ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी

ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी

ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी

ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम तमिलनाडु में हुआ था। ए पी जे अब्दुल कलाम का पूरा नाम अबुल पकिर जैनुलअबिदीन कलाम था। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम का जन्म एक मुसलमान परिवार में हुआ था। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के पिता का नाम जैनुल आबदीन था। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलम के पिता एक नाव चालक थे। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम की माता असिअम्मा एक ग्रहणी थी। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम का जन्म एक बहुत ही गरीब परिवार में हुआ था। इनके पिता नाव  चलाकर अपने घर को चलाते थे। घर की स्थिति ठीक ना होने के कारण ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को पढ़ाई करने में बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। स्थिति को देखते हुए ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम बचपन से ही अखबार बांटने का काम शुरू कर दिया था। (ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी)

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बच्चे को खेलने कूदने के समय ही ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम ने अपने घर की आर्थिक स्थिति को सुधारने का विचार अपने मन में बना लिया था। किसे पता था कि आगे जाकर यह बालक जो आज अखबार बांट रहा है। इसकी सारी खबरें दुनिया अखबार में ही पढेगी। लेकिन ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम शुरुआती दौर में काफ़ी कठिनाइयों का सामना करते हुए पढ़ाई में लग गए। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम की प्रारंभिक शिक्षा का शुरूआत रामेश्वरम के ही एक छोटे से स्कूल से हुआ था। घर की आर्थिक स्थिति सही ना होने कारण ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम दिनभर अखबार बांटते थे। और उसी के पैसे से स्कूल का फीस भी भरा करते थे।

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उसी के पैसे से अपने कॉपी किताब का भी इंतजाम किया करते थे। कहा जाता है कि शुरुआती दौर में ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम अपने पढ़ाई में सामान्य थे। लेकिन नई नई चीजें सीखने में बहुत ज्यादा आनंद आता था। वह हमेशा कुछ नई चीजों को सीखने के बारे में लगे रहते थे। दसवीं तक की पढ़ाई ए पी जे अब्दुल कलाम ने मैट्रिकुलेशन स्कूल से पूरी की। दसवीं पास हो जाने के बाद ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम तिरछीपल्ली के सेंट जोसेफ कॉलेज में अपना दाखिला लिया। सेंट जोसेफ कॉलेज से 1954 ईस्वी में ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम ने फिजिक्स अर्थात भौतिकी में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की। (ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी)

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शुरुआती दौर से ही ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम नए नए खोज में लगे रहते थे। इसी कारण से वह अपना फिजिक्स अर्थात भौतकी के तरफ ज्यादा देते थे। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम आगे की पढ़ाई करने के लिए मद्रास चले गए। उस समय के मद्रास अभी के चेन्नई में बदल चुका है। तो हम यह भी कह सकते हैं कि वह चेन्नई आ गए। चेन्नई आने के बाद ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम ने एयर स्पेस इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की। एयर स्पेस की पढ़ाई पूरी होने के बाद अब्दुल कलाम ने 1964 ईस्वी में मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी पूरी की।

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शुरुआती दौर में ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम का सपना था कि वह आगे चलकर पायलट बने। और बड़े-बड़े जहाज को हवा में उड़ाये। एक बार की बात है। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम इंडियन एयर फोर्स में सिलेक्ट भी हो गए थे। और इनका नाम लिस्ट के नौवें स्थान पर आया था। लेकिन दुर्भाग्यवश उस लिस्ट से 8 लोगों का ही चयन करना था। जिस कारण से ए पी जे अब्दुल कलाम का चयन उस एयर फोर्स के लिस्ट में ना हो पाया। लेकिन चयन न होने के बाद भी बाद भी ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम मायूस नहीं हुए और वह अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए फिर से जी जोर से मेहनत करने लगे। समय बदलते देर नहीं लगती। और एक समय ऐसा भी आया जब बुलंदियों की ऊंचाई ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम में कदम चूमने लगी। (ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी)

