कुपोषण क्या है कुपोषण के कारण लक्षण और उपाय

कुपोषण क्या है कुपोषण के कारण लक्षण और उपाय

कुपोषण क्या है कुपोषण के कारण लक्षण और उपाय

कुपोषण भारत में नहीं बल्कि भारत के अलावा भी बहुत सारे ऐसे देश हैं। जहां पर कुपोषण के रोग से पीड़ितों की संख्या बहुत ज्यादा होती जा रही है। जहां तक हम भारत की बात करें तो भारत के लगभग 50% आबादी कुपोषण के शिकार हैं। कुपोषण कई तरह के हो सकते हैं। कई तरह के कुपोषण आसानी से देखे जा सकते हैं। और कई तरह के कुपोषण आंतरिक होते हैं। आंतरिक कुपोषण को पहचानने के लिए कई सारे लक्षण है। जिससे आसानी से हम पहचान सकते हैं। आज हम सभी जानेंगे किसी व्यक्ति के अंदर किस तरह से कुपोषण रोग फैलती है। (कुपोषण क्या है कुपोषण के कारण लक्षण और उपाय)

सबसे पहले आइए हम जानते हैं कि कुपोषण क्या होता है। जन्म से लेकर मृत्यु तक हमारे शरीर को प्रतिदिन के कार्यों के लिए अर्थात शरीर के बढ़ने और रख रखाव के लिए तथा शरीर को रोगों से बचाने के लिए ऊर्जा और शक्ति की आवश्यकता होती है। जो हमारे भोजन में रहने वाले भोज्य पदार्थ “जिसे हम पोषक तत्वों के नाम से भी जानते हैं।” प्रदान करते हैं। यदि हमारे भोजन में उपरोक्त कार्यों की पूर्ति करने वाले पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। तो शरीर में उनकी कमी से होने वाले लक्षण को हम कुपोषण के रोग के नाम से जानते हैं।

जैसा कि मैंने आप सभी को पहले भी बताया है कि कुपोषण के कई प्रकार हो सकते हैं। कई बार कुपोषण बाहरी अंगों में भी देखे जा सकते हैं। लेकिन ज्यादातर लोगों को कुपोषण आंतरिक रुप से ही परेशान करते हैं। बच्चों में कुपोषण के कारण जन्म के तुरंत बाद बच्चे को मां का पीला गाढ़ा दूध ना पिलाने के कारण भी बच्चों के अंदर कुपोषण का रोग फैलने का कारण हो सकता है। बच्चों के जन्म से लेकर 6 महीने तक नवजात शिशु को केवल मां का स्तनपान ही कराना चाहिए। यदि नवजात शिशु को जन्म के बाद मां का स्तनपान नहीं कराया जाता है तो इस कारण से भी बच्चों में कुपोषण के रोग उत्पन्न होने लगते हैं। (कुपोषण क्या है कुपोषण के कारण लक्षण और उपाय)

बच्चों के उम्र के अनुसार सही समय वह सही तरीके से संतुलित आहार अर्थात उचित आहार ना देने के कारण भी बच्चों के अंदर कुपोषण के विकार उत्पन्न होने लगते हैं। कम उम्र के बच्चों को बार बार दस्त लगना और बार बार बीमार पड़ने के कारण भी कई बार छोटे बच्चों के अंदर कुपोषण के लक्षण देखे जा सकते हैं। महिलाओं में कुपोषण के कारण किशोरियों को अपर्याप्त पोषण व ठीक ढंग से देखभाल ना होने के कारण भी महिलाओं में कुपोषण के लक्षण नजर आने लगते हैं।

महिलाओ का कम आयु में गर्भ का धारण करना अर्थात 20 साल की कम आयु के किसी भी लड़की के गर्भ धारण करने के कारण भी महिलाओं में कुपोषण के लक्षण नजर आने लगते हैं। प्रसव के बाद ठीक ढंग से देखभाल ना करना अथवा उचित मात्रा में पोस्टिक भोजन के सेवन न करने के कारण भी महिलाओं में कुपोषण के लक्षण शुरू हो जाते हैं। बार-बार कम अंतर से गर्भ धारण करना कुपोषण के लक्षण के प्रमुख कारण माने जाते हैं। सामाजिक पाबंदियां और पारंपरिक तरीके जैसे घर में सभी पुरुष के खाना खाने के बाद महिलाओं के खाना खाने के तरीकों के कारण भी कई बार महिलाओं में कुपोषण के लक्षण देखे जा सकते हैं। (कुपोषण क्या है कुपोषण के कारण लक्षण और उपाय)

