टाइफाइड मियादी बुखार मोतीझरा आंत्र ज्वर के लक्षण कारण और उपचार

टाइफाइड मियादी बुखार मोतीझरा आंत्र ज्वर के लक्षण कारण और उपचार

टाइफाइड मियादी बुखार मोतीझरा आंत्र ज्वर के लक्षण कारण और उपचार

टाइफाइड की समस्या ना केवल भारत में फैल रही है। बल्कि टाइफाइड की समस्या अन्य सभी देशों में भी बड़े तीव्र गति से फैलती जा रही है। टाइफाइड की समस्या किसी भी उम्र के लोगों को आसानी से अपने प्रभाव में ले लेती है। हम सभी जानते हैं कि हमारे जीवन में जल का कितना महत्व है। यदि हम अपने जीवन से जल को हटा दें। तो हमारा जीवन बिल्कुल समाप्त हो जाएगा। और टाइफाइड की गंभीर समस्या किसी भी इंसान के अंदर दूषित जल के सेवन करने से ही होता है। (टाइफाइड मियादी बुखार मोतीझरा आंत्र ज्वर के लक्षण कारण और उपचार)

पानी का महत्व हमारे जीवन में कितना अधिक है। यह हम सभी को ज्ञात है। यदि हमारे जीवन में पानी ना हो तो हम जीवन की कल्पना तक नहीं कर सकते हैं। अतः हमें अपने पानी के सेवन पर विशेष तरीके से ध्यान देना अति आवश्यक है। यदि हम शुद्ध पानी का सेवन नहीं करते हैं। तो इससे ना केवल टाइफाइड जैसी गंभीर समस्या उत्पन्न होती है। बल्कि हमारे शरीर के कई अन्य ऑर्गंस भी काम करने बंद कर देते हैं। जैसे कि किडनी लीवर दिल से जुड़ी कई तरह की समस्या हमारे शरीर के अंदर उत्पन्न होने लगती है। दूषित जल के सेवन करने से पानी से उत्पन्न होने वाली कई तरह की समस्याएं हमारे शरीर के अंदर होने लगती है

जिसमें से टाइफाइड भी शामिल है। तो आइए हम जानते हैं कि टाइफाइड क्या है। टाइफाइड के लक्षण क्या है। और टाइफाइड के उपचार क्या हैं। हम इन सभी जानकारी को आज विस्तार से जानेंगे। टाइफाइड को आंत्र ज्वर के नाम से भी जाना जाता है। टाइफाइड की समस्या को अलग अलग जगहों पर अलग अलग नाम से जाना जाता है। अंग्रेजी में अगर बात करें तो इसे हम टाइफाइड के नाम से जानते हैं। कई जगह इसे मियादी बुखार के नाम से भी जाना जाता है। और बहुत सारी जगह इसे मोतीझरा के नाम से भी जानते हैं। इन सभी नामों को बस एक रोग से जोड़ा जाता है। जिसे हम टाइफाइड कहते हैं। (टाइफाइड मियादी बुखार मोतीझरा आंत्र ज्वर के लक्षण कारण और उपचार)

टाइफाइड के गंभीर रोग की समस्या के कारण पूरे भारत देश में लगभग 3 से 3.5 लाख लोग प्रति साल प्रभावित होते हैं। टाइफाइड होने का मुख्य कारण Salmonella Typhi नामक जीवाणु होता है। यह जीवाणु मनुष्य के द्वारा दूषित पानी पीने के कारण या दूषित भोजन के सेवन करने के कारण शरीर के अंदर प्रभाव डालती है। जैसा की मैंने आप सभी को पहले भी बताया है। टाइफाइड की गंभीर समस्या हमारे शरीर के अंदर दूषित पानी और दूषित भोजन के सेवन करने से ही होता है। यदि किसी मनुष्य को टाइफाइड की समस्या उत्पन्न हो जाती है। 

यह जल्द से जल्द सही नहीं होती। इसे सही होने के लिए एक निश्चित समय की आवश्यकता होती है। इसी कारण से टाइफाइड के इस गंभीर समस्या को मियादी बुखार के नाम से भी जाना जाता है। टाइफाइड के बुखार को हम मोतीझरा के नाम से भी जानते हैं। क्योंकि टाइफाइड मियादी बुखार में हमारे पेट के ऊपर छोटे-छोटे सफेद रंग के दाने हो जाते हैं। इसी कारण से इस बुखार को मोतीझरा के नाम से भी जाना जाता है। टाइफाइड के इस बुखार को आंत्र ज्वर भी कहा जाता है। क्योंकि इस समस्या में रोगी के शरीर के अंदर आंतों में सूजन आ जाना आंतो के ऊपर घाव का आ जाना आम बात हो जाती है। (टाइफाइड मियादी बुखार मोतीझरा आंत्र ज्वर के लक्षण कारण और उपचार)

