क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर की जीवनी

क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर की जीवनी

क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर की जीवनी

क्रिकेट एक ऐसा खेल है। जिसे पूरे दुनिया भर में खेल की तरह नहीं धर्म की तरह माना जाता है। और यदि हम क्रिकेट खेल जगत की बात करें। तो सचिन तेंदुलकर का नाम सबसे ऊपर आता है। जैसा कि मैंने आपको बताया है। कि क्रिकेट पूरी दुनिया में खेल की तरह नहीं धर्म की तरह माना जाता है। और इस धर्म का भगवान सचिन तेंदुलकर को माना जाता है। सचिन तेंदुलकर क्रिकेट खेल जगत के ऐसे खिलाड़ी है। जिन्होंने क्रिकेट के खेल को एक ऊंचाई प्रदान किया हैं। (क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर की जीवनी)

सचिन तेंदुलकर क्रिकेट जगत के एक ऐसे खिलाड़ी हैं। जिन्होंने क्रिकेट के खेल को बहुत ज्यादा प्रभावशाली खेल साबित कर दिया। कहा जाता है कि यदि सचिन तेंदुलकर क्रिकेट खेलने के दौरान किसी कारणवश आउट हो जाते थे। तो क्रिकेट देखने वाले अपना टेलीविजन बंद करके क्रिकेट देखना छोड़ देते थे। सचिन तेंदुलकर के खेल के ऊपर अटूट विश्वास का कारण सचिन तेंदुलकर के प्रभावशाली खेल को ही माना जाता है। सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट के खेल के भगवान मानने के लिए बहुत सारे कारण हैं। 

यदि हम क्रिकेट खेल के रिकॉर्ड की बात करते हैं। तो सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड सबसे ऊपर आता है। चाहे वह सबसे ज्यादा शतक मारने का रिकॉर्ड हो। सबसे ज्यादा मैच खेलने का रिकॉर्ड हो। सबसे ज्यादा छक्के मारने का रिकॉर्ड हो। या फिर सबसे ज्यादा चौके मारने का रिकॉर्ड हो। यदि हम इन सभी तरह के रिकॉर्ड का बात करते हैं। तो सचिन तेंदुलकर का नाम सबसे ऊपर आता है। सचिन तेंदुलकर ने अपने जीवन में ऐसे प्रभावशाली खेल को खेला है। जिसके कारण यह सभी रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम के साथ जुड़ चुका है। (क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर की जीवनी)

सचिन तेंदुलकर के खेल खेलने के तरीके का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं। कि ऑस्ट्रेलिया की एक अच्छे खिलाड़ी ने सचिन तेंदुलकर के खेल को देख कर कहा था। कि यदि आप गुनाह करना चाहते हैं। तो तब करें जब सचिन तेंदुलकर क्रिकेट खेल रहे हो। उनका ऐसा कहने के पीछे एक खास कारण था। वह कहते हैं कि जब सचिन तेंदुलकर क्रिकेट खेल रहे होते हैं। तो भगवान भी उस समय उनके खेल को देख रहे होते हैं। सचिन तेंदुलकर खेल जगत के एक ऐसे खिलाड़ी हैं। जिन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया है।

आपको यह जानकर बड़ी हैरानी होगी कि सचिन तेंदुलकर को न सिर्फ भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया है। बल्कि सचिन तेंदुलकर को इसके अलावा राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। सचिन तेंदुलकर के जीवन की कुछ अच्छी बातों की अगर बात की जाए तो सचिन तेंदुलकर ना केवल खेल-जगत के लिए प्रसिद्ध है। बल्कि सचिन तेंदुलकर अपने खेल के साथ-साथ उदार दिली भी हैं। सचिन तेंदुलकर प्रति वर्ष 300 से 400 बच्चों का भरण पोषण का जिम्मेदारी उठाते हैं। इसी कारण से सचिन तेंदुलकर एक NGO भी चलाते हैं। (क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर की जीवनी)

जिसमें अनाथ और गरीब बच्चों का भरण पोषण सचिन तेंदुलकर अपने पैसों से करते हैं। भारत के धुरंधर क्रिकेट खेलने वाला तेंदुलकर का जन्म 24 अप्रैल 1973 को हुआ था। सचिन तेंदुलकर का जन्म राजापुर मुंबई में हुआ था। सचिन तेंदुलकर के पिता का नाम श्री रमेश तेंदुलकर था। पेशे से सचिन तेंदुलकर के पिता श्री रमेश तेंदुलकर एक प्रोफेसर और लेखक भी थे। सचिन तेंदुलकर के माता का नाम रजनी तेंदुलकर था। और पेशे से सचिन तेंदुलकर की माता रजनी एक इंश्योरेंस कंपनी में काम करती थी। यह बहुत कम लोगों को पता होगा कि सचिन तेंदुलकर अपने पिता रमेश तेंदुलकर के दूसरी पत्नी के पुत्र थे। सचिन तेंदुलकर के श्री रमेश तेंदुलकर पहली पत्नी से इन्हें तीन संताने हैं। 