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मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग पढ़ाई पूरी करने के बाद ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन डीआरडीओ में वैज्ञानिक के पद पर नियुक्त किए गए। यहां ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम ने अपने हुनर की शुरुआत छोटे से हेलीकॉप्टर बनाकर किया। डीआरडीओ में नियुक्त होने के बाद ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम का यह पहला प्रोजेक्ट था। जिसमें उन्होंने भारतीय सेना के लिए अपनी तरफ से एक छोटा सा हेलीकॉप्टर का डिजाइन बना कर दिया जो लड़ाई करने के लिए उपयुक्त माना जाता था। कहां जाता है कि ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के द्वारा बनाया गया छोटा सा हेलीकॉप्टर सुरक्षा कर्मचारी के वरिष्ठ पद पर नियुक्त लोगों को इतना भाया कि वह ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम की तारीफ करने लगे। (ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी)

ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी
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जैसा की आप सभी को मैंने पहले भी बताया है कि ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम शुरुआती दौर से ही फिजिक्स अथवा भौतिकी के तरफ ज्यादा रुझान रखते थे। यही एक कारण था कि डीआरडीओ में नियुक्त होने के बाद ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम ने भारतीय सेना के लिए ऐसे हेलीकॉप्टर का डिजाइन और निर्माण कर डाला जो कि युद्ध के लिए उपयुक्त माना जाता था। लेकिन ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को अभी भी संतुष्टि नहीं मिल रही थी। उन्हें कुछ और और बेहतर करने का इरादा था। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम इंडियन नेशनल स्पेस कमेटी के सदस्य भी थे। इसी कारण से उस समय के मशहूर वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के साथ भी ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को काम करने का अवसर मिला।

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ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के द्वारा किए गए कामों की अपार सफलता के कारण 1969 में इनका स्थानांतरण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो में किया गया। यहां 1969 ईस्वी में इसरो में ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को प्रोजेक्ट डायरेक्टर बना दिया गया। यहां भी ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के द्वारा बनाए गए प्रोजेक्ट रोहिणी उपग्रह में भेजने में कामयाब साबित हुआ। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के इसरो में आने के बाद सबसे पहला प्रोजेक्ट उन्हें यही मिला था। उन्हें एक प्रोजेक्ट रोहिणी उपग्रह के ऊपर दिया गया था। इसमें ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को सफलता मिली। (ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी)

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बहुत सारी उपलब्धियों के पाने के बाद ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को भारत सरकार द्वारा भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि भारत रत्न भारत के प्रतिष्ठित व्यक्ति को दिया जाता है। अब्दुल कलाम के द्वारा किए गए कार्य से भारत सरकार इतना प्रभावित हुई कि ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को से भी सम्मानित किया गया।

ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी
ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी

18 जुलाई 2002 में ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को भारतीय जनता पार्टी के तरफ से राष्ट्रपति के चुनाव के लिए भी उम्मीदवार बनाया गया। इनकी अच्छी छवि और अच्छे विचार के कारण किसी ने भी इनका विरोध नहीं किया सभी दल के समर्थन इनको प्राप्त हुए। 18 जुलाई 2002 को ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम जी को राष्ट्रपति पद पर नियुक्त किया गया। (ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी)

आप सभी जानते हैं कि ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम कभी भी भारत के राजनीति से नहीं जुड़े लेकिन फिर भी देश सबसे प्रथम नागरिकता प्राप्त हुआ। जीवन में इतनी तरह की कठिनाइयों का सामना करने की बात भी एक मछुआरा रामेश्वरम के एक छोटे से गांव उसके भारत देश के सबसे उच्च माननीय सबसे सर्वोत्तम नागरिक बन गया। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को मिसाइल मैन भी कहा जाता है। उनके द्वारा बनाए गए इतनी मिसाइलें भारत में मौजूद है उनके द्वारा किया गया इतने कार्य भारत सरकार के लिए मददगार साबित हुआ जिसकी गिनती नहीं की जा सकती।

