर के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करना शुरू कर देता है। साथ ही साथ टी बी के रोग को उत्पन्न करने में मदद करता है

शराब के अधिक सेवन करने से भी शरीर के अंदर टी बी और क्षय रोग होने की समस्या उत्पन्न होने लगती है। ज्यादा मात्रा में शराब के सेवन करने से ना केवल शरीर के अंदर टी बी और क्षय रोग उत्पन्न होता है। बल्कि इसके साथ-साथ कई अन्य प्रकार के घातक रोग उत्पन्न होने की समस्या उत्पन्न हो जाती है। अधिक मात्रा में शराब के सेवन करने से लीवर और किडनी पर भी इसका बहुत बुरा असर पड़ता है। आजकल के समय में ज्यादातर लोग लिवर और किडनी की समस्या से परेशान होते जा रहे हैं। अधिक मात्रा में शराब का सेवन करना लिवर और किडनी को धीरे धीरे खराब करना शुरू कर देता है। एक समय ऐसा आ जाता है। कि हमारे शरीर के अंदर उपस्थित लिवर और किडनी धीरे धीरे काम करना बंद कर देती है। यदि किसी भी मनुष्य के शरीर के अंदर लिवर और किडनी काम करना बंद कर दे। तो ऐसे में अन्तोगत्वा व्यक्ति की मौत हो जाती है। (टी बी (क्षय रोग) कैसे होता है टी बी के प्रकार लक्षण और इसके उपचार)

टीबी रोग होने के कारण कई बार गंदे वातावरण में रहने को भी उपयुक्त माना जाता है। ऐसे व्यक्ति जो हमेशा गंदे वातावरण में रहते हैं। जहां पर साफ-सफाई का खास ध्यान नहीं रखा जाता है। ऐसे व्यक्ति को भी टी बी अर्थात क्षय रोग होने की समस्या उत्पन्न होने लगती है। गंदे वातावरण में रहने के कारण आसपास कई अन्य प्रकार के बैक्टीरिया और वायरस पाए जाते हैं। जो हमारे स्वसन मार्ग से शरीर के अंदर जाकर टी बी जैसे खतरनाक परिणाम को उत्पन्न करने के लिए उपयुक्त माने जाते हैं। प्रदूषित हवा में सांस लेना भी टी बी और छह रोग के उत्पन्न करने का प्रमुख कारण माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति ऐसे वातावरण में रहता है। जहां पर प्रदूषित हवा चलती हो। और प्रदूषित हवा चलने के कारण व्यक्ति हमेशा प्रदूषित हवा को अपने स्वसन के माध्यम से अंदर लेता है। ऐसे व्यक्ति को भी शरीर के अंदर टी बी होने की समस्या हो जाती है।

आइए हम टी बी रोग के कुछ प्रमुख लक्षणों के बारे में जानते हैं। जिनके माध्यम से किसी भी इंसान को यह पता लग सकता है। कि शरीर के अंदर टी बी के रोग हैं या नहीं है। यदि हम किसी भी रोग के लक्षण को पता लगा ले तो उसके उपचार करने में हमें काफी सहायता प्राप्त होती है। टीबी रोग के दौरान व्यक्ति के शरीर में कई प्रकार की प्रतिक्रियाएं दिखने शुरू हो जाती है। जिसमें भूख का न लगना, सबसे प्रमुख लक्षण माना जाता है। ऐसे व्यक्ति जिनके शरीर में भूख ना लग रहा हो और लंबे समय से भूखे हो ऐसे व्यक्ति को समझ लेना चाहिए कि उनके शरीर में टी बी के रोग के लक्षण आ चुके हैं। अचानक से शरीर से वजन का कम होना भी टी बी के प्रमुख लक्षणों में से एक माना जाता है। किसी कारणवश यदि शरीर का वजन धीरे धीरे कम हो रहा हो या अचानक से शरीर का वजन कम हो रहा हो तो ऐसे में व्यक्ति को इस बातों पर विशेष तरीके से ध्यान देना चाहिए। (टी बी (क्षय रोग) कैसे होता है टी बी के प्रकार लक्षण और इसके उपचार)