इसी कारण से इस समस्या को हम आंत्र ज्व के नाम से भी जानते हैं। हालांकि यह रोग तो किसी भी उम्र के इंसान को आसानी से प्रभावित कर सकता है। लेकिन यदि देखा जाए तो यह कम आयु के बच्चे को अपने प्रभाव से ज्यादा प्रभावित करती है। या दूसरे शब्दों में कहा जाए तो यह रोग ऐसे बच्चों और लोगों को ज्यादा प्रभावित करती है। जिनकी शरीर के अंदर की पाचन शक्ति कमजोर होता है। आइए हम जानते हैं कि टाइफाइड के होने के मुख्य कारण कौन से हैं। जैसा कि मैंने आप सभी को पहले भी बताया है कि टाइफाइड हमारे द्वारा किए गए दूषित पानी के सेवन से होता है।

या दूसरे शब्दों में कहा जाए तो यदि हम अपने भोजन में दूषित भोजन या दूषित पानी का सेवन करते हैं। तो हमारे शरीर के अंदर टाइफाइड होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे लोग जो गंदे माहौल में रहते हैं। जहां आस-पास में ज्यादा गंदगी हो तो ऐसे लोगों को टाइफाइड होने की संभावना ज्यादा होती है। या फिर कोई ऐसा इंसान जो बहुत ज्यादा भीड़ भाड़ वाले इलाके में रहता हो ऐसे इंसान को भी टाइफाइड होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है। यदि किसी स्वस्थ इंसान के पड़ोस में टाइफाइड से पीड़ित लोग रहते हैं। और वह अपना मल त्याग खुले में करते हैं। तो मल से निकलने वाले जीवाणु के कारण भी पास के रहने वाले स्वस्थ इंसान को टाइफाइड की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। (टाइफाइड मियादी बुखार मोतीझरा आंत्र ज्वर के लक्षण कारण और उपचार)

दूषित पानी के सेवन करने से दूषित भोजन के सेवन करने से बिना साफ किए हुए सब्जी के सेवन करने से बिना साफ़ किए हुए फलों के सेवन करने से या फिर बाजार में मिल रहे खुले में रखे हुए किसी भी पदार्थ के सेवन करने से भी टाइफाइड जैसी गंभीर समस्या उत्पन्न होने लगती है। अर्थात दूसरे शब्दों में कहा जाए तो कभी भी हमें बिना साफ़ किये बिना सब्जी का सेवन नहीं करना चाहिए बिना साफ किए हुए फलों का सेवन नहीं करना चाहिए। और बाजार से खुले में मिल रहे पदार्थों का सेवन कभी नहीं करना चाहिए। क्योंकि किसी भी स्वस्थ इंसान के शरीर के अंदर टाइफाइड की समस्या तभी उत्पन्न होती है।

जब वह दूषित भोजन और दूषित पानी का सेवन करता है। यदि हम सभी को टाइफाइड जैसे गंभीर समस्या से बचना है। तो हमें इन सब चीजों पर खास ध्यान देना होगा। टाइफाइड की समस्या में किसी भी व्यक्ति को 103 से 104 फारेनहाइट तक का बुखार हो सकता है। टाइफाइड के लक्षण को पहचानने के लिए शरीर के ऊपर हो रहे गुलाबी रंग के धब्बे को देखा जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को टाइफाइड के लक्षण नजर आ रहे हैं। तो सर का घूमना सर में दर्द होना बार बार उल्टी होना जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं। कम आयु के बच्चे को हमेशा दस्त की शिकायत होती है। (टाइफाइड मियादी बुखार मोतीझरा आंत्र ज्वर के लक्षण कारण और उपचार)

यदि किसी कम आयु के बच्चे को टाइफाइड की समस्या उत्पन्न हो रही है। तो ऐसे बच्चों को दस्त की समस्या उत्पन्न होने लगती है। वहीं दूसरी तरफ देखा जाए तो व्यस्क पुरुष के अंदर यदि टाइफाइड की समस्या उत्पन्न हो रही है। तो उन्हें कब्ज की समस्या उत्पन्न हो जाती है। दोनों एक दूसरे से विपरीत लक्षण में आते हैं। यदि टाइफाइड के समस्या का शुरुआती दौर में ही उपचार नहीं किया जाए तो आगे चलकर यह आंतो के लिए गंभीर समस्या बन जाती है। जैसा कि मैंने आप सभी को पहले भी बताया है इसे आंत का ज्वर के नाम से भी जाना जाता है।