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मुसलमान परिवार मैं जन्म लेने के बाद भी ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को गीता महाभारत जैसे हिंदू महाकाव्य का अच्छा ज्ञान था। अब्दुल कलाम को गीता के श्लोक बहुत अच्छे से याद थे। यह बड़े ही आश्चर्य की बात है कि ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम प्रत्येक दिन सुबह-सुबह हनुमान चालीसा का पाठ भी किया करते थे। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन की सादगी को देखते हुए उनके ऊपर कई सारी फिल्में और किताबें भी लिखी गई है। पूरे भारत देश ही नहीं पूरी दुनिया में ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम का नाम इतिहास में अमर हो चुका है। इनके द्वारा किए गए कार्य इनके विचार इन की भावनाएं इतना सम्मान करने लायक है कि कोई भी इंसान अगर ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के बारे में जान जाता है इनके विचार के बारे में जान जाता है तो इन्हें सम्मान किए बिना वह नहीं जा सकता।

2002 में जब ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को भारत के सर्वोत्तम नागरिक के तौर पर राष्ट्रपति बनाया गया। राष्ट्रपति के पद पर विराजमान होने के बाद जो भी पैसे सरकार की तरफ से ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को मिलते थे आज तक ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम ने कभी भी एक रुपए का सरकार से नहीं लिया। सरकार द्वारा मिली राशि को हमेशा गरीब बच्चों के को सुधारने के लिए दान किया करते थे। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम ने अपने जीवन में बहुत सारे ऐसे विचार भी प्रदान किए हैं जिन को जानने के बाद ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के प्रति आदर और भावना स्वतः जाग उठती है। (ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी)

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ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को बच्चों से बहुत ज्यादा लगाव था। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के दिए गए भाषण में आज तक कोई भी ऐसा भाषण नहीं है जिसमें ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम ने देश के युवाओं के हित में कुछ ना बोला हो। यह भी एक कारण है कि देश की युवा ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानते हैं। ए पी जे अब्दुल कलाम ने बहुत सारी किताबें भी लिखी हैं जिनका नाम इंडिया ट्वेंटी-20 विंग्स ऑफ़ फायर इग्नाइटेड माइंड द मनिफिसको फॉर चेंज इंडिया माय जर्नी एडवांटेज इंडिया इत्यादि शामिल है।

1981 ईस्वी में भारत सरकार द्वारा ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया गया था। 1990 में ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को भारत सरकार के द्वारा मानित किया गया था। 1997 में ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को भारत सरकार द्वारा देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया। 1997 में ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को इंदिरा गांधी अवार्ड से सम्मानित किया गया। 2011 में IEEE मैं मेंबरशिप भी दिया गया।

ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी
ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी

यह सारे अवार्ड ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के सफलता की गाथा इतिहास में अमर कर देती है। एक छोटे से गांव का बच्चा पूरे इतिहास में अपना नाम अमर कर देता है। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम  के लिए सबसे लोकप्रिय बात यह है कि कभी भी ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम किसी की बुराई के बारे में नहीं बोलते थे। किसी का बुरा ही सोचते थे। (ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी)

सलाह और सफलता Advice does not always lead to success

भारत में अर्थात भारत के लोगों का यह मानना है कि पाकिस्तान उनका सबसे बड़ा दुश्मन देश है। लेकिन ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने कभी पाकिस्तान के बारे में बुरा नहीं सोचा। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम हमेशा सभी देशों को उनके विकास के बारे में नए-नए मार्ग बताया करते थे। हमेशा से ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम नए नए विचार नए नए खोज में अपना जीवन का समय व्यतीत करते थे। (ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी)