पुराने ख्याल और पुराने विचार के धारणाओं वाले परिवारों में यदि देखा जाए तो यह देखा जाता है कि महिलाओं का खाना पुरुष के खाने के उपरांत होता है। इस कारण से कई बार महिलाओं के खाने में काफी देर हो जाती है। और उन्हें उचित समय पर सही तरीके से संतुलित भोजन और पौष्टिक भोजन के सेवन ना करने से महिलाओं के अंदर कुपोषण के लक्षण और कुपोषण के कारण शुरू हो जाते हैं। आइये अब हम कुपोषण के प्रकार के बारे में जानते हैं। कुपोषण कितने प्रकार के होते हैं। कम वजन का होना कुपोषण के श्रेणी में सबसे प्रथम माना जाता है।

जब बच्चे का वजन उसकी उम्र तथा लिंग के अनुसार मानक वजन की तुलना में कम हो तो हमें यह समझ लेना चाहिए कि बच्चे कुपोषण के शिकार हो चुके हैं। वजन के साथ साथ यदि किसी बच्चे की लंबाई के अनुसार वजन कम हो बच्चा दुबला कमजोर तथा पतला दिखे और धीरे-धीरे उसके शरीर में वसा तथा मांस पेशियां कम नजर आ रही हो तो हमें यह समझने में बिल्कुल समय ना लगाना चाहिए कि बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। (कुपोषण क्या है कुपोषण के कारण लक्षण और उपाय)

कई बार देखा जाता है कि कुपोषण के शिकार होने के कारण बच्चे बहुत छोटे कद के हो जाते हैं। इस तरह के बच्चे को ठीकना बच्चा भी कहा जाता है। ऐसे बच्चे जिनकी लंबाई उनकी उम्र और लिंग के मानक इकाई के अनुसार कम हो ऐसे बच्चे को कुपोषित कहा जाता है। कुपोषण के कुछ प्रमुख लक्षण है जैसे बच्चे का वजन नहीं बढ़ना या घटना बच्चों को बार बार बीमार पड़ना बच्चा सुस्त चिरचिरा उदास और ज्यादा रोता रहे तो ऐसे में हमें समझ लेना चाहिए कि बच्चे कुपोषण के शिकार होते जा रहे हैं। अथवा हो चुके है।

कम आयु के बच्चे को कुपोषण से बचाने के लिए हमेशा भोज्य पदार्थ में पोषक आहार दें। कम आयु के बच्चों के वजन को ध्यान से देखें। और बच्चों के वजन की वृद्धि का निगरानी रखें। कम उम्र में लड़की की शादी नहीं करनी चाहिए। और कम आयु के बच्चों को बोतल के दूध ना पिलाए। हमेशा ध्यान रखें कि कम आयु के नवजात शिशु को हमेशा मां के स्तनपान के सेवन करना उनके लिए लाभप्रद साबित होता है। कुपोषित बच्चों के आहार में प्रोटीन की कमी से उनके शरीर में प्रोटीन पर्याप्त स्तर पर नहीं पहुंच पाता है। प्रोटीन की कमी के कारण शारीरिक बदलाव होता है। (कुपोषण क्या है कुपोषण के कारण लक्षण और उपाय)

लेकिन यदि किसी कम आयु के बच्चों में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन ना हो तो उनके शरीर के आकार और वजन के बदलाव में बहुत तरह की परेशानी उत्पन्न हो जाती है। यदि कम आयु के शिशु में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन ना हो तो उनके उत्तक को में तरल पदार्थ इकट्ठा हो जाता है। इसे एडिमा के नाम से जाना जाता है। यदि किसी कम आयु के बच्चों में एडिमा के लक्षण है। तो यह कई तरह के बीमारियों के कारण बन सकता हैं। एडिमा के लक्षण में काम आयु के बच्चों को सामान बीमारियां जैसे दस्त निमोनिया आदि से  लगभग 9 गुना मृत्यु का खतरा अधिक होता है।

कुपोषण को अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है। कुपोषण के रोग को कई जगह पर सूखा रोग के नाम से भी जाना जाता है। बच्चों के साथ साथ यदि व्यस्क इंसानों को भी संतुलित आहार या पौष्टिक तत्व भोजन में ना प्राप्त हो तो यह भी कुपोषण के शिकार हो सकते हैं। कुपोषण एक ऐसी समस्या है जिसमें इंसान को सही भोजन सही समय पर प्राप्त नहीं होता है। कुपोषण की बीमारी के होने का बस एक मात्र यही कारण है। कि किसी इंसान के भोजन में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन वसा विटामिन इत्यादि प्राप्त नहीं हो पाते हैं। (कुपोषण क्या है कुपोषण के कारण लक्षण और उपाय)