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लंबे समय से शरीर के अंदर बुखार बना रहना भी टी बी और क्षय रोग के प्रमुख लक्षण माने जाते हैं। हालांकि बुखार कई कारणों से इंसान के शरीर को प्रभावित करता है। लेकिन यदि लंबे समय से किसी व्यक्ति के शरीर में बुखार बना हुआ हो और वह उतार-चढ़ाव की क्रिया में लिप्त हो तो ऐसे में व्यक्ति को अपने आसपास से किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए। जो कि लंबे समय से शरीर में बुखार का रहना कई अन्य प्रकार के घातक परिणामों को भी उत्पन्न करने के लिए उपयुक्त माना जाता है। शरीर के अंदर लगातार खांसी होना बलगम आना बलगम के साथ कभी रक्त का स्राव होना भी टी बी के रोग के प्रमुख लक्षण माने जाते हैं। (टी बी (क्षय रोग) कैसे होता है टी बी के प्रकार लक्षण और इसके उपचार)

सीने में दर्द होना या सीने का हमेशा भारी भारी सा महसूस होना भी टी बी के प्रमुख लक्षण माने जाते हैं। टी बी के रोग के दौरान व्यक्ति के शरीर के अंदर भारी मात्रा में बलगम बनना शुरू हो जाता है। और यह सीने में भारीपन उत्पन्न करने के लिए उपयुक्त माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति के शरीर में सीने के ऊपर भारी भारी सा महसूस हो रहा हो। तो उन्हें आसपास से किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए। शुरुआती दौर में यदि टी बी के रोग का उपचार करना शुरू कर दिया जाए तो यह लोग आसानी से इंसान के शरीर से खत्म हो जाता है। यदि हम टी बी के रोग को लापरवाही वाली नजरों से देखें तो कभी-कभी जानलेवा साबित हो जाता है। ऐसे में शरीर के अंदर होने वाले किसी प्रकार के प्रतिक्रिया को गंभीरता से लेनी चाहिए। (टी बी (क्षय रोग) कैसे होता है टी बी के प्रकार लक्षण और इसके उपचार)

शुरुआती दौर में यदि इंसान के शरीर के अंदर टी बी के लक्षण नजर आ रहे हैं। तो ऐसे में ज्यादा थकान और कमजोरी का उत्पन्न होना भी इसके प्रमुख लक्षणों में से एक माने जाते हैं। हमेशा इंसान थका थका सा महसूस होता है। साथ ही साथ किसी भी कम भीड़भाड़ वाले काम को करने के बाद भी ज्यादा थकावट महसूस होता है। ऐसे में व्यक्ति के शरीर के अंदर यह सभी लक्षण टी बी के रोग के हो सकते हैं। किसी भी कार्य को करने के दौरान सांस फूलना सांसो को तेज तेज लेना इत्यादि भी टी बी के रोग के प्रमुख लक्षण में से एक माने जाते हैं। (टी बी (क्षय रोग) कैसे होता है टी बी के प्रकार लक्षण और इसके उपचार)

आइए हम जानते हैं कैसे घरेलू नुस्खे और आयुर्वेदिक उपचार ओं के माध्यम से हम टी बी के रोग को आसानी से अपने शरीर से समाप्त कर सकते हैं। जैसा कि मैंने आप सभी को पहले ही बताया है कि टी बी के रोग में किसी भी उपचार के दौरान हमें धैर्य रखना अति आवश्यक है। क्योंकि टी बी और क्षय रोग एक ऐसी बीमारी है। जो इंसान के शरीर के अंदर धीरे-धीरे फैलती है। और यदि हम इसका उपचार करते हैं। तो यह हमारे शरीर को धीरे धीरे छोड़ता है। सबसे पहले आयुर्वेदिक औषधि के बारे में जाने से पहले मैं आप सभी को बताना चाहूंगा। कि कभी भी आप यदि आयुर्वेदिक औषधियों के माध्यम से अपने शरीर के अंदर उत्पन्न होने वाले रोग का उपचार करते हैं। तो आयुर्वेदिक औषधियों के माध्यम से उपचार करने के लिए सबसे पहले आपके अंदर धैर्य का होना अति आवश्यक है। (टी बी (क्षय रोग) कैसे होता है टी बी के प्रकार लक्षण और इसके उपचार)

लहसुन का नाम आपने अवस्य सुना होगा। लहसुन के अंदर कई अन्य प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट कैल्शियम विटामिन कार्बन कैलशियम आयरन इत्यादि पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। जो इंसान के शरीर के अंदर विभिन्न प्रकार के रोगों को जड़ से समाप्त करने में मदद करता है। साथ ही साथ प्रतिदिन लहसुन के सेवन करने से इंसान के शरीर के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ जाती है। आइए हम जानते हैं कैसे लहसुन के उपयोग करके हम शरीर के अंदर उत्पन्न होने वाले टी बी अर्थातक्षय रोग को आसानी से समाप्त कर सकते हैं। लहसुन में भरपूर मात्रा में सल्फ्यूरिक एसिड पाया जाता है। जो टी बी के रोग के दौरान शरीर के अंदर उत्पन्न होने वाले विषाणु को जड़ से समाप्त करने में व्यक्ति की मदद करता है। (टी बी (क्षय रोग) कैसे होता है टी बी के प्रकार लक्षण और इसके उपचार)