जिस दिन हमारे सिग्नेचर ऑटोग्राफ में बदल जाए। आप मान लीजिए आप कामयाब हो गए।

27 जुलाई 2015 डॉ ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम शिलांग गए थे। जैसा की आप सभी को मैंने पहले भी बताया है ए पी जे अब्दुल कलाम युवाओं से ज्यादा सनेह और प्रेम रखते थे। यही कारण था कि वह युवाओं को अच्छे दिशा में मोड़ने के लिए हमेशा जगह जगह जाकर उन्हें प्रेरित किया करते थे। ऐसा ही वह शिलांग में कुछ युवाओं को प्रेरित करने के लिए अपने विचार प्रदान करने गए हुए थे। वहां आई आई एम शिलांग में फंक्शन के दौरान ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम की तबियत खराब हो गई। और बच्चों को लेक्चर देने के बीच में ही ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को शिलांग के एक हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया। उनकी हालत में कोई सुधार ना होने के कारण उन्हें आईसीयू में एडमिट किया गया।

लेकिन उन्होंने icu  में ही अपना दम तोड़ दिया। और शिलांग में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। पूरे भारत में नहीं पूरी दुनिया भर में शोक का ऐसा माहौल आया कि पूरी दुनिया शोक में डूब चुकी थी। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के मरने का खबर पूरी दुनिया में आग की तरह फैल रही थी। पूरी दुनिया को इस बात का अचंभा होने लगा और सभी सोक में डूब गए थे। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के देहांत के बाद 7 दिन का राजकीय शोक का एलान किया गया। 84 वर्ष की आयु में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के मृत्यु के बाद उन्हें 28 जुलाई को गुवाहाटी से दिल्ली लाया गया (ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी)

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जहां उन्हें दिल्ली के घर सभी के दर्शन के लिए रखा गया उन्हें भारत के सभी बड़े-बड़े नेता ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को श्रद्धांजलि देने आने लगे। कहा जाता है कि ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के श्रद्धांजलि देने के लिए जापान से भी साइंटिस्ट आए थे। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम की छवि ऐसी थी कि बाहर से आए हुए भी साइंटिस्टों के आंखों में आंसू भर गया। 30 जुलाई 2015 को ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव रामेश्वरम के पास ही हुआ था।(ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी)

ए पी जे अब्दुल कलाम ने युवाओं को प्रेरित करने के लिए बहुत सारे अपने ऐसे विचार दिए हैं जिसे यदि युवा पालन करते हैं तो अपने जीवन में सफल अवश्य हो जाएंगे। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम का कहना है कि पहली बार की सफलता हमारी किस्मत पर निर्भर करती है लेकिन यदि फिर से हम उसी सफलता को पा लेते हैं तो यह हमारे मेहनत और लगन का जीता जागता सबूत होता है। जब भी आप किसी कार्य को करने के लिए पूर्णरूपेण खुद को तत्पर कर देते हैं और पहली बार जब आप उस कार्य में सफलता पा लेते हैं।

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तो बहुत सारे ऐसे लोग आपको मिल जाएंगे। जो यह भी कह सकते हैं। कि यह कार्य में आपको किस्मत के भरोसे सफलता हाथ लग गई। लेकिन जब आप उसी कार्य को दुबारा उसी काम में फिर से सफलता हासिल कर लेंगे तो यह आपके मेहनत को दर्शाएगा। (ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी)

पूरी दुनिया में ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम की कही हुई यह बात इतनी प्रसिद्ध है सायद आप लोगों ने भी इसे अवश्य सुना ही होगा। सपने वह सच नहीं होते जो हमारे सोने के बाद आते हैं। सपने वो सच होते हैं जो हमें सोने नहीं देते। जी हां यह बात सुनने के बाद बहुत सारे लोगों में एक जुनून आ जाता है। इस पंक्ति को गहराई को देखा जाए तो यह बात कहीं ना कहीं सही भी साबित होती है। जब भी हम किसी उद्देश्य को किसी कार्य को करने के लिए खुद को तत्पर करते हैं। तो यह जरूरी नहीं को करने के लिए हम सिर्फ मन बनाते रहे। नए नए प्लानिंग करते रहे। हमें अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अपनी नींद का तयाग करना पड़ता है। 