तीन संतानों मैं दो पुत्र और एक पुत्री थी। पुत्र का नाम अजीत और नितिन और पुत्री का नाम सविता था। यह तीनों भाई बहन सचिन तेंदुलकर से उम्र में बड़े हैं। सचिन तेंदुलकर के नाम रखने के पीछे भी एक कहानी है। कहा जाता है कि सचिन तेंदुलकर के पिता रमेश तेंदुलकर सचिन देव बर्मन गायक के बहुत अच्छे फैन थे। इसी कारण से रमेश तेंदुलकर ने अपने पुत्र का नाम सचिन तेंदुलकर रखा था। सचिन तेंदुलकर को अपने बचपन के दिनों से ही क्रिकेट खेलना बहुत ज्यादा पसंद था। लेकिन शुरुआती समय में तेंदुलकर बहुत ही शरारती बच्चे हुआ करते थे। इसी कारण से अक्सर सचिन तेंदुलकर को अपने स्कूल में किसी न किसी से लड़ाई हो जाया करती थी। (क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर की जीवनी)

दिन प्रतिदिन शरारत बढ़ते जाने के कारण और सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट में ज्यादा रुचि लेने के कारण इनके बड़े भाई अजीत ने 1984 में क्रिकेट एकेडमी ज्वाइन कराने की सोची। इसी कारण से सचिन तेंदुलकर के बड़े भाई ने उस समय के सबसे प्रसिद्ध क्रिकेट कोच रमाकांत आचरेकर के पास सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट की टीम को ज्वाइन करने के लिए ले कर गए। जब पहली बार सचिन तेंदुलकर के भाई अजीत ने सचिन तेंदुलकर को रमाकांत आचरेकर के पास ले कर गए। तो रमाकांत आचरेकर ने सचिन को क्रिकेट के खेल का प्रदर्शन दिखाने के लिए कहा। 

लेकिन इस समय छोटी उम्र में सचिन तेंदुलकर घबरा गए। और रमाकांत आचरेकर के सामने अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए। अच्छे प्रदर्शन ना करने के कारण रमाकांत आचरेकर क्रिकेट टीम के अकैडमी में ज्वाइन करने से मना कर दिया। सचिन सचिन तेंदुलकर के बड़े भाई को यह मालूम था की सचिन तेंदुलकर नर्वस होकर अच्छा नहीं खेल पा रहा है। इसी कारण से सचिन तेंदुलकर के बड़े भाई ने रमाकांत आचरेकर को एक बार फिर से गुहार लगाई। बार-बार गुहार लगाने के कारण रमाकांत आचरेकर ने फिर से एक बार सचिन तेंदुलकर के खेल देखने के लिए तैयार हो गए। सचिन तेंदुलकर को खेल के प्रदर्शन करने के लिए कहा गया। लेकिन उस समय रमाकांत आचरेकर एक पेड़ के पीछे से छिपकर सचिन तेंदुलकर के खेल को देख रहे थे। (क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर की जीवनी)

और इस बार सचिन तेंदुलकर ने बहुत अच्छा खेल का प्रदर्शन दिखाया। रमाकांत आचरेकर भी समझ चुके थे। सचिन तेंदुलकर की अभी उम्र छोटी है। इसी कारण से वह सबके सामने में खेलने से घबरा रहा है। लेकिन सचिन तेंदुलकर के क्रिकेट के खेल में अच्छे प्रदर्शन दिखाने के कारण रमाकांत आचरेकर ने उन्हें अपने पास सिखाने के लिए राजी हो गए। आगे चलकर रमाकांत आचरेकर को सचिन तेंदुलकर के बैट पकड़ने के तरीके पर आपत्ति होने लगी। उनका मानना था। कि सचिन तेंदुलकर बैट को बहुत नीचे की ओर पकड़ते हैं। जिससे अच्छे शॉट लगाने में काफी ज्यादा तकलीफ हो सकती है। इसी कारण से रमाकांत आचरेकर सचिन तेंदुलकर को बैठ को थोड़ा ऊपर पकड़ने की सलाह दिया करते थे। 