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आवश्यकता अनुसार लहसुन ले ले। और एक कप दूध ले ले। एक कप पानी ले ले। तीनों को एक साथ उबालें जब तक की है चार से पांच चम्मच के बराबर न बच जाए। जब यह 4 चम्मच बस जाए तो इसे सुबह-शाम प्रतिदिन सेवन करें। 10 से 12 दिन लगातार इस नुस्खे के सेवन करने से शरीर के अंदर टी बी और क्षय रोग की समस्या में आसानी से सुधार प्राप्त किया जा सकता है। साथ ही साथ प्रतिदिन आप सुबह खाली पेट 4 से 5 कच्ची लहसुन की कलियां को चबाकर एक गिलास पानी का सेवन अवश्य करें। प्रतिदिन लहसुन के सेवन करने से शरीर के अंदर टीबी रोग के साथ-साथ कई प्रकार के रोगों में भी राहत महसूस होता है। (टी बी (क्षय रोग) कैसे होता है टी बी के प्रकार लक्षण और इसके उपचार)

आइये अब अगले नुस्खे के बारे में जानते हैं। टी बी के रोग को जड़ से समाप्त करने के लिए एक पका हुआ केला ले ले। पके हुए केले को नारियल पानी में अच्छी तरह से मथ कर इसका पेस्ट बना लें। इसमें 4 से 5 चम्मच दही मिलाएं। और एक से दो चम्मच शहद मिलाकर इसके अच्छी तरह से पेस्ट बना लें। पूरे दिन इसके सेवन करते रहने से टी बी से पीड़ित रोगी को काफी कम समय में ही राहत प्राप्त होता है। साथ ही साथयह नुस्खा बिल्कुल आयुर्वेदिक है। इसके सेवन करने से शरीर के अंदर किसी प्रकार के साइड इफेक्ट या क्षति होने की संभावना नहीं होती है। किसी भी व्यक्ति को यह नुस्खा आसानी से अपने प्रभाव से फायदा और राहत महसूस करवाने में सफल साबित होता है। (टी बी (क्षय रोग) कैसे होता है टी बी के प्रकार लक्षण और इसके उपचार)

प्रतिदिन कच्चे आंवले के सेवन करने से भी टी बी के रोग में काफी राहत महसूस होता है। ऐसे व्यक्ति जो लंबे समय से टी बी के रोग से पीड़ित है। ऐसे व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक से दो कच्चे आंवले का सेवन करना चाहिए। साथ ही साथ टी बी से पीड़ित व्यक्ति कच्चे आंवले के जूस का भी सेवन कर सकते हैं। यह दोनों प्रकार से व्यक्ति के लिए फायदेमंद होता है। आप अपने स्वाद को और बेहतर बनाने के लिए आंवले के साथ शहद का सेवन कर सकते हैं। या जब आप जूस बना रहे हो तब भी आप इसमें एक से दो चम्मच शहद मिलाकर इसका सेवन कर सकते हैं। यह नुस्खा 10 से 12 दिन लगातार उपयोग करते रहने से टी बी से पीड़ित व्यक्ति को अल्प समय में ही इसका परिणाम दिखने लगता है। (टी बी (क्षय रोग) कैसे होता है टी बी के प्रकार लक्षण और इसके उपचार)

टी बी से पीड़ित व्यक्ति को प्रतिदिन संतरे के जूस का सेवन करना अति आवश्यक माना जाता है। संतरे के जूस के नियंत्रण सेवन करने से टी बी से पीड़ित व्यक्ति को टी बी के रोग में काफी राहत और सुधार महसूस होता है। साथ ही साथ संतरे के जूस के सेवन करने से शरीर के अंदर बन रहे बलगम की समस्या को भी आसानी से समाप्त किया जा सकता है। संतरे के अंदर बहुत सारे ऐसे एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं। जो टी बी से पीड़ित मरीजों के लिए अमृत के समान माना जाता है। प्रतिदिन संतरे के जूस के सेवन करने से बलगम और खांसी की समस्या में भी काफी राहत महसूस किया जा सकता है। (टी बी (क्षय रोग) कैसे होता है टी बी के प्रकार लक्षण और इसके उपचार)

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