यदि हम किसी चीज को सपने में देखते हैं। और वह हमारे सोने के बाद आता है। तो यह एक बड़ी ही साधारण सी बात होती है। क्योंकि दुनिया में ऐसे बहुत आदमी हैं। जिन्हें सोने के बाद सपने देखने की आदत है। लेकिन वह सपना कभी हकीकत में नहीं बदल सकता। यदि आप किसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सपना देखती हैं तो वह लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आपको नींद नहीं आती है। और जब आप ऐसे कार्य के लिए इस तरह का जूनून पाल लेते हैं। तो एक समय अवश्य ऐसा आता है कि आप अपने उस लक्ष्य की प्राप्ति कर लेते हैं। (ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी)

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शायद ही किसी व्यक्ति को काले रंग से प्यार होगा। काला रंग से प्यार करने वाले पूरी दुनिया में बहुत कम ही लोग मिलते हैं। लेकिन ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम का कहना था कि ब्लैकबोर्ड का रंग काला होता है। और ब्लैकबोर्ड हमारे भविष्य बदल देती है। काला होने के बाद भी ब्लैकबोर्ड हमारे भविष्य को चमकीला और चमकदार बना देता है। तो यह जरूरी नहीं कि आपका रंग कैसा है आप कैसे दिखते हैं। आप क्या करते हैं। एक कामयाब इंसान की सूरत नहीं सीरत देखी जाती है। (ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी)

ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी
ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी

अपने जीवन में कभी भी नकारात्मक विचार ना लाएं। इंसान के जीवन में नकारात्मक विचार उसे सफलता की ओर जाने से हमेशा रोकता है। सबसे बड़ी बात कही जाती है कि इंसान को सोचने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगा सकता। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम का कहना था कि यदि आप किसी चीज को सोच सकते हैं। तो आप उस चीज को कर भी सकते हैं। बहुत बड़ी बात है यदि हम किसी चीज के बारे में सोचते हैं तो हम उस चीज को कर भी सकते हैं।

यदि कोई हमारी सोच पर प्रतिबंध नहीं लगा सकता है तो हमारी सफलता में भी कोई प्रतिबंध नहीं लगा सकता है। अपनी सफलता को पाने के लिए हमें कठिन मेहनत लगन और इमानदारी पूर्वक अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए तप करना अति आवश्यक है। (ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी)

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कुछ ऐसे भी बाती ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के बारे में है। जिसे पूरी दुनिया अनजान है। मैं आप लोगों को ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के  के बारे में बताता हूं जिन्हें सुनकर आप यह सोचने पर मजबूर हो जायेंगे कि दुनिया का सबसे बड़ा साइंटिस्ट भारत देश के सर्वोत्तम स्थान को प्राप्त करने वाले राष्ट्रपति ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम की भावना कितनी सरल और सर्वोत्तम थी।

एक बार रामेश्वरम से डॉ ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम में कुछ रिश्तेदार डॉ ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम से मिलने आए। रामेश्वरम से लगभग 50 से 70  लोग आये थे। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम से मिलने राष्ट्रपति भवन आ रहे थे। उन्हें लेने ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम खुद ही स्टेशन पर गए। और उन्होंने अपने आसपास के सभी लोगों से यह सख्त हिदायत दी कि उनसे मिलने आने वाले सभी लोगों के लिए कोई भी राष्ट्रपति भवन के आसपास के किसी गाड़ी का उपयोग नहीं किया जाएगा। उनके रहने ठहरने खाने-पीने किसी भी तरह का भुगतान राष्ट्रपति कोस से नहीं किया जाएगा। (ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी)

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16 दिन तक 50 से 70  लोग ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के पास रहे। जिनका टोटल खर्चे का ब्यौरा 4 लाख  आया। जिसका भुगतान ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम ने अपने जेब से दिया। यह सोचकर बड़ी हैरानी होती है कि भारत के सवोच्य स्थान पर नियुक्त डॉ ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम की ऐसी सरल और साधारण भावना इंसान को दिल के जीत लेने के लिए काफी है। अभी के समय में भी ऐसे इंसान हैं। कि यह भावना अभी के युवाओं के लिए काफी प्रेरणादायक साबित होती है।

ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम की जिंदगी से जुड़ी मैं अब दूसरी किस्से के बारे में आपको विस्तार से बताता हूं। जिसे पढ़कर आप को बहुत आश्चर्य हुआ कि इंसान के मन में आदर और सत्कार था अपने से बड़े और अपने से श्रेस्ट लोगों के लिए। एक बार की बात है एक दीक्षांत समारोह में ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को चीफ गेस्ट के तौर पर बुलाया गया। जब उस समारोह में वह पहुंचे तो उन्होंने देखा कि स्टेज पर पांच कुर्सियां रखी हुई है।

जिसमें से एक कुर्सी सबसे बड़ी है और बाकी उस कुर्सी की अपेक्षा छोटी है। जब ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम वहां पहुंचे तो उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ कि ऐसा क्यों है। जब उस यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ वाइस चांसलर और चांसलर और उसे स्टेट के गवर्नर ने ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को उस कुर्सी पर बैठने के लिए कहा तो उन्होंने साफ मना कर दिया। (ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी)

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दीक्षांत समारोह में एक कुर्सी बड़ी इसलिए रखी गई थी क्योंकि देश के सर्वोत्तम नागरिक डॉक्टर ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को उसी पर बैठना था। जब ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम बैठने से मना कर दिया तो उनसे इस बात का कारण पूछा गया। उन्होंने कहा कि इस कुर्सी के हकदार यहां के वाइस चांसलर हैं। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम बगल की छोटी कुर्सी पर बैठ गए और बड़ी कुर्सी पर वाइस चांसलर को बैठने के लिए बोला। वहां पर उपस्थित सभी लोगों को बड़ा आश्चर्य हुआ।

तुरंत उसी तरह के दिखने वाले चार कुर्सी और मंगवाई गई। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम वहां पर बैठे और दीक्षांत समारोह का भरपूर आनंद लिया। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम का कहना है कि गुरु और माता-पिता का दर्जा हमेशा अपने जिंदगी में सबसे ऊपर होता है। अतः हमें पूरी जिंदगी गुरु और माता-पिता की देखभाल सेवा आदर-सत्कार अवश्य करना चाहिए। (ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी)

ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन से जुड़े तीसरे किस्से के बारे में विस्तार से बताने जा रहा हूं। राष्ट्रपति बनने के बाद जब पहली बार डॉक्टर ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम केरल गए। डॉक्टर ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम का रहना सहना केरल की राजभवन में हुआ। कहा जाता है कि उनके सम्मान के लिए वहां पर बहुत सारे लोग आए हुए थे लेकिन ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम ने अपने बगल में एक मोची को बिठाया और एक छोटे होटल के मालिक को बिठाया। बाद में उन्होंने बताया कि यह मोची  जब वह साइंटिस्ट बनने के दौरान यहां पर पढ़ाई करते थे तो जूते की गांठे लगाया करता था। (ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरणादायक सफर हिंदी में जानकारी)

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पैसा ना होने के कारण डॉक्टर ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम नए जूते नहीं खरीद सकते थे इसी कारण से मोदी उनके पुराने जूते को बार-बार ठीक करके उन्हें पहनने के लिए दिया करता था। और उस समय में डॉक्टर ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम एक छोटे से होटल में बैठकर खाना खाया करते थे इसी कारण से अपने आसपास उन्होंने उस मोची और उस  होटल के मालिक को बिठाया। अक्सर लोगों में देखा जाता है कि जब उनके पास संपत्ति और समृद्धि आती है तो उनके विचार उल्टे हो जाते हैं। वह किसी भी अपने से वरिष्ठ पुरुष का आदर नहीं करते हैं। लेकिन वही डॉक्टर ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम को देखा जाए तो यह सही में एक महान हस्ती महान पुरुष थे।

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