सचिन तेंदुलकर ने भी अपने गुरु रमाकांत आचरेकर की बात मानने लगे। लेकिन बैठ को ऊपर पकड़ने के कारण सचिन तेंदुलकर के खेल में प्रदर्शन दिन-प्रतिदिन गिरते जा रहे थे। उन्हें बैट के ऊपरी हिस्से को पकड़कर खेलने में बहुत ज्यादा असहजता प्राप्त हो रही थी। इसी कारन से धीरे-धीरे जब सचिन तेंदुलकर को लगने लगा कि अब वह पर पकड़ के खेल नहीं पा रहे हैं। तो उन्होंने रमाकांत आचरेकर को फिर से विनती की उन्हें पेट के निचले हिस्से को पकड़कर ही खेलने दिया जाए। सचिन तेंदुलकर का कहना है कि जब वह बचपन मैं क्रिकेट खेला करते थे। तो वह अपने बड़े भाई के बल्ले के साथ खेला करते थे। 

उनकी छोटी सी आयु में अपने बड़े भाई के बल्ले के द्वारा खेलने में उन्हें काफी तकलीफ होती थी। सचिन तेंदुलकर के छोटे-छोटे हाथ और कमजोर हाथ होने के कारण वह बल्ले को सही से संभाल नहीं पाते थे। उसी समय से सचिन तेंदुलकर ने उस भारी बल्ले को नीचे से पकड़कर खेलना शुरु किया और हम सभी आज भी देख सकते हैं। कि सचिन तेंदुलकर का यह आदत आज भी क्रिकेट पिच पर देखा जा सकता था। वह हमेशा बल्ले को नीचे की ओर पकड़कर ही खेला करते थे। सचिन तेंदुलकर के अच्छे खेल खेलने के कारण रमाकांत आचरेकर बहुत प्रभावित हुए। (क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर की जीवनी)

और रामाकांत सचिन तेंदुलकर को विद्या आश्रम मंदिर विद्यालय में पढ़ने के लिए भेज दिया। क्योंकि उस विद्यालय में क्रिकेट खेल अच्छे-अच्छे प्रतिभाशाली खिलाड़ी थे। सचिन तेंदुलकर के गुरु का मानना था। कि यदि इनको अच्छा वातावरण में रखा जाए। तो यह आगे चलकर एक सफल खिलाड़ी बन सकते हैं। इन्हीं सब बातों को सोच कर सचिन तेंदुलकर के गुरु ने इनका दाखिला विद्या आश्रम मंदिर में करवा दिया। इस तरह से विद्यालय में दाखिला लेने के बाद सचिन तेंदुलकर अच्छे टीम के साथ खेलने लगे। जब भी सचिन तेंदुलकर को अपने पढ़ाई से समय मिलता था। वह पास के शिवाजी पार्क में अपने गुरु की देखरेख में खेलने चले जाते थे। 

कहां जाता है कि सचिन तेंदुलकर को और ज्यादा निखारने के लिए उनके गुरु सचिन तेंदुलकर के क्रिकेट टीम में आते ही एक सिक्का रख देते थे। और कहते थे जो भी सचिन तेंदुलकर को आउट कर देगा। उसे यह सिक्का मिलेगा। और यदि कोई सचिन तेंदुलकर को आउट नहीं कर पाता है। तो यह सिक्का सचिन तेंदुलकर को मिलेगा। उस समय के वह 13 सिक्के आज भी उनके पास हैं। जिन्हें वह जीवन में अलग नहीं कर सकते। सचिन तेंदुलकर का मानना है कि यह 13 सिक्के उनके जीवन के इनाम के तौर पर उनके पास रहती है। अपनी लगातार मेहनत और क्रिकेट के प्रति अटूट प्यार होने के कारण सचिन तेंदुलकर का खेल बहुत जल्दी दुनिया वालों के सामने निकल कर आने लगा। अच्छे क्रिकेट के खेल खेलने के कारण सचिन तेंदुलकर की चर्चा चारों तरफ होने लगी। (क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर की जीवनी)

सचिन तेंदुलकर स्कूल की तरफ से खेलना शुरु कर चुके थे। धीरे-धीरे सचिन तेंदुलकर अपने स्कूल के खेल की तरफ से मुंबई के अच्छे-अच्छे टीमों के साथ भी खेलना शुरु कर दिए थे। आपको यह जानकर बड़ी हैरानी होगी कि शुरुआती दौर में सचिन तेंदुलकर को बैटिंग नहीं बॉलिंग का बहुत ज्यादा शौक था। सचिन तेंदुलकर हमेशा से अच्छे बॉलर बनना चाहते थे। इसी सब कारण से 1887 में सिर्फ 14 साल की आयु में ही सचिन तेंदुलकर बॉलिंग सीखने के लिए मद्रास के बेस्ट फाउंडेशन गए। यहां पर ऑस्ट्रेलिया के सबसे तेज गेंदबाज के द्वारा बॉलिंग करने की कला सिखाई जाती थी। लेकिन जब सचिन तेंदुलकर यहां पहुंचे तो वहां के कोच ने सचिन तेंदुलकर की बैटिंग और बॉलिंग दोनों को देखा। 

और सचिन तेंदुलकर को यह सुझाव दिया कि वह बॉलिंग की ओर ज्यादा ध्यान ना दें। उन्होंने सचिन तेंदुलकर को यह सुझाव दिया कि उनकी बैटिंग बहुत अच्छी है। अपने बैटिंग और ज्यादा सुधारने की तरफ ध्यान दें। सचिन तेंदुलकर ने भी उन सभी कोच की बात मान ली। आप लोगों को मैं एक और बात बताने जा रहा हूं। कि जिस समय सचिन तेंदुलकर मद्रास बॉलिंग सीखने के लिए पहुंचे थे। उसी टीम में भारत के खिलाड़ी सौरभ गांगुली भी शामिल थे। लेकिन जैसा वहां के सभी कोच ने सचिन तेंदुलकर को बोला कि वह बैटिंग पर ज्यादा ध्यान दें। इसी तरह से वहां के सभी कोच ने सौरव गांगुली को भी कहा कि आप बोलिंग की तरफ नहीं बैटिंग की तरफ ध्यान दें। (क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर की जीवनी)

क्योंकि आप आगे जाकर एक अच्छे बल्लेबाज बन सकते हैं। और आगे चल के हम सभी जानते हैं कि सौरभ गांगुली भी एक महान बल्लेबाज बने। इस तरह से सचिन अपने बैटिंग के खेल को धीरे-धीरे सुधारने लगे। और अब एक ऐसा समय आ गया था कि जब सभी क्रिकेट टीम के मेंबर को बेस्ट जूनियर क्रिकेटर अवार्ड मिलने वाला था। बेस्ट चिड़िया क्रिकेट अवॉर्ड में 14 साल के सचिन की भी बहुत ज्यादा दावेदारी मानी जा रही थी। लेकिन जब बेस्ट जूनियर क्रिकेट अवार्ड का समय आया तब सचिन तेंदुलकर को या अवॉर्ड नहीं मिला। सचिन तेंदुलकर इससे बहुत ज्यादा दुखी हुए। 

लेकिन उस समय के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने सचिन तेंदुलकर के मनोबल को बढ़ाने के लिए अपने द्वारा खेली गई एक पैड की जोड़ी प्रदान की थी। इस तरह से 14 नवंबर 1987 को सचिन तेंदुलकर पहली बार रणजी ट्रॉफी के लिए मुंबई जब से खेलने का अवसर प्राप्त हुआ था। लेकिन जब टीम सिलेक्शन की बात आई तो एक ग्यारह मेंबर में कहीं भी सचिन तेंदुलकर को नहीं चुना गया था। सचिन तेंदुलकर को इस टीम में बस रिप्लेसमेंट फील्डर के लिए चुना गया था। यदि खेल खेलने के समय में इन चुने हुए एक 11 खिलाड़ियों में से कोई रिप्लेसमेंट करने की जगह पर आता तो वहां पर सचिन तेंदुलकर को भेजा जाता। (क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर की जीवनी)

लेकिन 11 दिसंबर 1988 को सिर्फ 15 साल की कम आयु में ही सचिन तेंदुलकर को दूसरी बार खेलने का मौका मिला। इस खेल में सचिन तेंदुलकर को मुंबई के तरफ से गुजरात के खिलाफ खेलने का मौका मिला। इस खेल में सचिन तेंदुलकर ने नाबाद शतक बनाया। और इस तरह से कम आयु में बनाने वाले शतक के खिलाड़ियों के लिस्ट में सचिन तेंदुलकर का नाम सबसे ऊपर आ गया। और अपने खेल के अच्छे प्रदर्शन करने के कारण 1988 से 1989 के बीच में मुंबई के तरफ से खेले जाने वाले सभी खेल में सचिन तेंदुलकर को सबसे ऊपर रखा गया। (क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर की जीवनी)

1988 से 1989 के बीच में कम उम्र के खिलाड़ियों में सचिन तेंदुलकर का नाम सबसे ऊपर आ गया क्योंकि सचिन तेंदुलकर ने आयु में  मुंबई के सभी खिलाड़ियों से सबसे ज्यादा रन बना चुके थे। सचिन तेंदुलकर ने रजनी और ईरानी ट्रॉफी जैसे खेलों में पहले खेल में शतक बनाने वाले पहले बल्लेबाज साबित हो चुके थे। सचिन तेंदुलकर के बनाया गया उस समय के रिकॉर्ड को आज भी कोई तोड़ नहीं पाया है। अच्छे खेल के प्रदर्शन और क्रिकेट के प्रति अटूट लगाव होने के कारण मात्र 16 साल की आयु में सचिन तेंदुलकर का चयन अंतरराष्ट्रीय खेल खेलने के लिए किया गया था। (क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर की जीवनी)

सचिन तेंदुलकर के अंतरराष्ट्रीय खेल में चयन होने का श्रेय राज सिंह दुर्गापुर को दिया जाता है। क्योंकि कहा जाता है राज सिंह जी ही ऐसे व्यक्ति थे। जो अंतरराष्ट्रीय खेल खेलने के लिए क्रिकेट टीम का चयन किया करते थे। और यह सचिन तेंदुलकर के खेल से इतने प्रभावित हुए थे। कि इन्होंने बस 16 साल की आयु में ही सचिन तेंदुलकर का चयन राष्ट्रीय खेल खेलने के लिए कर दिया था। सचिन तेंदुलकर ने अपने अंतरराष्ट्रीय खेल खेलने की शुरुआत कराची में पाकिस्तान के खिलाफ किया था। सचिन तेंदुलकर ने कराची में हुए पाकिस्तान के मैच खेलते हुए 15 रन बनाए थे। (क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर की जीवनी)

कहा जाता है कि इस मैच खेलने के दौरान सचिन तेंदुलकर को उनके नाक पर तेज गेंद लग चुकी थी। जिसके कारण से उनके नाक से खून आना शुरू हो चुका था। सचिन तेंदुलकर ने 1992 और 1993 में अपना पहला मैच इंडिया में खेला। इसे हम घरेलू मैच भी कह सकते हैं। क्योंकि सचिन तेंदुलकर ने यह खेल भारत में ही खेला था। और यह खेल सचिन तेंदुलकर ने भारत की तरफ से इंग्लैंड के खिलाफ खेला था। और यह टेस्ट में सचिन तेंदुलकर के जीवन का 22वा टेस्ट मैच था। इस तरह से सचिन तेंदुलकर ने भारत की तरफ से ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के खिलाफ भी कई टेस्ट मैच खेले। आप सभी को यह बात जानकर बड़ी हैरानी होगी। कि सचिन तेंदुलकर को एक दिवसीय मैच में अपना पहला शतक लगाने के लिए 79 मैचों का इंतजार करना पड़ा था। (क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर की जीवनी)

लेकिन जब एक बात सचिन तेंदुलकर अच्छे फॉर्म में आ चुके थे। उन उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने बल्लेबाजी की ताकत के दम पर इन्होंने क्रिकेट जगत की वह सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। जो पहले से कायम थे। सचिन तेंदुलकर खेल जगत के एक ऐसे खिलाड़ी हैं। जिनके रिकॉर्ड में 100 शतक मारने का रिकॉर्ड शामिल है। एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के रिकॉर्ड में सचिन तेंदुलकर का दोहरा शतक मारने का रिकॉर्ड सबसे ऊपर माना जाता है। सचिन तेंदुलकर सबसे ज्यादा वनडे इंटरनेशनल खेलने वाले खिलाड़ी भी माने जाते हैं। सचिन तेंदुलकर अपने पूरे जीवन काल में लगभग 463 वनडे मैच खेले हैं।

सचिन तेंदुलकर के अच्छे और प्रभावशाली खेल खेलने के कारण इन्हें कई सारे बहुत सारे पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। 1997 से 1998 में सचिन तेंदुलकर को खेल का सर्वोत्तम पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित किया जा चुका है। 1999 और 2008 में सचिन तेंदुलकर को पदम श्री से भी  सम्मानित किया जा चुका है। आपको यह बात जानकर बड़ी हैरानी होगी कि 2013 में डाक विभाग के द्वारा सचिन तेंदुलकर का डाक टिकट भी जारी किया गया था। भारत के इतिहास में सचिन तेंदुलकर एक पहले ऐसे क्रिकेटर हैं। जिनके नाम से डाक टिकट का शुरूआत किया जा चुका है। 2014 में सचिन तेंदुलकर को भारत के सर्वोत्तम सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया जा चुका है। (क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर की जीवनी)

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