और आंतों में सूजन और घाव हो जाना आम बात हो जाती है। यदि टाइफाइड की समस्या को शुरूआत से ही अच्छे उपचार में ना दिखाया जाए तो यह घाव आगे जाकर शरीर के अंदर अल्सर का रूप धारण कर लेती है। और यदि यह आंत में फूट जाए तो कभी-कभी इंसान की जान भी चली जाती है। टाइफाइड के रोगी को ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन करना लाभदायक होता है। जितनी ज्यादा मात्रा में टाइफाइड के रोगी तरल पदार्थ का सेवन करेंगे। उनके रोग के लक्षण और उपचार उतनी अधिक मात्रा में हो सकेगी। टाइफाइड के रोगी को पूरे दिन में 3 से 4 लीटर तरल पदार्थ का सेवन करना अति आवश्यक है। (टाइफाइड मियादी बुखार मोतीझरा आंत्र ज्वर के लक्षण कारण और उपचार)

टाइफाइड के मरीज को किसी भी प्रकार के सब्जी और फल के सेवन करवाने से पहले उसे अच्छी तरह से साफ कर लेना अति आवश्यक है। ताकि आगे चल के रोगी को किसी अन्य प्रकार के इंफेक्शन का सामना ना करना पड़े। कोशिश करें कि ज्यादा मात्रा में टाइफाइड के रोगी को दलिया खिचड़ी उबली हुई दाल का सेवन करवाएं। टाइफाइड के रोगी को नारियल पानी फलों का जूस और सूप का भी सेवन करवाना चाहिए। टाइफाइड को जड़ से खत्म करने के लिए टाइफाइड के रोगी को बाहर अर्थात बाजार की चीजों के सेवन करने से परहेज करना चाहिए।

यदि टाइफाइड के रोगी को बाजार किस वस्तु के सेवन करने की आदत है। तो उसे इसे जल्द से जल्द खत्म करनी चाहिए। क्योंकि टाइफाइड के रोग को जड़ से खत्म करने के लिए हमें बाजार से बनी वस्तु का सेवन करना बंद करना होगा। टाइफाइड से पीड़ित रोगी को जंक फूड मैदे से बनी हुई चीजें बेसन से बनी हुई चीजें या फिर मसालेदार चीजों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। आइए हम जानते हैं कि टाइफाइड की समस्या को हम घरेलू नुस्खे अर्थात आयुर्वेद के साथ कैसे जड़ से खत्म कर सकते हैं। (टाइफाइड मियादी बुखार मोतीझरा आंत्र ज्वर के लक्षण कारण और उपचार)

सबसे पहले नुस्खे को तैयार करने के लिए पुदीना के पत्ते तुलसी और लौंग की आवश्यकता होगी। आप सभी को पुदीना के पत्ते तुलसी और लौंग को पीसकर या फिर इसे उबालकर उसका सेवन करना है। अगर आपको यह कड़वा लगे तो आप स्वाद को ज्यादा बेहतर बनाने के लिए इसमें शहद का उपयोग कर सकते हैं। इस औषधि के सेवन करने से शरीर के अंदर हो रहे टाइफाइड के जीवाणु को आसानी से खत्म किया जा सकता है।

आप सभी ने गिलोय का नाम सुना होगा। गिलोय का सेवन शहद के साथ पूरे दिन में दो से तीन बार करने से टाइफाइड के रोग में सुधार आता है। गिलोय के जूस के सेवन करने से यह ना केवल आपके शरीर के अंदर टाइफाइड की समस्या को जड़ से खत्म करता है। बल्कि यह आपके शरीर के अंदर मधुमेह दिल की बीमारी रक्त से जुड़ी समस्याओं को जड़ से खत्म करने में सफल साबित होता है। (टाइफाइड मियादी बुखार मोतीझरा आंत्र ज्वर के लक्षण कारण और उपचार)

टाइफाइड की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए किशमिश और मुनक्का दोनों को हल्की आग में भूनकर खाने से बहुत ज्यादा लाभ मिलता है। किशमिश और मुनक्का को भूनकर खाने से शरीर के अंदर बढ़ रहे टाइफाइड के बैक्टीरिया में काफी गिरावट अर्थात खत्म होने की संभावना बढ़ जाती है। आइए हम जानते हैं कि टाइफाइड के रोगी को किन-किन सावधानियों को बरतनी चाहिए। जिससे उनके शरीर के अंदर फैल रहे टाइफाइड की समस्या को आसानी से रोका जाए। टाइफाइड के रोगी को अपने आसपास साफ सुथरा रखना चाहिए।

टाइफाइड से जूझ रहे रोगी को उपयोग में किया जाने वाला सामान जैसे बर्तन तौलिया बिस्तर कपड़े इन सब को अन्य लोगों से अलग रखना चाहिए। हमारे भारत देश में हर एक साल 22 मार्च को वर्ल्ड वाटर डे अर्थात वर्ल्ड टाइफाइड डे मनाया जाता है। ताकी हमारे देश के उन सभी नागरिकों को टाइफाइड के बारे में पूर्ण रुप से जानकारी हो। और वह अपने जीवन को टाइफाइड से मुक्त और रोग रहित रह सकें। (टाइफाइड मियादी बुखार मोतीझरा आंत्र ज्वर के लक्षण कारण और उपचार)

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