विशेषज्ञों का भी यह मानना है कि कुपोषण की बीमारी संतुलित आहार के सेवन न करने से शरीर में फैलने वाला रोग है। बच्चों में यह बीमारी विटामिन डी के कमी के कारण होती है। यदि किसी बच्चे में विटामिन डी की कमी है। तो ऐसे बच्चे में कुपोषण का रोग अपना प्रभाव बहुत जल्दी डालने लगता है। कई बार बच्चों के पाचन क्रिया में विकार उत्पन्न होने के कारण बच्चों के द्वारा किए गए भोजन अथवा दूध के सेवन से उनके पेट के अंदर यह ठीक तरह से नहीं पच पाता है। यह भी एक प्रमुख कारण कम आयु के बच्चों के अंदर कुपोषण के रोग के फैलने का हो सकता है।

अधिक चीनी के सेवन करने से भी कुपोषण का रोग एक स्वस्थ इंसान को अपने प्रभाव में ले लेती है। बासी भोजन के सेवन करने से भी कई बार देखा जाता है कि व्यस्क अथवा कम आयु के बच्चों में कुपोषण के लक्षण नजर आने लगते हैं। इस रोग में बच्चे की कमर पतली होने लगती है। और पतले दस्त भी शुरू हो जाते हैं। दोनों नितंब सुख जाते हैं। नाखूनों में सफेदी आने लगती है। यह सभी तरह के लक्षण कुपोषण के हो सकते हैं। (कुपोषण क्या है कुपोषण के कारण लक्षण और उपाय)

आइए हम बात करते हैं कि कैसे हम कुपोषण को अपने घरेलू नुस्खों की मदद से हमेशा के लिए अपने परिवार और अपने बच्चों के बीच से दूर कर सकते हैं। जैसा कि आप सभी जानते हैं। कि बाजार में मिल रहे बहुत सारी ऐसी दवाइयां हैं। जिसके सेवन करने से कुपोषण के रोग को कुछ समय के लिए नाम मात्र सही किया जा सकता है। लेकिन बाजार से खरीदे गए इन रसायनिक दवाइयों के सेवन करने से हमारे रोग तो कुछ समय के लिए ठीक हो जाते हैं।

लेकिन इसके साथ-साथ कई अन्य तरह के रोग उत्पन्न भी हो जाते हैं। इसी कारण से मैं हमेशा से आपको यही कहता आया हूं कि आप अपने किसे भी प्रकार के रोग को सही करने के लिए हमेशा आयुर्वेदिक और प्राकृतिक औषधियों का उपयोग करें। क्योंकि हम सभी जानते हैं कि आयुर्वेदिक और प्राकृतिक औषधियों के सेवन करने से हमारे शरीर के अंदर किसी भी प्रकार की साइड इफेक्ट उत्पन्न नहीं होती है। साथ ही साथ हमारी रोग पूरी तरह से सही हो जाता है। भले ही प्राकृतिक और आयुर्वेदिक औषधियों से हमारे रोग को सही करने में कुछ समय लग जाता है। (कुपोषण क्या है कुपोषण के कारण लक्षण और उपाय)

लेकिन आयुर्वेदिक और प्राकृतिक औषधियों से हमारे शरीर के अंदर उत्पन्न हो रहे रोगों  हमेशा के लिए हमारे शरीर से खत्म हो जाते हैं। यदि किसी व्यक्ति या किसी कम आयु के बच्चे में कुपोषण के लक्षण नजर आ रहे हैं। तो ऐसे में बच्चे को दो चम्मच पपीते का रस सुबह-शाम सेवन करवाना चाहिए पपीते के रस के अंदर मौजूद आयुर्वेदिक गुण बच्चों के शरीर के अंदर से कुपोषण के लक्षण को पूरी तरह से समाप्त करने में सफल साबित होता है। यदि किसी व्यस्क पुरुष के अंदर कुपोषण की परेशानी उत्पन्न हो रही है। तो उन्हें भी पपीते का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए। पपीते के सेवन करने से कम आयु के बच्चे के साथ साथ व्यस्क पुरुष के अंदर भी कुपोषण के लक्षण को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है।

आइए हम अब दूसरे नुस्खे के बारे में जानते हैं। आप सभी लोगों ने जामुन का नाम अवश्य ना होगा। हालांकि जामुन हमेशा मिलने वाला फल नहीं है। लेकिन जामुन के सीजन में जामुन आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। एक चम्मच जामुन का रस आधा चम्मच सिरके में मिलाकर बच्चों को चार खुराक में इसका सेवन करवाना चाहिए। यदि किसी व्यस्क पुरुष में भी कुपोषण के लक्षण नजर आ रहे हैं। तो उन्हें जामुन का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए। हालांकि व्यस्त पुरुष भरपूर मात्रा में जामुन का सेवन कर सकते हैं। (कुपोषण क्या है कुपोषण के कारण लक्षण और उपाय)

लेकिन कम आयु के बच्चों को हम ज्यादा मात्रा में जामुन और सिरके का सेवन नहीं करा सकते हैं। इसलिए आप सभी को इस बात पर विशेष ध्यान देना है। कि कम आयु के बच्चे को जामुन और सिरके के एक चम्मच के मिश्रण को चार भागों में बांटकर 4 खुराक में इनका सेवन करवाएं। दूसरे स्थान पर पुरुष जामुन का भरपूर मात्रा में सेवन कर सकते हैं। जामुन के सेवन करने से पुरुष और महिला दोनों में कुपोषण के लक्षण में काफी सुधार नजर आने लगता है। जामुन के सेवन करने से ना केवल हमारे शरीर के अंदर कुपोषण के लक्षण को ही खत्म किया जा सकता है।

जामुन के सेवन करने से हमारे शरीर के अंदर अन्य रोग जैसे मधुमेह ब्लड प्रेशर इत्यादि बीमारियों को भी हमेशा के लिए शरीर से खत्म किया जा सकता है। आप सभी ने बैगन का नाम आवस्य सुना होगा। कुपोषण के लक्षण में बैगन की सब्जी और चने की रोटी रामबाण औषधि साबित हो सकती है। यह भोजन व्यस्क पुरुष और बच्चे दोनों कर सकते हैं। दोनों आयु के इंसान को यह औषधि कुपोषण के लक्षण से छुटकारा दिलाने के लिए सफल साबित होता है। इन सभी प्रकार के घरेलू नुस्खों के उपयोग से कम आयु के साथ साथ व्यस्क पुरुष और महिलाएं अपने शरीर के अंदर उत्पन्न हो रहे कुपोषण के लक्षण को हमेशा के लिए खत्म कर सकते हैं। (कुपोषण क्या है कुपोषण के कारण लक्षण और उपाय)

यदि आपको हमारे द्वारा दिया गया कुपोषण की यह जानकारी पसंद आई हो तो आप इसे अपने दोस्त और परिवार के बीच अवश्य कर दे। क्योंकि हम सभी जानते हैं कि अभी भारतवर्ष के कुल आबादी के 50% आबादी कुपोषण के लक्षणों का शिकार हो चुकी है। अतः आप के द्वारा शेयर किए गए इस जानकारी से काफी लोगों को मदद मिल पाएगी।

यदि आपको कुपोषण के इस जानकारी के बारे में कुछ पूछना है। या आप इस जानकारी के बारे में कुछ बताना चाहते हैं। तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं। आपको कमेंट करने का विकल्प इस पोस्ट के नीचे आसानी से प्राप्त हो जाएगा। यदि आप किसी खास मुद्दे पर हम से बात करना चाहते हैं। तो आप हमें ईमेल के जरिए कमेंट के जरिए और मैसेज के जरिए बता सकते हैं। मैसेज के जरिए बात करने के लिए आपको हमारी वेबसाइट के होम पेज पर जाकर व्हाट्सएप के जरिए मैसेज करने का विकल्प आसानी से प्राप्त कर सकते है। (कुपोषण क्या है कुपोषण के कारण लक्षण और उपाय)

यदि आप कुपोषण के बारे में किसी अन्य जानकारी को रखते हैं। या आप कुपोषण से बचने के किसी अन्य घरेलू नुस्खे को जानते हैं। तो आप हमारे साथ शेयर कर सकते हैं। आपके द्वारा शेयर की गई जानकारी यदि सत्य साबित होती है। तो हम आपके द्वारा दिए गए जानकारी को अपने वेबसाइट पर आपके नाम के साथ संलग्न करेंगे। यदि आपको इस जानकारी में कोई दुविधा या कोई गड़बड़ी नजर आती है। तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं। हम अपने पोस्ट को समय-समय पर अपडेट करते रहते हैं।(कुपोषण क्या है कुपोषण के कारण लक्षण और उपाय)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *